नया दौर, नई इंजीनियरिंग: कैसे SN Subrahmanyan गढ़ रहे हैं L&T का अगला दशक
वाराणसी:भारत का अगला इंफ्रास्ट्रक्चर दौर केवल कंक्रीट और स्टील से नहीं बनेगा। इसकी नींव कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल इंजीनियरिंग, डेटा सेंटर, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसी तकनीकों पर भी टिकी होगी। इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए लार्सन एंड टुब्रो (L&T) खुद को एक पारंपरिक इंजीनियरिंग एवं निर्माण कंपनी से तकनीक-सक्षम इंजीनियरिंग समूह में बदल रही है। इस परिवर्तन के केंद्र में हैं कंपनी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एस. एन. सुब्रह्मण्यन (SN Subrahmanyan)।

चार दशकों से अधिक समय से Subrahmanyan ने L&T को बदलते देखा है। एक प्रोजेक्ट प्लानिंग इंजीनियर के रूप में शुरुआत करने से लेकर आज देश के सबसे बड़े इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी समूहों में से एक का नेतृत्व करने तक का उनका सफर, भारत के औद्योगिक विकास की कहानी से भी जुड़ता है।
प्रोजेक्ट इंजीनियर से अध्यक्ष तक
1984 में L&T से जुड़ने के बाद Subrahmanyan ने भारत और मध्य-पूर्व में कई जटिल इंजीनियरिंग परियोजनाओं का नेतृत्व किया। परियोजना निष्पादन, जोखिम प्रबंधन और बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा निर्माण का यही अनुभव आगे चलकर उनकी नेतृत्व शैली की पहचान बना। 2017 में वे कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक बने और 2023 में ए. एम. नाइक के बाद अध्यक्ष का पद संभाला।
जहां कई कारोबारी नेता बदलाव को अधिग्रहणों या वित्तीय पुनर्गठन के नजरिए से देखते हैं, वहीं Subrahmanyan का दृष्टिकोण संचालन और निष्पादन पर आधारित रहा है। यही अनुभव आज भी तय करता है कि L&T किन क्षेत्रों में निवेश करे, जोखिम का आकलन कैसे करे और दीर्घकालिक विकास के लिए किस दिशा में आगे बढ़े।
अनुशासित निष्पादन से मजबूत विकास
L&T का हालिया वित्तीय प्रदर्शन इसी सोच को दर्शाता है। कंपनी की FY2025-26 इंटीग्रेटेड एनुअल रिपोर्ट के अनुसार, समूह का समेकित राजस्व बढ़कर ₹2.86 लाख करोड़ पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक है। इसी दौरान कंपनी का Recurring Profit After Tax (PAT) 18 प्रतिशत बढ़कर ₹17,238 करोड़ हो गया। वर्ष के दौरान L&T को रिकॉर्ड ₹4.36 लाख करोड़ के नए ऑर्डर मिले, जिससे उसकी ऑर्डर बुक बढ़कर ₹7.40 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। ये आंकड़े केवल कंपनी के आकार में वृद्धि नहीं, बल्कि उसके मजबूत निष्पादन, अनुशासित परियोजना चयन और ग्राहकों के भरोसे को भी दर्शाते हैं।
Subrahmanyan लंबे समय से चुनिंदा बोली लगाने, बेहतर परियोजना प्रबंधन और पूंजी अनुशासन पर जोर देते रहे हैं। यही रणनीति L&T को तेज विकास के साथ-साथ लाभप्रदता बनाए रखने में भी मदद कर रही है।
पारंपरिक इंजीनियरिंग से तकनीक-संचालित भविष्य की ओर
Subrahmanyan के कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक L&T का प्रौद्योगिकी क्षेत्र में लगातार बढ़ता निवेश रहा है।
2019 में Mindtree के अधिग्रहण और बाद में L&T Infotech के साथ उसके विलय से बने LTIMindtree ने समूह की डिजिटल क्षमताओं को नई दिशा दी। वहीं L&T Technology Services के साथ मिलकर कंपनी आज डिजिटल इंजीनियरिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता को मजबूत कर रही है।
L&T अपनी इंजीनियरिंग विरासत को पीछे नहीं छोड़ रही, बल्कि उसे डिजिटल तकनीकों के साथ जोड़कर नए दौर की इंजीनियरिंग की परिभाषा गढ़ रही है। आधुनिक बुनियादी ढांचे में अब केवल कंक्रीट और स्टील ही नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर, डेटा और ऑटोमेशन भी उतने ही महत्वपूर्ण हो चुके हैं।
