जनपद वाराणसी में दिनांक 29 एवं 30 अक्टूबर को भारी वर्षा एवं आंधी-तूफान की चेतावनी के दृष्टिगत जिला प्रशासन सतर्क, जनसामान्य से सुरक्षित रहने एवं आवश्यक सावधानियाँ बरतने की अपील
वाराणसी, दिनांक 27 अक्टूबर, 2026।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी मौसम संबंधी चेतावनी के दृष्टिगत जनपद वाराणसी में दिनांक 29 एवं 30 अक्टूबर, 2026 को भारी वर्षा, गरज-चमक तथा आंधी-तूफान की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा जनपदवासियों से विशेष सतर्कता बरतने तथा अपनी एवं अपने परिवार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की अपील की गई है। प्रतिकूल मौसम की स्थिति में तेज हवाओं, आकाशीय बिजली, जलभराव, पेड़ अथवा विद्युत खंभे गिरने तथा कमजोर भवनों को क्षति पहुँचने जैसी घटनाओं की आशंका रहती है। ऐसी परिस्थितियों में थोड़ी-सी असावधानी भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। अतः सभी नागरिकों से अनुरोध है कि मौसम संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लें और किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने से बचें।

जनसामान्य से अपेक्षा की जाती है कि वे प्रशासन को सहयोग प्रदान करें, मौसम की अद्यतन जानकारी केवल आधिकारिक माध्यमों से प्राप्त करें तथा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
जिला प्रशासन ने विशेष रूप से ऐसे व्यक्तियों को सावधान रहने की सलाह दी है, जो जर्जर एवं क्षतिग्रस्त भवनों, कच्चे मकानों, कमजोर दीवारों, अस्थायी टिनशेड अथवा अन्य जोखिमपूर्ण संरचनाओं में निवास करते हैं। ऐसे भवन तेज हवाओं एवं भारी वर्षा के दौरान असुरक्षित हो सकते हैं। इसलिए संबंधित परिवार मौसम खराब होने से पूर्व ही किसी सुरक्षित एवं मजबूत भवन अथवा अन्य सुरक्षित स्थान पर चले जाएँ। परिवार के बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों एवं बीमार व्यक्तियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए।
आंधी-तूफान एवं भारी वर्षा से बचाव हेतु क्या करें
1. मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान दें।
भारत मौसम विज्ञान विभाग तथा जिला प्रशासन द्वारा जारी मौसम संबंधी सूचनाओं को नियमित रूप से देखते रहें। किसी भी चेतावनी अथवा सुरक्षा निर्देश को हल्के में न लें। अपने परिवार के सदस्यों को भी मौसम की स्थिति के बारे में जानकारी देते रहें तथा आवश्यकतानुसार पहले से सुरक्षित रहने की व्यवस्था कर लें।
2. सुरक्षित भवन के अंदर रहें।
आंधी-तूफान अथवा तेज हवाएँ चलने की स्थिति में पक्के एवं सुरक्षित भवन के अंदर रहें। खिड़कियों, काँच के दरवाजों, बालकनी एवं छत के किनारों से दूरी बनाए रखें। यदि बाहर हैं, तो यथाशीघ्र किसी सुरक्षित भवन में पहुँचें। केवल पेड़ या अस्थायी शेड के नीचे रुकना सुरक्षित विकल्प नहीं है।
3. जर्जर भवनों से दूर रहें।
जिन भवनों की दीवारें कमजोर हैं, छत क्षतिग्रस्त है अथवा जिनमें दरारें दिखाई दे रही हैं, वहाँ रहने से बचें। ऐसे भवनों में निवास करने वाले परिवार पहले से ही सुरक्षित स्थान पर चले जाएँ। तेज हवा अथवा भारी वर्षा शुरू होने के बाद असुरक्षित भवन से निकलने में जोखिम बढ़ सकता है।
4. पेड़ों, बिजली के खंभों एवं होर्डिंग्स से दूरी रखें।
तेज हवाओं के दौरान बड़े पेड़ों, कमजोर दीवारों, विज्ञापन होर्डिंग्स, मोबाइल टावरों, बिजली के खंभों तथा निर्माणाधीन संरचनाओं के पास खड़े न हों। इनके गिरने अथवा इनके हिस्से टूटकर गिरने की आशंका रहती है। घर के आसपास ऐसे सामान को सुरक्षित कर दें, जो तेज हवा में उड़कर किसी को चोट पहुँचा सकता है।
5. आकाशीय बिजली से बचाव के उपाय अपनाएँ।
