राजनीति के कबीर राजनारायण की ऐतिहासिक विजय पर तहसील परिसर में संगोष्ठी”
इलाहाबाद हाईकोर्ट के 12 जून 1975 के फैसले को बताया न्यायपालिका का गौरव, अधिवक्ताओं ने मनाया विजय दिवस
राजातालाब। तहसील परिसर में गुरुवार को “राजनीति के कबीर” लोकबंधु राजनारायण की ऐतिहासिक विजय पर संगोष्ठी आयोजित की गई। 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा के उस फैसले को याद किया गया जिसने देश की सियासत को हिला दिया था।
कोर्ट ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को चुनावी धांधली का दोषी पाते हुए उनका रायबरेली से लोकसभा चुनाव रद्द कर दिया था। इसी फैसले के बाद देश में आपातकाल की पृष्ठभूमि तैयार हुई।एडवोकेट प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि इस केस में इंदिरा गांधी 18 मार्च 1975 को हाईकोर्ट पहुंचीं और करीब 5 घंटे तक अपने चुनाव व निर्वाचन संबंधी सवालों के जवाब दिए। सुशील कुमार तोयज ने बताया कि मुकदमे में उन पर दो आरोप थे। पहला, यशपाल कपूर को चुनाव एजेंट बनाया गया जबकि वह शासकीय सेवा में थे। दूसरा, चुनावी मंच पर लाउडस्पीकर लगाने के लिए लोक निर्माण विभाग के कर्मचारी लगे थे। दोनों आरोप सिद्ध हुए।वक्ताओं ने कहा कि यह भारत में स्वतंत्र न्यायपालिका का ऐतिहासिक फैसला था, जिसे अधिवक्ता समाज आज विजय दिवस के रूप में मना रहा है।संगोष्ठी में अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह, महामंत्री वीरेंद्र कुमार यादव, पूर्व अध्यक्ष दिनेश नारायण शर्मा, महामंत्री धीरेंद्र प्रताप सिंह, दुर्गेश कुमार सिंह, पुष्पराज मौर्य, पंकज गिरी, दयाराम, लालजी सिंह, अमित प्रताप सिंह समेत वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने संबोधन दिया।अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने मांग उठाई कि गंजारी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का नाम लोकबंधु राजनारायण के नाम पर किया जाय।








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