भारत के अगले औद्योगिक दौर की तैयारी
भारत के बुनियादी ढांचे का अगला चरण केवल सड़कों, पुलों और औद्योगिक परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें AI-सक्षम डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल अवसंरचना जैसी नई प्राथमिकताएं शामिल होंगी।
इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए L&T ने अपनी ‘लक्ष्य 2031’ रणनीति तैयार की है। इस रोडमैप में AI आधारित संचालन, डिजिटल इंजीनियरिंग, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ ऊर्जा को भविष्य के प्रमुख विकास क्षेत्रों के रूप में पहचाना गया है।
FY2025-26 के दौरान Larsen & Toubro Vyoma ने AI-ready डेटा सेंटर क्षमताओं का विस्तार किया और Sovereign Cloud Platform की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की। कंपनी ने Electronics Products & Systems (EPS) को भी एक रणनीतिक व्यवसाय के रूप में विकसित करना शुरू किया, जिससे भविष्य की डीप-टेक क्षमताओं को मजबूत किया जा सके।
इसी रणनीति के तहत NVIDIA के साथ L&T की साझेदारी भारत में Sovereign AI Infrastructure और AI-ready कंप्यूटिंग क्षमताओं के विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इसके साथ ही कंपनी रक्षा विनिर्माण, ग्रीन हाइड्रोजन, औद्योगिक ऑटोमेशन, प्रिसिजन इंजीनियरिंग और सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में भी अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है। यह स्पष्ट संकेत है कि L&T केवल वर्तमान की इंजीनियरिंग जरूरतों को पूरा नहीं कर रही, बल्कि भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था के लिए भी खुद को तैयार कर रही है।
वित्तीय प्रदर्शन से आगे की लीडरशिप
Subrahmanyan का नेतृत्व केवल वित्तीय उपलब्धियों तक सीमित नहीं है। उनके कार्यकाल में L&T ने डिजिटल इंजीनियरिंग, डेटा आधारित निर्णय-प्रक्रिया और उन्नत परियोजना प्रबंधन प्रणालियों के उपयोग को लगातार बढ़ाया है, जिससे जटिल परियोजनाओं के निष्पादन में अधिक दक्षता औरc पारदर्शिता आई है।
साथ ही, कंपनी के सेवा व्यवसायों ने भी लगातार मजबूत प्रदर्शन किया है और अब वे समूह के कुल राजस्व में लगभग एक-चौथाई का योगदान देते हैं। यह दर्शाता है कि L&T धीरे-धीरे पारंपरिक EPC मॉडल से आगे बढ़कर इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी और सेवाओं पर आधारित एक अधिक संतुलित व्यवसाय मॉडल विकसित कर रही है।
ये सभी बदलाव किसी बड़े नाटकीय परिवर्तन का परिणाम नहीं, बल्कि लगातार सुधार, तकनीकी निवेश और दीर्घकालिक रणनीतिक सोच का हिस्सा हैं। Subrahmanyan ने L&T की मूल पहचान को बदले बिना उसकी क्षमताओं का विस्तार किया है।
आगे की राह
भारत की विकास यात्रा अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा परिवर्तन, उन्नत विनिर्माण और डिजिटल अवसंरचना जैसे क्षेत्रों से जुड़ती जा रही है। आने वाले वर्षों में सफलता उन्हीं इंजीनियरिंग कंपनियों को मिलेगी जो भौतिक ढांचे को बुद्धिमान प्रणालियों, सॉफ्टवेयर और उन्नत औद्योगिक क्षमताओं के साथ जोड़ सकें।
SN Subrahmanyan के नेतृत्व में L&T उसी भविष्य की तैयारी कर रही है। एक पारंपरिक इंजीनियरिंग एवं निर्माण कंपनी से तकनीक-सक्षम इंजीनियरिंग समूह बनने तक का उसका सफर केवल कारोबारी विस्तार की कहानी नहीं, बल्कि भारतीय इंजीनियरिंग के बदलते स्वरूप का भी प्रतिबिंब है।
अगर यह रणनीति इसी गति से आगे बढ़ती रही, तो SN Subrahmanyan को केवल L&T के अध्यक्ष के रूप में नहीं, बल्कि उस नेता के रूप में भी याद किया जाएगा जिसने भारत की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग कंपनियों में से एक को अगले औद्योगिक दौर के लिए तैयार किया








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