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शक्ति के बावजूद धड़ल्ले से कारोबार,वाराणसी में जुआ,गांजा और देह व्यापार पर उठे सवाल

शक्ति के बावजूद धड़ल्ले से कारोबार,वाराणसी में जुआ,गांजा और देह व्यापार पर उठे सवाल

कार्रवाई के दावों के बीच कई इलाकों में अवैध कारोबार के आरोप
वाराणसी में पुलिस की सख्ती और लगातार चलाए जा रहे अभियानों के बावजूद जुआ, गांजा तस्करी और देह व्यापार जैसी अवैध गतिविधियों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक पुलिस द्वारा कार्रवाई किए जाने के दावे सामने आते हैं, लेकिन इसके बावजूद कुछ क्षेत्रों में इन गतिविधियों के दोबारा सक्रिय होने की शिकायतें चर्चा में रहती हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर अवैध कारोबार करने वाले लोग पुलिस की निगरानी से बचने के लिए अपने ठिकाने और तरीके बदलते रहते हैं।

 

जुए के अड्डों पर छापेमारी और गांजा तस्करों की गिरफ्तारी के बावजूद नशे के कारोबार का नेटवर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है। वहीं कुछ होटल, लॉज और किराये के कमरों को लेकर भी देह व्यापार जैसी गतिविधियों की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में पुलिस की सक्रियता और कार्रवाई की पारदर्शिता महत्वपूर्ण हो जाती है।

थाना स्तर की रिपोर्ट पर भी उठ रहे सवाल
सबसे गंभीर सवाल थाना स्तर से वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जाने वाली रिपोर्ट को लेकर उठते हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में संबंधित थाना प्रभारियों द्वारा क्षेत्र में अवैध गतिविधियां नहीं होने अथवा कार्रवाई किए जाने की रिपोर्ट भेजकर वास्तविक स्थिति को कमतर दिखाया जाता है। हालांकि, ऐसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है और किसी भी पुलिस अधिकारी को दोषी मानने से पहले विभागीय जांच या ठोस साक्ष्यों का इंतजार किया जाना चाहिए।

यदि किसी थाना क्षेत्र में लगातार अवैध गतिविधियों की शिकायतें मिल रही हों और स्थानीय स्तर से बार-बार सब कुछ सामान्य बताया जा रहा हो, तो वरिष्ठ अधिकारियों के लिए स्वतंत्र स्तर से सत्यापन कराना जरूरी हो जाता है।इससे न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी,बल्कि लापरवाही या गलत रिपोर्ट की स्थिति में जिम्मेदारी भी तय की जा सकेगी।

वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी और जवाबदेही जरूरी
वाराणसी जैसे बड़े शहर में अपराध और अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल छापेमारी और गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। जुआ, गांजा और देह व्यापार से जुड़े संभावित नेटवर्क की आर्थिक गतिविधियों, संरक्षण देने वालों और बार-बार सामने आने वाले ठिकानों की भी जांच आवश्यक है।

वरिष्ठ अधिकारियों को थाना स्तर की रिपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय समय-समय पर गोपनीय सत्यापन, अचानक निरीक्षण और स्वतंत्र जांच की व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए। यदि किसी क्षेत्र में शिकायतें लगातार सामने आती हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कराकर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि आरोप निराधार हैं या वास्तव में पुलिस की निगरानी में कोई कमी है।

पुलिस की सख्ती का वास्तविक असर तभी दिखाई देगा, जब अवैध कारोबार पर कार्रवाई के साथ-साथ उसकी पुनरावृत्ति रोकने और लापरवाही की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था भी प्रभावी हो। वाराणसी की जनता अब केवल कार्रवाई की खबर नहीं, बल्कि अवैध गतिविधियों पर स्थायी नियंत्रण और पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही की उम्मीद करती है।

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Author: Liveupweb

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