टीबी मरीजों के पोषण और उपचार में सहयोग का संकल्प, 76 लाभार्थियों को मिली पोषण पोटली
काशी विद्यापीठ में सेवा संकल्प अभियान के तहत हुआ आयोजन, नियमित दवा और पौष्टिक आहार लेने की अपील
वाराणसी, 17 सितंबर। प्रधानमंत्री के जन्मदिवस के अवसर पर जिले में चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान के तहत महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में गुरुवार को टीबी मरीजों के लिए पोषण पोटली वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान विश्वविद्यालय की ओर से 76 टीबी मरीजों को पोषण पोटली प्रदान की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य टीबी मरीजों को उपचार के साथ पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के साथ ही उनके प्रति सामाजिक सहयोग और संवेदनशीलता को बढ़ावा देना रहा।
कार्यक्रम में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने 76 लाभार्थियों को पोषण पोटली वितरित की। इस दौरान उन्होंने टीबी मरीजों से नियमित रूप से दवाओं का सेवन करने और चिकित्सकों की सलाह का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि टीबी से संघर्ष केवल दवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि मरीज को पर्याप्त पोषण, परिवार का सहयोग और समाज का सकारात्मक वातावरण भी मिलना जरूरी है।
पौष्टिक आहार से बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता
कार्यक्रम में उपस्थित टीबी मरीजों और लोगों को पोषण के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि टीबी के उपचार के दौरान संतुलित एवं पौष्टिक आहार शरीर को आवश्यक ऊर्जा देने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने में मदद करता है। मरीजों को उपचार के बीच दवा न छोड़ने और चिकित्सक की सलाह के अनुसार नियमित दवा लेने के लिए प्रेरित किया गया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनपी सिंह ने कहा कि टीबी के उपचार में नियमित दवा सेवन के साथ पर्याप्त और संतुलित पोषण की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। परिवार, समाज और सामाजिक संस्थाएं यदि मरीजों को उपचार पूरा करने में सहयोग करें तो टीबी उन्मूलन के प्रयासों को और गति मिल सकती है। उन्होंने जिलेवासियों से टीबी मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार करने और उनकी पोषण संबंधी जरूरतों में सहयोग देने की अपील की।
महिला स्वयं सहायता समूह ने तैयार की पोषण पोटली
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि टीबी मरीजों को समय पर उपचार, पर्याप्त पोषण और भावनात्मक सहयोग उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास मरीजों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें उपचार पूरा करने के लिए भी प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम के समन्वयक समाजशास्त्र विभाग के प्रो. संजय कुमार ने बताया कि टीबी मरीजों के सहयोग के लिए विश्वविद्यालय के शिक्षक बढ़-चढ़कर सहभागिता कर रहे हैं। कार्यक्रम में वितरित पोषण पोटली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार की गई है। इससे टीबी मरीजों को पोषण उपलब्ध कराने के साथ महिला समूहों की सहभागिता और सामाजिक भागीदारी को भी बढ़ावा मिल रहा है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षकगण सहित जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. पीयूष राय मौजूद रहे। डॉ. राय ने लोगों से टीबी मरीजों को उपचार पूरा करने में सहयोग देने और बीमारी को लेकर समाज में जागरूकता फैलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयास और जनभागीदारी के माध्यम से टीबी उन्मूलन के अभियान को और मजबूत किया जा सकता है।








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