जनशिकायतों में लापरवाही पर सख्त डीजीपी, नौ जिलों के 10 थानाध्यक्षों पर विभागीय कार्रवाई के निर्देश
लखनऊ। जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर अब सख्त कार्रवाई होगी। पुलिस महानिदेशक ने प्रदेश में जनसुनवाई व्यवस्था की समीक्षा करते हुए नौ जिलों के 10 थानाध्यक्षों को प्रत्यावर्तित कर उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही थाने और चौकी स्तर पर लंबित जनशिकायतों की समीक्षा कर तीन दिन के भीतर अनुपालन आख्या उपलब्ध कराने को कहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनशिकायतों के प्रभावी और समयबद्ध निस्तारण के निर्देशों के क्रम में पुलिस महानिदेशक ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश के पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इसमें जोनल एडीजी, पुलिस आयुक्त, आईजी-डीआईजी, एसएसपी और एसपी शामिल हुए।
डीजीपी ने स्पष्ट किया कि आईजीआरएस, जनसुनवाई, मुख्यमंत्री संदर्भ, पीजी पोर्टल सहित विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित किया जाए। किसी फरियादी की शिकायत दर्ज करने से मना न किया जाए। शिकायत लंबित रहने पर उसका कारण दर्ज करने के साथ शिकायतकर्ता को कार्रवाई की स्थिति की जानकारी भी दी जाए।
एसपी कार्यालयों में बनेगी निगरानी डेस्क
प्रत्येक एसएसपी और एसपी कार्यालय में जनशिकायतों की निगरानी के लिए केंद्रीय डेस्क स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह डेस्क प्रतिदिन प्राप्त, निस्तारित और लंबित शिकायतों का ब्योरा रखेगी तथा संबंधित थाना-चौकी से लंबित मामलों का फॉलोअप करेगी। फरियादियों के साथ अभद्रता, उपेक्षा, पक्षपात, भ्रष्टाचार या अनावश्यक टालमटोल की शिकायत मिलने पर जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।
हर थाने में बनेंगे शीर्ष 10 भूमि विवादों की सूची
भूमि विवादों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रत्येक थाने को क्षेत्र के शीर्ष 10 भूमि विवादों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इन मामलों की निगरानी एसीपी अथवा सीओ करेंगे और एसडीएम के साथ समन्वय कर समाधान का प्रयास किया जाएगा। एक विवाद का निस्तारण होने पर अगले प्रचलित विवाद को सूची में शामिल किया जाएगा। यक्ष बीट रिपोर्ट में दर्ज भूमि विवादों को भी निगरानी व्यवस्था से जोड़ा जाएगा।
संवेदनशील विवादों के समाधान के लिए थाना, सर्किल और जनपद स्तर पर विशेष टीमें गठित होंगी। पूर्व में मारपीट, मुकदमेबाजी अथवा जातीय-सांप्रदायिक संवेदनशीलता वाले मामलों की प्रतिदिन निगरानी की जाएगी। शांति भंग की आशंका होने पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों के तहत निरोधात्मक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
इन थानाध्यक्षों पर कार्रवाई के निर्देश
सितंबर में अगस्त की तुलना में जनशिकायतों में अत्यधिक वृद्धि को लेकर खीरी के मैलानी व फरधान, उन्नाव के सोहरामऊ, एटा के जसरथपुर, आगरा के लोहामंडी, प्रतापगढ़ के महेशगंज, बदायूं के उसावा, बिजनौर के चांदपुर, मथुरा के जैत और लखनऊ के बाबू बनारसीदास थाने के थानाध्यक्षों को प्रत्यावर्तित कर विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
- डीजीपी ने कहा कि शिकायतों और विवादों का समयबद्ध, निष्पक्ष और संवेदनशील निस्तारण पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। शिकायतकर्ता को न्यायोचित सहायता मिले और संभावित विवादों में समय रहते कार्रवाई कर कानून-व्यवस्था कायम रखी जाए। जनसुनवाई में लापरवाही करने वालों की जवाबदेही तय कर कठोर कार्रवाई की जाएगी।







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