भारत सरकार की अनूठी पहल ‘युवा संगम’ एक भारत, श्रेष्ठ भारत के अंतर्गत केरल भ्रमण पर आए युवा दल ने अपने दौर के तीसरे दिन राज्य की समृद्ध आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का प्रत्यक्ष अनुभव किया। इस दौरान युवा प्रतिनिधियों ने जगद्गुरु आदि शंकराचार्य की पावन जन्मस्थली तथा त्रिशूर जिले के कोडुंगल्लूर स्थित ऐतिहासिक चेरामन जुमा मस्जिद का दौरा किया।
भ्रमण के पहले चरण में प्रतिनिधिमंडल ने आदि शंकराचार्य जी से जुड़े पावन स्थल के दर्शन किए। इस अवसर पर श्रृंगेरी के विद्वान गिरिधर शास्त्री जी ने युवाओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने आदि शंकराचार्य जी के जीवन दर्शन, उनकी शिक्षाओं तथा बचपन की प्रेरक घटनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार उन्होंने अल्पायु में ही अपनी माता से संन्यास की अनुमति प्राप्त कर पूरे देश को सांस्कृतिक सूत्र में पिरोने का कार्य किया था।
शास्त्रियों ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को और मजबूती से आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि उत्तर भारत के नागरिकों को दक्षिण भारत और दक्षिण भारत के लोगों को उत्तर भारत की संस्कृति, परंपराओं एवं जीवनशैली को समझने के लिए निरंतर यात्राएं करनी चाहिए। देश के विभिन्न राज्यों से आए इन युवाओं के बीच राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव का यह संवाद अत्यंत प्रेरणादायी रहा।
प्राचीन चेरामन जुमा मस्जिद का ऐतिहासिक अवलोकन
दौरे के अगले पड़ाव में दल ने त्रिशूर जिले के कोडुंगल्लूर में स्थित ऐतिहासिक चेरामन जुमा मस्जिद का भ्रमण किया। भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे प्राचीन मस्जिदों में शुमार यह स्थल केरल की अनूठी स्थापत्य कला और भारत के सदियों पुराने सर्वधर्म समभाव तथा समृद्ध व्यापारिक-सांस्कृतिक इतिहास का जीवंत प्रतीक है। प्रतिनिधियों ने मस्जिद के ऐतिहासिक महत्व, इसकी पारंपरिक काष्ठ कला और केरल की सौहार्दपूर्ण सामाजिक परंपरा को गहराई से जाना। यह 50 सदस्यीय दल का भ्रमण काशी हिंदू विश्वविद्यालय के नोडल अधिकारी डॉ. बाला लखेन्द्र और
आई टी पलक्कड़ के नोडल अधिकारी नोडल अधिकारी प्रो. विनीत नारायण ने की ।
इस अध्ययन दौरे में शामिल विद्यार्थियों ने साझा किया कि एक ही दिन में आदि शंकराचार्य जी के अद्वैत दर्शन से लेकर कोडुंगल्लूर की प्राचीन साझी विरासत को देखना भारत की बहुसांस्कृतिक पहचान और समावेशी परंपरा को करीब से समझने का एक अविस्मरणीय अनुभव रहा।
‘युवा संगम’ का यह कार्यक्रम देश के युवाओं के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, आपसी समझ और राष्ट्रीय एकता की भावना को निरंतर सशक्त कर रहा है।







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