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3,000 लीटर डीज़ल के धुएँ की जगह केवल जलवाष्प का उत्सर्जन : भारत की हाइड्रोजन ट्रेन की कहानी

3,000 लीटर डीज़ल के धुएँ की जगह केवल जलवाष्प का उत्सर्जन : भारत की हाइड्रोजन ट्रेन की कहानी

Posted On: 25 JUL 2026 1:59PM by PIB Delhi

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को 17 जुलाई, 2026 को दिल्ली क्षेत्र में जींद–सोनीपत रेलखंड पर हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। अब तक यह ट्रेन 1,200 किलोमीटर से अधिक की सफल यात्रा पूरी कर चुकी है, जिससे 3,200 लीटर से अधिक डीज़ल की बचत हुई है।

यह हाइड्रोजन ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच होने वाली रासायनिक अभिक्रिया से ट्रेन के भीतर ही बिजली उत्पन्न करती है। इस प्रक्रिया से ट्रेन को चलाने के लिए आवश्यक विद्युत ऊर्जा प्राप्त होती है तथा उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प (Water Vapour) निकलती है। इसमें न धुआँ निकलता है और न ही टेलपाइप से कार्बन उत्सर्जन होता है, जिससे यह वर्तमान में उपलब्ध रेल प्रणोदन (Rail Propulsion) की सबसे स्वच्छ तकनीक बन जाती है।

 

 

यह परियोजना भारतीय रेल के नेतृत्व में विकसित एक पूर्णतः स्वदेशी पहल है। 10 कोच वाली इस ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार हैं, जो संयुक्त रूप से 2,400 किलोवाट शक्ति प्रदान करती हैं। इसके साथ लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियाँ तथा हाइड्रोजन सिलेंडर भी लगाए गए हैं।

इस परियोजना के तहत जींद में भारतीय रेल की पहली समर्पित हाइड्रोजन भंडारण सुविधा स्थापित की गई है। यहाँ 500 Bar तक के दाब (Pressure) पर ग्रीन हाइड्रोजन का भंडारण तथा 350 Bar के दाब पर ईंधन भरने की व्यवस्था है। इस सुविधा की कुल भंडारण क्षमता लगभग 3,000 किलोग्राम है।

 

ट्रेन में सुरक्षा के लिए अनेक स्वतंत्र प्रणालियाँ स्थापित की गई हैं, जो हाइड्रोजन रिसाव, अधिक तापमान, आग और धुएँ का स्वतः पता लगाती हैं। इनके साथ स्वचालित शट-ऑफ सिस्टम, निरंतर वेंटिलेशन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का अनुपालन तथा सभी अनिवार्य परीक्षण और सत्यापन भी सुनिश्चित किए गए हैं। जींद–सोनीपत रेलखंड पर सफल परिचालन के बाद जल्द ही इसका परीक्षण दिल्ली मार्ग पर भी प्रारंभ किया जाएगा।

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Author: Liveupweb

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