–श्री मनोज जोशी , औषध विभाग, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में सचिव
रोग के लक्षण से लेकर निदान तक, सुरक्षित प्रसव से लेकर जटिल मस्तिष्क और दिल की बायपास सर्जरी तक, साधारण फ्रैक्चर से लेकर जटिल घुटना प्रत्यारोपण तक- दुनियाभर में मेडटेक (चिकित्सा प्रौद्योगिकी) उद्योग में हुई प्रगति ने चिकित्सा जगत को जीवन बचाने और जीवन स्तर में सुधार करने में सहायता की है। महर्षि सुश्रुत की भूमि भारत में, मेडटेक को एक रणनीतिक क्षेत्र माना जाता है और भारत सरकार इसके विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
नीतिगत समर्थन, लागत लाभ और पूंजी प्रवाह से संचालित यह क्षेत्र वर्तमान में लगभग 16-20 अरब डॉलर का है, जिसमें 4 अरब डॉलर का निर्यात शामिल है। देश में उपभोग योग्य सामग्रियों से लेकर कई उच्च-स्तरीय चिकित्सा उपकरणों का निर्माण किया जा रहा है। घरेलू विनिर्माण 2019-20 के लगभग 39,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 80,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

भारतीय मेडटेक क्षेत्र में अमरीका और यूरोप की बहुराष्ट्रीय कंपनियों की कई वर्षों से अच्छी उपस्थिति रही है, जो इमेजिंग और नैदानिक उपकरणों का निर्माण करती आ रही हैं। अब पिछले एक दशक में, भारतीय कंपनियों ने भी रेडियो-डायग्नोस्टिक और रेडियोथेरेपी उपकरण विनिर्माण के क्षेत्र में प्रवेश किया है। इसके अलावा, इस क्षेत्र का विकास व्यापक रहा है और यह टियर 2 तथा टियर 3 शहरों तक भी फैल रहा है।
चिकित्सा उपकरण अस्पतालों, क्लीनिकों और डायग्नोस्टिक लैब में पूंजीगत निवेश के साथ-साथ परिचालन व्यय की प्रमुख वस्तुएं हैं। घरेलू मांग में घरेलू विनिर्माण की हिस्सेदारी 2022 के 20 प्रतिशत से दोगुने से अधिक बढ़कर 2025 में 45 प्रतिशत हो गई, जो 40 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक दर से बढ़ रही है। इस उद्योग में वित्तीय वर्ष 2030 तक 30 अरब डॉलर तक पहुंचने और 2047 तक वैश्विक बाजार निर्यात में 10-12 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने की क्षमता है।
सरकार घरेलू कंपनियों को आयात पर निर्भर हिस्सों को लक्षित करने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है। चिकित्सा उपकरणों के लिए ‘उत्पादन आधारित प्रोत्साहन’ (PLI) योजना के तहत 27 ग्रीनफील्ड परियोजनाएं शुरू की गई हैं और 55 से अधिक उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है। मेडिकल डिवाइसेस पार्क योजना के तहत, ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश), उज्जैन (मध्य प्रदेश), और कांचीपुरम (तमिलनाडु) में तीन पार्क 2027 की शुरुआत तक चालू होने की उम्मीद है। फार्मास्यूटिकल्स विभाग स्वदेशीकरण तथा अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से अतिरिक्त सहायता प्रदान करके 8-10 उच्च मूल्य वाले चिकित्सा उपकरणों- जैसे MRI सिस्टम और उनके घटक, पेसमेकर, निरंतर ग्लूकोज निगरानी उपकरण, उन्नत अल्ट्रासाउंड मशीन आदि को तेजी से विकसित करने का प्रस्ताव कर रहा है।
अब मुख्य ध्यान विशेषरूप से उच्च-स्तरीय चिकित्सा उपकरणों और इमेजिंग उपकरणों में मूल्य श्रृंखला के स्थानीयकरण को सुदृढ़ करने पर है। इसके लिए एक मजबूत पुर्जा विनिर्माण ईकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है और घरेलू मूल्य संवर्धन को वर्तमान स्तर (~25%) से बढ़ाकर 40-45 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। दीर्घकालिक दृष्टिकोण से, सरकार की योजना NIPERs के माध्यम से मजबूत अकादमिक-उद्योग संबंधों के साथ एक नवाचार ईकोसिस्टम बनाने की है। सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत का सहयोग महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल कागजी विचारों के बजाय “उत्कृष्ट सिद्धांतों” को स्थायी क्षमताओं में बदलता है।
गुणवत्ता, ब्रांडिंग और प्रतिष्ठा न केवल घरेलू विकास के लिए बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए भी एक महत्वपूर्ण कारक है। सुरक्षा में सुधार, प्रभावशीलता में वृद्धि और सामर्थ्य बढ़ाने पर मजबूत ध्यान देने के साथ अनुसंधान और विकास में अधिक निवेश करने की आवश्यकता है। पिछले 6 वर्षों में, सरकार ने चिकित्सा उपकरण नियमों को वैश्विक नियामक मानकों के अनुरूप बनाया है। केंद्रीय लाइसेंसिंग प्राधिकरण (CDSCO) में चिकित्सा उपकरण वर्टिकल के मजबूत होने से, आने वाले दिनों में विनियमन की गुणवत्ता में और सुधार होगा।
जैसे-जैसे देश विकसित भारत@2047 की ओर बढ़ रहा है, मेडटेक क्षेत्र निरंतर गति बनाए रखने के लिए लागत लाभ, नवाचार और स्केलेबिलिटी को एक साथ लाने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। इसका लाभ केवल देश के भीतर किफायती स्वास्थ्य सेवा तक बेहतर पहुंच तक सीमित नहीं रहेगा; यह भारतीय निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता बनने में भी मदद करेगा।
भारत ने ऐतिहासिक रूप से चिकित्सा उपकरणों के उपभोग्य और निपटान योग्य क्षेत्र में अपना दबदबा बनाए रखा है। ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों ने दुनियाभर के देशों में अपनी जगह बनाई है। अब रोडमैप यह है कि सटीक इंजीनियरिंग और लागत प्रभावी चिकित्सा उपकरणों में अग्रणी के रूप में भारत की क्षमता को और बढ़ाया जाए तथा इसे गुणवत्तापूर्ण और किफायती चिकित्सा उपकरणों के एक पसंदीदा वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित किया जाए।
(लेखक औषध विभाग, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में सचिव हैं)








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