G7 शिखर सम्मेलन में वैश्विक नेताओं को प्रधानमंत्री मोदी ने भेंट किया बनारसी सिल्क स्टोल, दुनिया के सामने प्रदर्शित हुई भारतीय बुनकरी की अद्भुत विरासत
G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और वैश्विक नेताओं को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और हस्तशिल्प परंपरा का प्रतीक बनारसी सिल्क स्टोल भेंट किया। इस विशेष उपहार के माध्यम से भारत ने न केवल अपनी प्राचीन बुनकरी कला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया, बल्कि देश की सांस्कृतिक पहचान, शिल्प कौशल और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को भी मजबूती से दुनिया के सामने रखा।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी में तैयार किया जाने वाला बनारसी सिल्क स्टोल अपनी उत्कृष्ट बुनाई, आकर्षक बनावट और बारीक जरी कारीगरी के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इस पारंपरिक वस्त्र पर बने जटिल डिज़ाइन, पुष्प आकृतियां और प्रकृति से प्रेरित कलात्मक रूपांकन भारतीय शिल्पकारों की अद्भुत सृजनशीलता और कौशल को दर्शाते हैं। बनारसी रेशम की पहचान उसकी भव्यता, कोमलता और लंबे समय तक टिकाऊ रहने वाली गुणवत्ता के कारण भी है।

बनारसी बुनकरी की परंपरा कई सदियों पुरानी मानी जाती है। इस कला को वाराणसी के कारीगरों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित रखा है। आज भी हजारों बुनकर परिवार इस शिल्प से जुड़े हुए हैं और अपनी मेहनत तथा कौशल के बल पर इसे जीवंत बनाए हुए हैं। आधुनिक दौर में भी बनारसी रेशम भारतीय हस्तशिल्प और वस्त्र उद्योग की सबसे प्रतिष्ठित पहचान बना हुआ है।
बनारसी सिल्क को भौगोलिक संकेतक (GI) टैग भी प्राप्त है, जो इसकी विशिष्टता और क्षेत्रीय पहचान को प्रमाणित करता है। GI टैग यह सुनिश्चित करता है कि इस उत्पाद की गुणवत्ता और विशेषता वाराणसी की पारंपरिक बुनकरी से जुड़ी हुई है। यही कारण है कि बनारसी रेशम को भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में विशेष सम्मान प्राप्त है।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा G7 जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मंच पर बनारसी सिल्क स्टोल को उपहार के रूप में चुनना भारतीय कारीगरों और बुनकरों के लिए भी गौरव का विषय माना जा रहा है। यह पहल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक कला और स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे उपहार भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करने के साथ-साथ देश के हस्तशिल्प और पारंपरिक उद्योगों को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने में भी सहायक होते हैं। बनारसी सिल्क स्टोल केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कला, इतिहास और शिल्प परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जिसने एक बार फिर वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का परिचय कराया।







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