आईआईवीआर में अनुसूचित जाति के कृषकों हेतु उन्नत सब्जी उत्पादन एवं उद्यमिता विकास पर द्वि-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न
वाराणसी, 3 जुलाई 2026। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी में अनुसूचित जाति के जनप्रतिनिधियों एवं किसानों के लिए आयोजित उन्नत सब्जी उत्पादन एवं उद्यमिता विकास पर द्वि-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आज सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को उन्नत, टिकाऊ एवं लाभकारी सब्जी उत्पादन तकनीकों से परिचित कर उनकी आय, पोषण सुरक्षा तथा आजीविका के अवसरों का विस्तार करना था। कार्यक्रम में कुल 8 ग्रामों के ग्राम प्रधानों सहित 50 पुरुष एवं 15 महिला प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को संस्थान के अनुसंधान प्रक्षेत्र का भ्रमण कराया गया तथा सब्जी उत्पादन की नवीन एवं वैज्ञानिक तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी दी गई। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने किसानों का मार्गदर्शन करते हुए महिलाओं की कृषि एवं पोषण सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया तथा उन्हें सब्जी उत्पादन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने परिवार के पोषण एवं अतिरिक्त आय के लिए प्रत्येक किसान परिवार को सब्जी उत्पादन अपनाने का आह्वान किया। उद्घाटन सत्र में डॉ. डी. पी. सिंह, अध्यक्ष, सब्जी उन्नयन विभाग तथा डॉ. सुदर्शन मौर्य, प्रधान वैज्ञानिक, सब्जी सुरक्षा विभाग ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान जिला उद्यान विभाग, वाराणसी के श्री सुधांशु सिंह ने उद्यानिकी विभाग की विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी प्रदान की। संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा संरक्षित खेती, जैविक सब्जी उत्पादन, समेकित रोग एवं कीट प्रबंधन (आईडीएम एवं आईपीएम), ग्राफ्टिंग तकनीक तथा सब्जी आधारित उद्यमिता विकास पर विस्तृत व्याख्यान दिए गए। किसानों को मूल्य संवर्धन, गुणवत्तायुक्त पौध उत्पादन, विपणन तथा स्वरोजगार के अवसरों की भी जानकारी दी गई।
समापन समारोह में किसानों को किचन गार्डन हेतु सब्जी बीज किट वितरित किए गए, जिससे वे अपने घरों में पोषण वाटिका स्थापित कर वर्षभर ताजी एवं पौष्टिक सब्जियों का उत्पादन कर सकें। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक बताते हुए संस्थान के प्रति आभार व्यक्त किया तथा प्रशिक्षण में प्राप्त तकनीकों को अपने खेतों में अपनाने का संकल्प लिया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. अनंत बहादुर एवं डॉ. नीरज सिंह रहे, जबकि डॉ. मोहम्मद शाहिद एवं डॉ. आशुतोष राय ने पाठ्यक्रम समन्वयक के रूप में कार्यक्रम का सफल संचालन किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में संस्थान के वैज्ञानिकों, तकनीकी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।








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