युगपुरुष श्रद्धेय अशोक सिंहल जी का जन्मशताब्दी वर्ष -श्री नरेंद्र मोदी
युगपुरुष श्रद्धेय अशोक सिंहल जी का जन्मशताब्दी वर्ष -श्री नरेंद्र मोदी एक बहुत सुंदर सुभाषित है, “वृक्ष कबहुँ नहिं फल भखै, नदी न संचै नीर। परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर।” इसका मतलब है कि पेड़ कभी अपने फल स्वयं नहीं खाता, नदी अपना जल अपने पास नहीं रखती। इसी तरह, संत स्वभाव के लोग भी…
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