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युवा ही भारत का भाग्यविधाता, समाज को बांटने वाली ताकतों से रहें सावधान प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला में बोले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कहा- बनाना है एक भारत, श्रेष्ठ भारत लखनऊ।

युवा ही भारत का भाग्यविधाता, समाज को बांटने वाली ताकतों से रहें सावधान

प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला में बोले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कहा- बनाना है एक भारत, श्रेष्ठ भारत

लखनऊ। अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्र निर्माण में युवाओं और शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सामाजिक एकता और समरसता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत का युवा ही आने वाले समय में देश का भाग्यविधाता बनने वाला है। इसलिए युवाओं को ऐसी शिक्षा और संस्कार देने की जरूरत है, जो उन्हें राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार, संवेदनशील और समर्पित नागरिक बनाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सबसे बड़ा सवाल यह है कि हम कैसा भारत बनाना चाहते हैं। क्या ऐसा भारत, जो बिखरा हुआ और विभाजित हो, जहां लोग जातीय खेमों में बंटकर एक-दूसरे से संघर्ष करते रहें, या फिर ऐसा भारत, जो अपनी विविधता में एकता की शक्ति के साथ पूरी दुनिया के सामने मजबूती से खड़ा हो। उन्होंने कहा कि देशवासियों का लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए—एक भारत, श्रेष्ठ भारत।

बंटा हुआ भारत हमारे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा नहीं

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यदि हम ऐसे भारत की कल्पना करते हैं, जो जाति, क्षेत्र, भाषा और विभिन्न विचारधाराओं के नाम पर बंटा हुआ हो, तो यह हमारे पूर्वजों के प्रति सच्ची श्रद्धा नहीं होगी। देश के महान स्वतंत्रता सेनानियों और पूर्वजों ने जिस भारत का सपना देखा था, उसमें एकता, अखंडता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रभाव सर्वोपरि था।

उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर उस भारत के निर्माण के लिए काम करना होगा, जिसकी कल्पना हमारे पूर्वजों ने की थी। समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर चलना और देश की एकता को मजबूत करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

गुलामी के दौर में भी समाज को बांटने और जोड़ने वाली शक्तियां थीं

मुख्यमंत्री ने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि गुलामी के कालखंड में भी समाज में दो प्रकार की शक्तियां सक्रिय थीं। एक तबका ऐसा था, जो समाज को विभाजित करने और लोगों के बीच दूरी पैदा करने का काम कर रहा था, वहीं दूसरा वर्ग समाज को जोड़ने और देश की एकता को मजबूत करने के लिए संघर्षरत था।

उन्होंने कहा कि जो ताकतें उस समय समाज को बांटने का काम करती थीं, वे देश की स्वाधीनता के भी विरोध में थीं। आज भी कुछ तत्व जाति, क्षेत्र, भाषा और अलग-अलग वादों के नाम पर समाज की एकता को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसी प्रवृत्तियों से समाज को सजग रहने की आवश्यकता है।

समाज को बांटना भारत माता और पूर्वजों के प्रति अपराध

मुख्यमंत्री ने कहा कि जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश केवल सामाजिक एकता के लिए खतरा नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रमाता, भारतमाता और उन पूर्वजों के प्रति अपराध है, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता और अखंडता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया।

उन्होंने चेताया कि भारत की एकता और अखंडता को कमजोर करने वाली गतिविधियां देश की स्वतंत्रता को फिर से खतरे में डालने वाली शरारतपूर्ण चेष्टा हैं। इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को ऐसी शक्तियों के प्रति जागरूक रहना होगा और किसी भी प्रकार के विभाजनकारी प्रयास का मिलकर मुकाबला करना होगा।

शिक्षक नई पीढ़ी को देंगे राष्ट्र निर्माण की दिशा

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को विषयों का ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं है, बल्कि वह नई पीढ़ी के चरित्र और भविष्य को आकार देने वाला मार्गदर्शक है। विद्यालयों में पढ़ने वाला युवा ही आगे चलकर देश की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दिशा तय करेगा।

उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, सामाजिक समरसता, संस्कार और कर्तव्यबोध की भावना भी विकसित करें। जब देश का युवा मजबूत चरित्र और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ेगा, तभी भारत अपनी वास्तविक क्षमता का उपयोग करते हुए विश्व में नई ऊंचाइयां प्राप्त कर सकेगा।

‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की शक्ति उसकी एकता में निहित है। भारत की विविधता उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत है। अलग-अलग भाषा, संस्कृति, परंपरा और क्षेत्र होने के बावजूद भारतीय समाज एक राष्ट्र के रूप में एकजुट है। इस भावना को और मजबूत करने की जरूरत है।

उन्होंने सभी शिक्षकों और समाज के लोगों से आह्वान किया कि वे युवाओं को सही दिशा देने के साथ समाज में एकता और समरसता का वातावरण तैयार करें। एकजुट समाज ही सशक्त राष्ट्र का आधार बन सकता है। इसी भावना के साथ हमें एक ऐसे भारत के निर्माण के लिए आगे बढ़ना है, जो एक भारत हो और श्रेष्ठ भारत हो।

Varsha Kesari
Author: Varsha Kesari

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