गरज-चमक एवं बिजली कड़कने के दौरान खुले मैदान, खेत, छत, तालाब, नदी तथा अन्य खुले स्थानों से हटकर सुरक्षित भवन में आश्रय लें। यदि आप खेत अथवा खुले स्थान में हैं, तो किसी सुरक्षित पक्के भवन या बंद वाहन में पहुँचने का प्रयास करें। पेड़ के नीचे शरण न लें। सुरक्षित आश्रय उपलब्ध न होने पर खुले स्थान में जमीन पर लेटने के बजाय शरीर को यथासंभव नीचे रखकर बिजली गिरने का जोखिम कम करने का प्रयास करें।
6. जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें।
भारी वर्षा के दौरान सड़क, गली, अंडरपास, नाले, निचले इलाकों तथा जलभराव वाले मार्गों से गुजरने से बचें। पानी की गहराई एवं बहाव का सही अनुमान लगाना कठिन होता है। पैदल अथवा वाहन से पानी भरे मार्ग को पार करने का प्रयास न करें। नदी एवं घाटों के आसपास विशेष सतर्कता बरतें और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
7. विद्युत सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।
तेज हवा एवं वर्षा के दौरान यदि विद्युत तार टूटकर गिर जाएँ या बिजली का खंभा क्षतिग्रस्त दिखाई दे, तो उससे पर्याप्त दूरी बनाए रखें और तत्काल संबंधित विभाग को सूचना दें। गीले हाथों से बिजली के स्विच, खुले तार अथवा विद्युत उपकरण न छुएँ। घर में पानी भरने की स्थिति में विद्युत आपूर्ति बंद कराने के लिए सुरक्षित तरीके से संबंधित विभाग की सहायता लें।
8. आवश्यक सामग्री पहले से तैयार रखें।
घर में टॉर्च, अतिरिक्त बैटरी, पीने का पानी, आवश्यक दवाएँ, प्राथमिक उपचार सामग्री तथा मोबाइल फोन को चार्ज रखने की व्यवस्था करें। आपात स्थिति में उपयोगी संपर्क नंबर अपने पास रखें। छोटे बच्चों, बुजुर्गों एवं नियमित दवा लेने वाले व्यक्तियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी रखें।
9. बच्चों, बुजुर्गों एवं जरूरतमंद व्यक्तियों का ध्यान रखें।
मौसम खराब होने के दौरान बच्चों को अकेले बाहर न जाने दें। बुजुर्गों, दिव्यांगजनों, बीमार व्यक्तियों तथा अकेले रहने वाले लोगों की सुरक्षा एवं आवश्यकताओं का ध्यान रखें। पड़ोस में कोई व्यक्ति असुरक्षित स्थिति में हो, तो उसकी सहायता करते हुए प्रशासन को सूचना दें।
10. किसानों एवं पशुपालकों से विशेष अपील।
किसान मौसम संबंधी चेतावनी को ध्यान में रखते हुए खेतों में कार्य की योजना बनाएँ तथा कटी हुई फसल एवं कृषि उपज को सुरक्षित रखने के लिए यथासंभव आवश्यक प्रबंध करें। आंधी-तूफान एवं आकाशीय बिजली की स्थिति में खेतों में कार्य करने से बचें। पशुओं को खुले एवं असुरक्षित स्थानों पर न बाँधें तथा उन्हें सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने का प्रयास करें।
11. नाव एवं नदी संबंधी गतिविधियों में सावधानी रखें।
तेज हवा, गरज-चमक एवं भारी वर्षा के दौरान नदी में अनावश्यक रूप से न जाएँ। नाव का संचालन करने वाले नाविक एवं नदी के आसपास रहने वाले लोग मौसम की स्थिति तथा सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। किसी भी प्रकार की जोखिमपूर्ण जल गतिविधि से बचें।
12. अफवाहों से बचें और सही जानकारी साझा करें।
मौसम से संबंधित किसी भी सूचना की पुष्टि आधिकारिक माध्यमों से करें। सोशल मीडिया अथवा अन्य माध्यमों से प्राप्त अपुष्ट संदेशों, भ्रामक चेतावनियों एवं अफवाहों को बिना पुष्टि के आगे न भेजें। सही एवं प्रमाणित जानकारी साझा कर अन्य नागरिकों को भी जागरूक करें।
आंधी-तूफान एवं भारी वर्षा के दौरान क्या न करें
1. अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें।
मौसम प्रतिकूल होने पर गैर-जरूरी यात्रा, खुले स्थानों में घूमने तथा बाहरी गतिविधियों से बचें। यदि बाहर निकलना अत्यंत आवश्यक हो, तो मौसम की स्थिति एवं सुरक्षित मार्ग की जानकारी लेकर ही निकलें।
