

नोटिस में लिखा है कि पिछले 1 अक्टूबर को नक्शा रद्द किया चुका है।
वाराणसी विकास प्राधिकरण अर्थात वीडीए द्वारा ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए जा चुके हैं।
जिसके खिलाफ दयाल ग्रुप ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से स्टे लिया है।
स्टे में यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहा गया है।
बावजूद वहां निर्माण चल रहा है।
उसे तत्काल रोका जाए वरना कार्यवाही की जाएगी।
वीडीए की इस नोटिस के लिए नक्शा रद्द करने का आवेदन देने वाले डॉ सूबेदार सिंह ने वीडीए का धन्यवाद किया है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि जब वे नोटिस की फोटो खींचने गए, तो उस पर दयाल ग्रुप की ओर से आपत्ति की गई।
ये मामला इसलिए भी बेहद दिलचस्प हो चला है, क्योंकि दयाल ग्रुप के मालिक राजेश दयाल की यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल में अगाध श्रद्धा है।
मामला इसलिए भी दिलचस्प है कि थियोसॉफिकल सोसायटी की जिस ज़मीन पर ये होटल बन रहा है,
उसी ज़मीन पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोप वे भी बन रहा है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री मोदी द्वारा किए जाने की बात है।
ये मामला इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि यूपी की राज्यपाल में अनन्य आस्था रखने वाले दयाल ग्रुप के मालिक राजेश दयाल इस समय उल्टी पड़ती हवाओं से रूबरू हैं।
ये मामला इसलिए भी दिलचस्प है कि यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कुछ वक्त पहले ही गोरखपुर जाकर सीएम सिटी की दुर्दशा का जीवंत ब्योरा दिया था।
सो इस दिलचस्प मामले पर नज़र बनाए रखिए और जौन एलिया का ये शेर पढ़ते रहिए-
“हाँ ठीक है मैं अपनी अना का मरीज़ हूँ
आख़िर मिरे मिज़ाज में क्यूँ दख़्ल दे कोई!!”
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