आह! बेटे से ही मां भयभीत…..?
पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के रोहनिया थाना क्षेत्र के ग्राम शहवाबाद में संपत्ति बंटवारे में अपना हिस्सा लेने के बावजूद एक ऐसा कलयुगी पुत्र है जो अपनी सगी मां को ही प्रताड़ित कर रहा है।
बेटे की प्रताड़ना से भयभीत मां ने यूपी के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी जान-माल की सुरक्षा की मांग करते हुए छोटे बेटे के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की मांग की है
वाराणसी। पीएम नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की यह घटना केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। एक मां, जिसने अपने बेटे को जन्म दिया, उसका पालन-पोषण किया, उसे अपने पैरों पर खड़ा किया और जीवनभर उसके सुख-दुख का ध्यान रखा, वही मां आज अपने ही बेटे के हाथों अपमान और मारपीट का शिकार हो रही है।
सबसे दुखद बात यह है कि मां जडावती देवी ने अपने छोटे बेटे के हिस्से की पूरी संपत्ति पहले ही उसके नाम कर दी थी। इसके बावजूद छोटे बेटे का व्यवहार नहीं बदला और वह लगातार मां के साथ दुर्व्यवहार करता रहा। गला दबाकर मारने की कोशिश की। रोहनिया थाने में जब मामला गया तो मां को रिश्तेदारों ने रिश्ते की दुहाई देकर माफी दिलवा दी। इसके बावजूद छोटा बेटा अरविंद भारद्वाज अपने मां के हिस्से की संपत्ति पर कब्जा करने के लिए आये दिन तरह तरह का हथकंडा अपना रहा है। मां जडावती का कहना है कि कोरोना काल में पति की मृत्यु के बाद जो भी संपत्ति थी उसको दोनों बेटों को बराबर बराबर हिस्सों में बांट कर दे दिया। एक हिस्सा मैंने अपने पास रखी। अपने हिस्से की सम्पत्ति मैंने बड़े बेटे को गिफ्ट कर दिया। गिफ्ट इसलिए किया कि बड़ा बेटा आजाद भारद्वाज मेरा वृद्धावस्था में देखभाल सेवा करता है। मुझे हार्ट की बीमारी है सर्जरी भी हुई है ऐसे में बड़ा बेटा और उसकी पत्नी बेटी मेरी सेवा में लगे रहते हैं। मैं बड़े बेटे के ही साथ रहती हूं वह लायक बेटा है। मां जडावती ने बताया कि मैंने अपने हिस्से की संपत्ति को बड़े बेटे आजाद भारद्वाज को गिफ्ट किया है, इसके बावजूद मेरी सहमति से मेरे हिस्से की संपत्ति को इस वर्ष कुछ माह पूर्व मनोहर लाल शेरवानी को बेचा गया है।

छोटा बेटा अरविंद भारद्वाज आये दिन शराब पीकर अपने साथियों संग घर के बाहर हंगामा करता रहता है। जान से मारने की धमकी भी देता रहता है। मां जडावती ने यह भी आशंका जताई है कि छोटा बेटा हिस्से की संपत्ति लेने के बावजूद मेरे पिछे पडा है और मेरी हत्या भी कर सकता है।
लगातार हो रहे अत्याचार और मानसिक पीड़ा से आहत मां ने एक अत्यंत पीड़ादायक निर्णय लिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जब उनका निधन हो जाए, तब उस बेटे को उनके अंतिम दर्शन करने या उनके शव के पास आने की अनुमति न दी जाए। मां का कहना है कि जिसने जीते-जी सम्मान नहीं दिया, जिसने प्रेम और सेवा के बदले अपमान और हिंसा दी, उसे मृत्यु के बाद दिखावे का कोई अधिकार नहीं होना चाहिए।
यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि संपत्ति का लालच किस तरह रिश्तों को खत्म कर देता है। माता-पिता का सम्मान करना केवल नैतिक कर्तव्य ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार भी है। जिस मां ने अपने बच्चे के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया, उसी मां का इस तरह अपमान होना पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है। ऐसे मामलों में परिवार और समाज दोनों को संवेदनशील होकर बुजुर्गों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए आगे आना चाहिए।








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