केवीआईसी अध्यक्ष ने देशवासियों से की दीपावली पर मिट्टी के दीये, खादी और स्थानीय कारीगरों के स्वदेशी उत्पाद खरीदने की अपील
वाराणसी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में दीपावली के पावन पर्व से पहले बुधवार को कुम्हार परिवारों को स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की नई सौगात मिली। काशी के ऐतिहासिक नमो घाट पर खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी), सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित भव्य कार्यक्रम में आयोग के अध्यक्ष श्री मनोज गोयल ने ग्रामोद्योग विकास योजना के अंतर्गत कुम्हार सशक्तीकरण कार्यक्रम के तहत 160 कुम्हारों को आधुनिक विद्युत चालित चाक वितरित किए। ‘खादी वाली दिवाली’ थीम पर आयोजित वितरण कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री एमएसएमई श्री हंसराज विश्वकर्मा उपस्थित रहे।

दीपावली से ठीक पहले कुम्हार परिवारों को मिली यह सौगात उनकी पारंपरिक कला को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। विद्युत चालित चाक की सहायता से कारीगर अब कम समय और कम शारीरिक श्रम में अधिक मिट्टी के दीये, बर्तन और अन्य पॉटरी उत्पाद तैयार कर सकेंगे। इससे उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ने के साथ आय में वृद्धि और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

इस अवसर पर कुम्हारों और उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए केवीआईसी अध्यक्ष श्री मनोज गोयल ने कहा कि बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। यहां की मिट्टी में सदियों पुरानी परंपराएं और कारीगरों का अनमोल हुनर समाया हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज काशी विकास और आधुनिकता के नए अध्याय लिख रही है। एक ओर श्री काशी विश्वनाथ धाम का भव्य स्वरूप दुनिया को आकर्षित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक बुनियादी सुविधाओं, उद्योगों और स्वरोजगार के नए अवसरों से काशी के सामान्य परिवारों के जीवन में बदलाव आ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में ग्रामीण कारीगरों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
श्री गोयल ने कहा कि आज का कार्यक्रम केवल मशीनों के वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि 160 कुम्हार परिवारों के भविष्य में नई संभावनाएं जोड़ने का प्रयास है। उन्होंने कहा, “जब किसी घर में मिट्टी का दीया जलता है, तो उसके पीछे किसी कुम्हार परिवार की मेहनत, उम्मीद और सपने जुड़े होते हैं। वही दीया उसके बच्चों की पढ़ाई, परिवार की आजीविका और घर की खुशहाली का माध्यम बनता है। हमारा प्रयास है कि इस मेहनत को सम्मान मिले और कुम्हार परिवारों की आमदनी बढ़े।”
उन्होंने आगे कहा कि कुम्हार सशक्तीकरण योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर उन्हें बाजार की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “मेरा सपना है कि काशी का कुम्हार केवल मिट्टी के दीये बनाने वाला कारीगर न रहे, बल्कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विज़न के अनुसार आधुनिक पॉटरी उत्पादों का उद्यमी बने। काशी के मिट्टी के दीये और अन्य पॉटरी उत्पाद देश के बड़े शहरों के साथ दुनिया के बाजारों में भी अपनी पहचान बनाएं।” उन्होंने कारीगरों से नए डिजाइन अपनाने, उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने और डिजिटल माध्यमों से अपने उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने का आह्वान किया।








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