April 4, 2026 5:59 pm

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पीएम मोदी की काशी में इतिहास की पुनरावृत्ति

पीएम मोदी की काशी में इतिहास की पुनरावृत्ति

श्री विश्वनाथ की काशी में महाकाल की भस्म आरती से काशीवासी अभिभूत

तीन दिवसीय “सम्राट विक्रमादित्य महोत्सव” का हुआ भव्य आगाज

भारत की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध एवं गौरवशाली है-योगी आदित्यनाथ

सम्राट विक्रमादित्य केवल एक राजा नहीं, बल्कि न्याय, धर्म और लोककल्याण के प्रतीक थे-मुख्यमंत्री, उ.प्र.

एक समय रहा जब समाज के खलनायकों को हीरो के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास होता रहा-सीएम योगी

सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के ऐसे महान शासक थे, जिनकी कीर्ति आज भी जनमानस में जीवित है-डॉ मोहन यादव

श्रीराम व लक्ष्मण, श्री कृष्ण व बलदाऊ तथा भर्तृहरि एवं विक्रमादित्य भाईयों की जोड़ी देश ही नहीं दुनिया में प्रसिद्ध है-मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश सरकार के साथ पर्यटन एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मिलकर कार्य कर रही हैं

पीएम मोदी के दिशा निर्देशन में बेतवा नदी को भी जोड़ने का कार्य मध्यप्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश के साथ मिलकर कार्य किया जा रहा है

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने सीएम योगी आदित्यनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भी भेट की

हाथी-घोड़ों की गूंज के बीच मंच पर उतरा विक्रमादित्य का स्वर्णिम युग

जब वाराणसी लौटा प्राचीन भारत: विक्रमादित्य महानाट्य ने मोहा जनसमूह

वाराणसी में जीवंत हुआ विक्रमादित्य युग, कलाकारों ने रचा इतिहास

तीन मंच, 225 कलाकार और दौड़ते घोड़े—वाराणसी में सजी विक्रमादित्य की भव्य गाथा

योगी-मोहन यादव ने किया शुभारंभ, विक्रमादित्य महोत्सव में दिखा इतिहास का जीवंत रूप

सूर्य सरोवर मैदान बना प्राचीन भारत, भव्य मंचन ने दर्शकों को किया रोमांचित

घोड़ों की टाप और शौर्य की गाथा-वाराणसी में सजी विक्रमादित्य की अद्भुत लीला

कलाकारों का विराट मंचन, विक्रमादित्य महोत्सव बना आकर्षण का केंद्र

जब मंच पर उतरा सम्राट विक्रमादित्य-वाराणसी में दिखा अद्भुत सांस्कृतिक वैभव

“सम्राट विक्रमादित्य’ महोत्सव में दिखा भव्यता और परंपरा का संगम

कार्यक्रम एक “लाइव इतिहास की किताब” जैसा था, लोग पढ़े हुए इतिहास को अपनी आंखों के सामने घटित होते हुए देख रहे थे

3 भव्य मंच, 18 घोड़े, 2 रथ, 4 ऊँट, 1 पालकी और 1 हाथी के साथ जीवंत दृश्य से विक्रमादित्य का वैभव हुआ साकार

बाबा विश्वनाथ को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का अर्पण

 

वाराणसी। विक्रमोत्सव-2026 के तहत उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और न्यायप्रियता को जन-जन तक पहुँचाने के लिये शुक्रवार को तीन दिवसीय महानाट्य “सम्राट विक्रमादित्य” का जीवंत मंचन बीएलडब्ल्यू के विशाल ग्राउंड पर हुआ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य शुभारंभ हुआ। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के माध्यम से आयोजित इस महानाट्य की परिकल्पना मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की है। पद्मश्री डॉ. भगवतीलाल राजपुरोहित द्वारा रचित और राजेश कुशवाहा द्वारा निर्मित और संजीव मालवी के निर्देशन में प्रस्तुत महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य भारत की सांस्कृतिक चेतना को जगाने वाला अनुभव है। इसमें 225 से ज्यादा कलाकार हाथी, घोड़े, रथ, पालकियां, भव्य युद्ध, लाइट शो, आतिशबाजी नृत्य और बाबा महाकाल की भस्म आरती की दिव्य झलकियां शामिल रही। महान सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से राजतिलक तक की गाथा, विक्रम बेताल की कथा और सनातन धर्म के उत्थान की महा काव्य कथा इस महानाट्य में जीवंत हुई।

