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आत्मसमर्पण न करने पर जमानत अर्जी खारिज, गैर-जमानती वारंट जारी वाराणसी।

आत्मसमर्पण न करने पर जमानत अर्जी खारिज, गैर-जमानती वारंट जारी

वाराणसी। चौक थाना क्षेत्र से जुड़े एक मामले में निर्धारित तिथि पर न्यायालय में आत्मसमर्पण नहीं करना अभियुक्त यशनन्द कुमार नागर को भारी पड़ गया। न्यायालय ने अभियुक्त की ओर से दाखिल हाजिरी माफी और नियमित जमानत प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। न्यायालय ने अंतरिम जमानत की शर्तों का पालन नहीं करने को गंभीरता से लेते हुए अभियुक्त के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया।

मामला मु.अ.सं. 56/2026 से संबंधित है। इसमें धारा 85, 115(2), 352 बीएनएस तथा 3/4 डीपी एक्ट के तहत चौक थाने में मुकदमा दर्ज है। मामले की सुनवाई के दौरान अभियुक्त की ओर से अधिवक्ता ने हाजिरी माफी का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। इसमें अभियुक्त की तबीयत अत्यधिक खराब होने का हवाला देते हुए मेडिकल प्रपत्र भी न्यायालय में दाखिल किया गया। अधिवक्ता के माध्यम से अभियुक्त को अंतरिम जमानत का लाभ दिए जाने की मांग की गई।

वादी पक्ष ने किया जमानत का विरोध

वादी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव वर्मा ने प्रार्थना पत्र का विरोध किया। उन्होंने न्यायालय को बताया कि अभियुक्त बीमारी का आधार लेकर लगातार गुजरात में रह रहा है और मध्यस्थता केंद्र तथा न्यायालय में निर्धारित तिथियों पर उपस्थित नहीं हो रहा है। अभियोजन पक्ष ने भी जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अभियुक्त को पहले ही अंतरिम जमानत दी जा चुकी थी। इसके बावजूद वह निर्धारित तिथि पर न्यायालय में उपस्थित होकर आत्मसमर्पण नहीं कर सका।

पहले भी मिली थी अंतरिम जमानत

पत्रावली के अवलोकन में न्यायालय के समक्ष आया कि अभियुक्त को 10 सितंबर 2026 को आत्मसमर्पण के बाद 21 सितंबर तक अंतरिम जमानत दी गई थी। इसके बाद 21 सितंबर को आत्मसमर्पण प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए जाने पर न्यायालय ने उसे पांच अक्टूबर 2026 को न्यायालय में उपस्थित होकर आत्मसमर्पण करने की शर्त पर अंतरिम जमानत प्रदान की थी।

शर्त का पालन नहीं करना पड़ा भारी

निर्धारित तिथि पांच अक्टूबर को अभियुक्त न्यायालय में उपस्थित होकर आत्मसमर्पण करने के बजाय अधिवक्ता के माध्यम से हाजिरी माफी का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। न्यायालय ने मामले की परिस्थितियों और पूर्व में दी गई अंतरिम जमानत की शर्तों को देखते हुए इसे जमानत की शर्त का उल्लंघन माना। इसके बाद न्यायालय ने अभियुक्त की हाजिरी माफी और नियमित जमानत दोनों अर्जियां निरस्त कर दीं। साथ ही अभियुक्त के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया।

Varsha Kesari
Author: Varsha Kesari

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