2. पेड़, बिजली के खंभे या कमजोर संरचनाओं के नीचे आश्रय न लें।
तेज हवा के दौरान पेड़ों की शाखाएँ टूट सकती हैं, होर्डिंग्स गिर सकते हैं तथा कमजोर दीवारें ढह सकती हैं। ऐसी संरचनाओं के नीचे खड़े होकर स्वयं को खतरे में न डालें।
3. आकाशीय बिजली के दौरान खुले स्थानों में न रहें।
खेत, मैदान, छत, तालाब, नदी एवं अन्य खुले स्थानों में खड़े न रहें। धातु की रेलिंग, खंभों तथा बिजली से जुड़े उपकरणों के पास भी न रुकें। पेड़ के नीचे आश्रय लेना विशेष रूप से खतरनाक हो सकता है।
4. जलभराव एवं तेज बहाव वाले पानी को पार न करें।
सड़क पर भरे पानी, नाले, अंडरपास अथवा तेज बहाव वाले जलमार्ग को पैदल, दोपहिया वाहन या कार से पार करने का प्रयास न करें। पानी की वास्तविक गहराई और सड़क की स्थिति स्पष्ट न होने पर वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग अपनाएँ।
5. टूटे हुए बिजली के तारों को न छुएँ।
बारिश के दौरान जमीन पर गिरे तार, विद्युत खंभे या क्षतिग्रस्त उपकरण जानलेवा हो सकते हैं। उन्हें हटाने अथवा स्वयं ठीक करने का प्रयास न करें। आसपास के लोगों को भी दूर रखें और संबंधित विभाग को सूचित करें।
6. जर्जर भवनों एवं अस्थायी ढाँचों में न रुकें।
क्षतिग्रस्त मकानों, कमजोर छतों, अस्थायी टिनशेड तथा निर्माणाधीन भवनों में आंधी-तूफान के दौरान रुकना जोखिमपूर्ण हो सकता है। सुरक्षित स्थान पर जाने में देरी न करें।
7. मौसम खराब होने पर नदी एवं घाटों पर अनावश्यक रूप से न जाएँ।
नदी में स्नान, नौका विहार अथवा अन्य जोखिमपूर्ण गतिविधियों से बचें। नाव संचालन के संबंध में प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों एवं प्रतिबंधों का उल्लंघन न करें।
8. खुले में रखे ज्वलनशील पदार्थों एवं उपकरणों को असुरक्षित न छोड़ें।
तेज हवा में उड़ने वाली वस्तुओं, ढीली टिन की चादरों, लोहे के पाइपों, निर्माण सामग्री तथा अन्य सामान को खुले में असुरक्षित न छोड़ें। इन्हें सुरक्षित स्थान पर रखें।
9. आपात स्थिति में घबराहट न फैलाएँ।
किसी दुर्घटना अथवा आपदा की स्थिति में स्वयं सुरक्षित रहते हुए संबंधित विभाग को सूचना दें। बिना पुष्टि के किसी घटना की संख्या, नुकसान या चेतावनी से संबंधित सूचना प्रसारित न करें।
10. प्रशासनिक निर्देशों की अवहेलना न करें।
यदि किसी क्षेत्र में सुरक्षा के दृष्टिगत आवागमन अथवा अन्य गतिविधियों पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रतिबंध लगाया जाता है, तो उसका पालन करें। अनावश्यक भीड़ एकत्र न करें और राहत एवं बचाव कार्य में बाधा न पहुँचाएँ।
जिला प्रशासन, वाराणसी सभी जनपदवासियों से अपील करता है कि आगामी दिनों में संभावित प्रतिकूल मौसम को देखते हुए स्वयं सतर्क रहें तथा अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी सुरक्षित रहने के लिए जागरूक करें। विशेष रूप से जर्जर भवनों में रहने वाले परिवार समय रहते सुरक्षित स्थान पर चले जाएँ। बच्चों एवं बुजुर्गों को अकेले बाहर न भेजें और मौसम खराब होने के दौरान अनावश्यक आवागमन से बचें।

नागरिक किसी भी आपात स्थिति में संबंधित विभागों एवं जिला प्रशासन को तत्काल सूचना दें। प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें तथा किसी भी प्रकार की अफवाह पर विश्वास न करें। सतर्कता, समय पर सावधानी और प्रशासन के साथ सहयोग से संभावित दुर्घटनाओं एवं जनहानि के जोखिम को कम किया जा सकता है।
सावधान रहें, सुरक्षित रहें और दूसरों को भी सुरक्षित रहने के लिए प्रेरित करें।
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, वाराणसी द्वारा जनहित में जारी।







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