लखनऊ में गरजेगी कलम की ताकत – 29 नवंबर 2026 को ऐतिहासिक मीडिया महापंचायत का ऐलान!
वर्चुअल मीटिंग में बना महा-प्लान – पत्रकार सुरक्षा कानून से लेकर मीडिया को संवैधानिक दर्जा तक, 5 बड़े मुद्दों पर बनेगी रणनीति!
बी एम एफ नेशनल कोर कमेटी के संस्थापक एवं मीडिया सरकार ए.के. बिंदुसार का ऐलान – अब नहीं रुकेगा कलमकार, मानवाधिकार और नागरिक पत्रकारिता के सम्मान की होगी सबसे बड़ी लड़ाई

नई दिल्ली/लखनऊ। देश की राजधानी दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक, अब एक ही आवाज गूंजेगी – पत्रकार बचाओ, लोकतंत्र बचाओ। इसी आवाज को और बुलंद करने के लिए भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी ने कमर कस ली है।
आगामी 29 नवंबर 2026, दिन रविवार को लखनऊ की धरती पर भारतीय मीडिया फाउंडेशन के तत्वावधान में एक ऐतिहासिक और विशाल मीडिया महापंचायत का आयोजन किया जा रहा है। इस महापंचायत की सफलता के लिए पूरे देश में संगठन युद्धस्तर पर जुट गया है।
इसी क्रम में कल देर रात संगठन की एक अति महत्वपूर्ण वर्चुअल / ऑनलाइन मीटिंग का आयोजन किया गया, जिसमें देश के कोने-कोने से सैकड़ों पदाधिकारी जुड़े। मीटिंग की अध्यक्षता संगठन के संस्थापक एवं मीडिया सरकार के नाम से प्रसिद्ध माननीय ए.के. बिंदुसार जी ने की।
मीटिंग में यह तय किया गया कि इस महापंचायत को केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय मीडिया के इतिहास का सबसे बड़ा आंदोलन बनाया जाएगा।
संगठन के संस्थापक ए.के. बिंदुसार ने दी जानकारी – हर पदाधिकारी को दी गई जिम्मेदारी
वर्चुअल मीटिंग को संबोधित करते हुए संस्थापक ए.के. बिंदुसार जी ने बताया कि – “हमने इस महापंचायत की सफलता के लिए अपने सभी राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य, सभी प्रादेशिक अध्यक्ष, जिला अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष और प्रकोष्ठों के सभी राष्ट्रीय अध्यक्षों को मैदान में उतार दिया है। हर किसी को टारगेट दिया गया है। उत्तर प्रदेश के हर जिले से कम से कम 100 मीडिया कर्मी, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट लखनऊ पहुंचे, इसकी जिम्मेदारी तय कर दी गई है।”
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह महापंचायत सिर्फ भाषणबाजी नहीं होगी, बल्कि यहां से सरकार के लिए एक डेडलाइन और मांग-पत्र जारी होगा।
आखिर क्यों हो रही है यह मीडिया महापंचायत? 5 ऐतिहासिक मांगों पर होगा हल्ला-बोल
भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल कोर कमेटी ने इस महापंचायत के लिए 5 सबसे बड़े और ज्वलंत मुद्दे तय किए हैं, जो सीधे-सीधे देश के चौथे स्तंभ और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अस्तित्व से जुड़े हैं –
1. पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करो – अब बहुत हो चुका हमला:
पिछले 10 सालों में देश में 200 से ज्यादा पत्रकारों की हत्या हुई है और हजारों पर फर्जी मुकदमे लादे गए हैं। छोटा पत्रकार, मझोला पत्रकार, ग्रामीण पत्रकार आज सबसे ज्यादा असुरक्षित है। पुलिस थाने से लेकर माफिया तक उसे धमकाते हैं। हम केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करते हैं कि महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर पूरे देश में कठोर पत्रकार सुरक्षा कानून बनाया जाए, जिसमें पत्रकार पर हमला करने वाले पर गैर-जमानती धारा लगे और 30 दिन में सजा का प्रावधान हो।
2. सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार रक्षक सुरक्षा कानून:
पत्रकार के साथ-साथ जो सामाजिक कार्यकर्ता, मानवाधिकार कार्यकर्ता जमीन पर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ता है, उसकी भी कोई सुरक्षा नहीं है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को भी धमकी दी जाती है, उनके परिवार को परेशान किया जाता है। भारतीय मीडिया फाउंडेशन मांग करता है कि सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार रक्षक सुरक्षा कानून बनाया जाए और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की तर्ज पर जिला स्तर पर सुरक्षा प्रकोष्ठ बनाया जाए।








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