प्रेस-विज्ञप्ति
द्विदिवसीय संस्कृत दिवस समारोह का आयोजन
वाराणसी, 02.09.2026। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कला संकाय स्थित संस्कृत विभाग द्वारा १ एवं २ सितम्बर २०२६ को द्विदिवसीय संस्कृत दिवस समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के अन्तर्गत संस्कृतभाषण-प्रतियोगिता, संस्कृतसामान्यज्ञान-प्रतियोगिता, सुस्वरस्तोत्रपाठ-प्रतियोगिता तथा श्लोकान्ताक्षरी-प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों एवं महाविद्यालयों से १०० से अधिक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
सम्पूर्ण कार्यक्रम संस्कृत विभाग के सभागार में संस्कृत भाषा में सम्पन्न हुआ। विभिन्न प्रतियोगिताओं के निर्णायक के रूप में प्रो. शत्रुघ्न त्रिपाठी, प्रो. पतञ्जलि मिश्र, प्रो. विनय पाण्डेय, प्रो. भगवत्शरण शुक्ल, प्रो. चन्द्रकान्ता राय, प्रो. शिवराम शर्मा, प्रो. जया मिश्रा, डॉ. मंजु कुमारी, प्रो. पुष्पा त्रिपाठी, डॉ. अभिजित् दीक्षित, डॉ. बृहस्पति भट्टाचार्य एवं डॉ. दीपक शर्मा ने अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। सत्र संयोजन संस्कृतभाषणप्रतियोगिता- डॉ शिल्पा सिंह तथा डॉ राजेश सरकार, संस्कृतसामान्यज्ञानप्रतियोगिता- डॉ सूर्यप्रकाश सिंह तथा डॉ पवन कुमार पाण्डेय, सुस्वरस्तोत्रपाठप्रतियोगिता- डॉ सिद्धिदात्री भारद्वाज तथा डॉ फिरोज, श्लोकात्यांक्षरी-प्रतियोगिता- डॉ दिव्या भारती तथा डॉ प्रदीप कुमार एवं सम्पूर्ति-सत्र संयोजन- प्रो. अभिमन्यु, डॉ. शिवलोचन शांडिल्य एवं विभागीय शोधछात्रों के द्वारा सम्पन्न हुआ।
उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. प्रशस्यमित्र शास्त्री ने अपने उत्साहपूर्ण एवं प्रभावशाली वक्तव्य तथा सरस संस्कृत कविता हास्य-व्यंग्य के माध्यम से विद्यार्थियों को संस्कृत के प्रति अनुराग एवं उत्साह से भर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी ने कहा कि भारतीय ज्ञान-परम्परा संस्कृत भाषा में निबद्ध है। वेद, पुराण, स्मृति, अर्थशास्त्र, आयुर्वेद आदि अनेक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ संस्कृत भाषा में रचे गए हैं। भारतीय ज्ञान-परम्परा के मूल स्वरूप, उसके अध्ययन तथा उसमें निहित वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक ज्ञान को समझने और आत्मसात् करने के लिए संस्कृत भाषा का ज्ञान आवश्यक है। प्रतियोगिताओ के आयोजन से विद्यार्थी में संस्कृत भाषा का अभ्यास दृढ़ होता है।
कार्यक्रम के संयोजक प्रो. शरदिन्दु कुमार तिवारी ने संस्कृत भाषा के महत्त्व तथा उसके अद्यावधि प्रयोग-पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत केवल प्राचीन ज्ञान की भाषा ही नहीं, बल्कि आज भी विभिन्न क्षेत्रों में निरन्तर प्रयुक्त एवं प्रासंगिक भाषा है। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत के अध्ययन, प्रयोग एवं प्रचार-प्रसार के लिए प्रेरित किया।
समारोह में आयोजित प्रत्येक प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार तथा दो सान्त्वना पुरस्कार प्रदान करने का निर्णय हुआ। विजेता छात्र-छात्राओं को ३ सितम्बर २०२६ को संस्कृत विभाग के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।







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