Home » Uncategorized » मृत मां के नाम पर फर्जी वसीयत बनाकर संपत्ति हड़पने के आरोपी की जमानत खारिज

मृत मां के नाम पर फर्जी वसीयत बनाकर संपत्ति हड़पने के आरोपी की जमानत खारिज

मृत मां के नाम पर फर्जी वसीयत बनाकर संपत्ति हड़पने के आरोपी की जमानत खारिज
2011 में हो चुकी थी राजपत्ती देवी की मृत्यु, 2023 में उनके नाम से वसीयत कराने का आरोप; फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र और दस्तावेज तैयार कराने का भी आरोप

वाराणसी। मृत मां के नाम पर कथित रूप से फर्जी वसीयत तैयार कर छोटे भाई की विधवा की संपत्ति पर कब्जा करने के मामले में आरोपित विजय बहादुर सिंह को अदालत से बड़ा झटका लगा है। विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट एवं अपर सत्र न्यायाधीश सर्वजीत कुमार की अदालत ने मामले में सुनवाई के बाद आरोपित की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत के इस फैसले से मामले में आरोपित पक्ष को राहत नहीं मिल सकी।

2011 में मृत्यु, 2023 में वसीयत कराने का आरोप

अभियोजन पक्ष के अनुसार, राजपत्ती देवी की वर्ष 2011 में मृत्यु हो चुकी थी। इसके बावजूद आरोप है कि वर्ष 2023 में उनके नाम से फर्जी वसीयत तैयार कराई गई। आरोपित विजय बहादुर सिंह पर प्रेम कुमार और श्रवण कुमार के साथ मिलकर कथित रूप से साजिश रचने का आरोप है। अभियोजन का कहना है कि एक दूसरी महिला को दिवंगत राजपत्ती देवी के रूप में प्रस्तुत कर उप निबंधक सदर कार्यालय में वसीयत का पंजीकरण कराया गया।

मामले में आरोप है कि कथित फर्जीवाड़े को सही साबित करने के लिए कई दस्तावेज भी तैयार कराए गए। अभियोजन के अनुसार, पार्षद के फर्जी लेटर पैड का इस्तेमाल करते हुए उस पर हस्ताक्षर और मुहर लगाकर मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार कराया गया। इसके बाद बैनामा समेत अन्य दस्तावेजों के माध्यम से संपत्ति पर अधिकार जताते हुए छोटे भाई की विधवा नर्मदा सिंह को संपत्ति से बेदखल करने का प्रयास किया गया।

विधवा को संपत्ति से बेदखल करने का प्रयास

अभियोजन पक्ष ने अदालत में तर्क दिया कि आरोपितों की ओर से तैयार कराए गए दस्तावेजों का उद्देश्य संपत्ति पर अपना अधिकार स्थापित करना और नर्मदा सिंह को उसके अधिकार से वंचित करना था। मामले में फर्जी वसीयत, मृत्यु प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया।

अभियोजन ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जमानत का विरोध किया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संतोष तिवारी के साथ अधिवक्ता समीर कुमार मिश्रा, विनय शंकर राय और दिलीप मिश्रा ने अदालत में आरोपित की जमानत अर्जी का प्रभावी विरोध किया। अधिवक्ताओं ने मामले से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर अदालत के समक्ष अपनी दलीलें रखीं।

अदालत ने अभिलेखों का किया अवलोकन

विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट एवं अपर सत्र न्यायाधीश सर्वजीत कुमार ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले में उपलब्ध अभिलेखों और आरोपों का अवलोकन किया। न्यायालय के समक्ष रखे गए तथ्यों तथा मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आरोपित विजय बहादुर सिंह को जमानत देने से इन्कार कर दिया।

 

अदालत ने सुनवाई के बाद उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। इससे आरोपित पक्ष को फिलहाल न्यायालय से कोई राहत नहीं मिल सकी है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

युवा अधिवक्ताओं की पैरवी की सराहना

अदालत के आदेश के बाद मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने प्रसन्नता व्यक्त की। सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने मामले में प्रभावी ढंग से पैरवी करने वाले युवा अधिवक्ताओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि न्यायालय के समक्ष तथ्यों और अभिलेखों को मजबूती से रखने में अधिवक्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

मामले में फर्जी दस्तावेजों के सहारे संपत्ति पर अधिकार जताने और विधवा को बेदखल करने के लगाए गए आरोपों को लेकर न्यायालय की कार्यवाही पर भी लोगों की नजर बनी हुई है। जमानत अर्जी खारिज होने के बाद अब मामले की आगामी सुनवाई और जांच की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Varsha Kesari
Author: Varsha Kesari

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

साइबर ठगों पर यूपी पुलिस का डिजिटल प्रहार, रकम फ्रीज कराने में राष्ट्रीय औसत से आगे निकला प्रदेश सितंबर में साइबर ठगी की 34 प्रतिशत धनराशि फ्रीज कराने में मिली सफलता, राष्ट्रीय औसत 31 प्रतिशत; 84 हजार जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को किया गया सतर्क लखनऊ।