सांस्कृतिक और ऐतिहासिक वैभव की अद्भुत झलक प्रस्तुत करता तीन दिवसीय ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महोत्सव शुक्रवार को बीएलडब्ल्यू (बनारस लोकोमोटिव वर्क्स) स्थित सूर्य सरोवर के सामने विशाल मैदान में भव्य रूप से प्रारंभ हुआ। इस ऐतिहासिक आयोजन का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने संयुक्त रूप से किया। उद्घाटन समारोह में उपस्थित जनसमूह,   मंच सज्जा, और जीवंत ऐतिहासिक प्रस्तुतियों ने वाराणसी को मानो प्राचीन काल के स्वर्णिम युग में पहुंचा दिया।

उद्घाटन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है और ऐसे आयोजन उस विरासत को जीवित रखने का माध्यम हैं। उन्होंने कहा “सम्राट विक्रमादित्य केवल एक राजा नहीं थे, बल्कि न्याय, धर्म और लोककल्याण के प्रतीक थे। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।” उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सांस्कृतिक आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, ताकि नई पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास से जुड़ सके।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्र नायक महान् विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित नाट्य कार्यक्रम के अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि लोगो का स्वागत किया। पीएम के एक भारत श्रेष्ठ भारत को आगे बढ़ाते हुए सांस्कृतिक परम्परा को आगे बढ़ाने पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इस नाट्य कार्यक्रम की शैव परम्परा की काशी में होना प्रासंगिक है। इस नाट्य की प्रस्तुति मात्र एक नाट्य कार्यक्रम नहीं बल्कि अपने मूल्यों से जोड़ने का माध्यम भी बनेगा। एक समय रहा जब समाज के खलनायकों को हीरो के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास होता रहा। जिससे निश्चित रूप से इसका दुष्प्रभाव पीढ़ियों पर पड़ी। लेकिन आज समय बदल गया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। श्री काशी विश्वनाथ धाम बनने के बाद से ही यहां श्रद्धालुओं का आगम अत्यधिक बढ़ा है। उन्होंने अयोध्या में श्रीराम की मंदिर का खोज एवं पूर्व में सम्राट विक्रमादित्य ने ही बनवाया था।

इससे पूर्व मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के ऐसे महान शासक थे, जिनकी कीर्ति आज भी जनमानस में जीवित है। उन्होंने कहा कि “विक्रमादित्य का नाम न्याय और पराक्रम का पर्याय है। उनके जीवन पर आधारित यह मंचन न केवल मनोरंजक है, बल्कि शिक्षाप्रद भी है।” उन्होंने इस आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और आयोजकों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि मां गंगा के तीरे महान् सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित नाट्य कार्यक्रम की प्रस्तुति सारगर्भित है। तीन भाईयों की जोड़ी की चर्चा करते हुए कहा कि श्रीराम व लक्ष्मण, श्री कृष्ण व बलदाऊ तथा भर्तृहरि एवं विक्रमादित्य देश ही नहीं दुनिया में प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश सरकार के साथ पर्यटन एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए मिलकर कार्य कर रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा निर्देशन में बेतवा नदी को भी जोड़ने का कार्य मध्यप्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश के साथ मिलकर कार्य किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने धर्म पट्टिका व पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया। उन्होंने 700 किलोग्राम की विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भी भेट की। जो शनिवार को श्री बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित होगा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का प्रदेश के मंत्री राकेश सचान व मंत्री अनिल राजभर ने धर्म पट्टिका व पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया।

इस अवसर पर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री राकेश सचान, श्रम एवं सेवायोजन समन्वय मंत्री अनिल राजभर, स्टाम्प एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, महापौर अशोक कुमार तिवारी, एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा, एमएलसी धर्मेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री एवं विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी, विधायक डॉ अवधेश सिंह, विधायक सुनील पटेल, विधायक टी राम, विधायक सुशील सिंह, महंत एवं सांसद उमेश नाथ आदि लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत महाकाल की भस्म आरती एवं पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। मंच पर जैसे ही दोनों मुख्यमंत्रियों ने दीप जलाकर आयोजन का शुभारंभ किया, पूरा परिसर तालियों और जयघोष से गूंज उठा। “भारत माता की जय” और “सम्राट विक्रमादित्य अमर रहें” के नारों ने वातावरण को उत्साह और गौरव से भर दिया। यह आयोजन न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम है, बल्कि भारतीय इतिहास के गौरवशाली अध्याय को जीवंत करने का एक प्रयास भी है। उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से मध्य प्रदेश सरकार की संस्कृति पर्यटन एवं जनसंपर्क विभाग ने इसे “भारत के स्वाभिमान, नवजागरण और विकास की यात्रा का उत्सव” के रूप में प्रस्तुत किया है, जो आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति, न्याय व्यवस्था और आदर्श शासन प्रणाली से परिचित कराए।

कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता इसका अद्वितीय मंचन रहा। आयोजन स्थल पर एक साथ तीन विशाल मंच तैयार किए गए, जिन पर समांतर रूप से विभिन्न दृश्य प्रस्तुत किए गए। यह दृश्यांकन इतना सजीव था कि दर्शकों को ऐसा प्रतीत हुआ मानो वे किसी महानाट्य का नहीं, बल्कि वास्तविक ऐतिहासिक घटनाओं का प्रत्यक्ष अनुभव कर रहे हों। इन तीन मंचों के माध्यम से सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के बाल्यकाल, वीरता और युद्ध कौशल, न्यायप्रियता, प्रजा के प्रति करुणा और समर्पण तथा विद्वानों और कला के प्रति सम्मान आदि विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया।

हर मंच पर दृश्य परिवर्तन, प्रकाश व्यवस्था और ध्वनि प्रभाव इतने सटीक थे कि दर्शकों की नजरें एक पल के लिए भी मंच से नहीं हटीं। इस महानाट्य में लगभग 225 कलाकारों ने हिस्सा लिया। कलाकारों ने अपने अभिनय, संवाद अदायगी और शारीरिक अभिव्यक्ति से सम्राट विक्रमादित्य के चरित्र को जीवंत कर दिया।
विशेष रूप से सम्राट विक्रमादित्य की भूमिका निभाने वाले कलाकार ने अपनी दमदार उपस्थिति और प्रभावशाली संवादों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके चेहरे के भाव, शौर्यपूर्ण चाल और न्याय करते समय की गंभीरता ने दर्शकों के मन में गहरा प्रभाव छोड़ा। बालिकाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। रानियों, विदुषियों और अन्य पात्रों के माध्यम से उस युग की सामाजिक और सांस्कृतिक झलक देखने को मिली।

कार्यक्रम की सबसे आकर्षक विशेषताओं में से एक था मंचन में वास्तविक हाथी और घोड़ों का उपयोग। जैसे ही मंच पर घोड़े दौड़ते हुए आए और उनके टापों की आवाज गूंजी, दर्शकों के भीतर रोमांच की लहर दौड़ गई। घोड़ों की तेज गति, युद्ध के दृश्य और सैनिकों की टुकड़ियों के साथ उनका तालमेल इतना वास्तविक था कि पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। हाथी की गरिमामयी चाल और युद्ध के दौरान उनका उपयोग दर्शकों को प्राचीन भारतीय युद्ध शैली की याद दिलाता रहा। यह दृश्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं था, बल्कि यह भारतीय सैन्य परंपरा और शक्ति का प्रतीक भी था।

कार्यक्रम स्थल पर हजारों की संख्या में लोग उपस्थित रहे। परिवारों, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने इस आयोजन का भरपूर आनंद लिया। दर्शकों की प्रतिक्रियाएं इस बात का प्रमाण थीं कि यह आयोजन उनके लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया।
कई दर्शकों ने कहा कि उन्होंने ऐसा भव्य और जीवंत मंचन पहले कभी नहीं देखा। विशेष रूप से बच्चों के लिए यह कार्यक्रम एक “लाइव इतिहास की किताब” जैसा था, जहां वे पढ़े हुए इतिहास को अपनी आंखों के सामने घटित होते हुए देख रहे थे।

इस ऐतिहासिक नाट्य प्रस्तुति में हाई-टेक लाइटिंग, डिजिटल साउंड इफेक्ट्स, एलईडी बैकड्रॉप व स्मोक और स्पेशल इफेक्ट्स आदि आधुनिक तकनीक का इस महानाट्य में भरपूर उपयोग किया गया। इन सभी ने मिलकर कार्यक्रम को और भी प्रभावशाली बना दिया। तकनीक और परंपरा के इस अनूठे मेल ने दर्शकों को एक अलग ही अनुभव दिया।

निश्चित रूप से यह आयोजन केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश भी देता है। आज के आधुनिक युग में, जब युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से दूर होती जा रही है, ऐसे कार्यक्रम उन्हें अपने इतिहास और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं। सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि—न्याय सर्वोपरि है, शासक का कर्तव्य प्रजा की सेवा करना है तथा ज्ञान और विद्वता का सम्मान आवश्यक है।

कार्यक्रम स्थल पर अलग से बने विशाल पंडाल में लगाये गये “आर्ष भारत, सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या, शिव पुराण, 84 महादेव, श्री हनुमान एवं मध्य प्रदेश की पवित्र स्थलों” की प्रदर्शनी भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।

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Author: Liveupweb

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