अस्पतालों की फार्मेसी में दवाओं की कीमतों का खेल!
74 रुपये में खरीदा इंजेक्शन 4,980 रुपये की एमआरपी में, 17 जिलों की 214 फार्मेसियों में जांच से सामने आया बड़ा अंतर
वाराणसी। अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों को दवाओं के नाम पर कहीं अधिक कीमत तो नहीं चुकानी पड़ रही, इसे लेकर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रदेश के 17 जिलों में अस्पतालों की फार्मेसियों की जांच कर दवाओं की खरीद, एमआरपी और बिक्री मूल्य का मिलान किया गया। जांच के दौरान दवाओं की कीमतों में भारी अंतर सामने आने से विभागीय अधिकारियों के भी कान खड़े हो गए हैं।
जांच में सबसे चौंकाने वाला मामला एक इंजेक्शन का सामने आया। संबंधित इंजेक्शन को महज 74.09 रुपये में खरीदा गया, जबकि उसके पैक पर 4,980.94 रुपये एमआरपी दर्ज थी। खरीद मूल्य और पैक पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य के बीच करीब 67 गुना का अंतर सामने आया। इसी तरह कई अन्य दवाओं की खरीद और बिक्री कीमतों में भी उल्लेखनीय अंतर पाया गया।
214 फार्मेसियों का खंगाला गया रिकॉर्ड
एफएसडीए की टीमों ने प्रदेश के 17 जिलों में स्थित अस्पतालों की 214 फार्मेसियों का निरीक्षण किया। इस दौरान दवाओं के स्टॉक, खरीद बिल, सप्लाई से संबंधित अभिलेख, पैक पर दर्ज एमआरपी और मरीजों को की जा रही बिक्री की कीमतों का मिलान किया गया।
जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि अस्पतालों में मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही दवाओं की वास्तविक खरीद कीमत क्या है और उन्हें किस कीमत पर बेचा जा रहा है। जांच के दौरान कई दवाओं में खरीद मूल्य और पैक पर अंकित एमआरपी के बीच बड़ा अंतर सामने आया।
मरीजों की जेब पर पड़ सकता है सीधा असर
अस्पताल में भर्ती मरीज और उनके तीमारदार अक्सर चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवाएं अस्पताल परिसर की फार्मेसी से ही खरीदते हैं। ऐसी स्थिति में यदि किसी दवा की खरीद कीमत और मरीज से ली जाने वाली कीमत में बड़ा अंतर हो तो इसका सीधा असर मरीज की जेब पर पड़ सकता है।
खासकर गंभीर बीमारी के उपचार के दौरान एक साथ कई दवाएं और इंजेक्शन खरीदने पड़ते हैं। ऐसे में प्रत्येक दवा की कीमत में मामूली अंतर भी मरीज के कुल इलाज खर्च को काफी बढ़ा सकता है। इसी को देखते हुए औषधि विभाग की ओर से अस्पतालों की फार्मेसियों में दवाओं की खरीद-बिक्री व्यवस्था की जांच को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
खरीद बिल से लेकर बिक्री तक की पड़ताल
जांच टीमों ने केवल दवाओं की एमआरपी ही नहीं देखी, बल्कि फार्मेसियों में उपलब्ध स्टॉक और उनके खरीद संबंधी दस्तावेजों की भी पड़ताल की। अधिकारियों ने यह भी देखा कि संबंधित दवाएं किस कंपनी या वितरक से कितनी कीमत में खरीदी गईं और उनका मरीजों को किस कीमत पर विक्रय किया जा रहा है।
74.09 रुपये की खरीद और 4,980.94 रुपये की एमआरपी वाला इंजेक्शन जांच के दौरान कीमतों में अंतर का सबसे प्रमुख उदाहरण बनकर सामने आया है। इससे अस्पतालों की फार्मेसी में दवाओं की मूल्य व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं।
नियमों के पालन पर विभाग की नजर
एफएसडीए की इस जांच के बाद अब संबंधित फार्मेसियों के रिकॉर्ड की विस्तृत समीक्षा की जा रही है। विभागीय स्तर पर यह देखा जाएगा कि कहीं दवाओं की खरीद-बिक्री में निर्धारित नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित मामलों में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
17 जिलों में 214 फार्मेसियों की जांच और दवाओं की कीमतों में सामने आए इस बड़े अंतर ने अस्पतालों की फार्मेसी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब विभाग की आगे की कार्रवाई पर मरीजों और उनके तीमारदारों की नजर रहेगी।






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