March 19, 2026 4:02 am

Home » ब्रेकिंग न्यूज़ » नवाचार को समाज तक पहुँचाने की दिशा में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि — रोग प्रतिरोधी उच्च उत्पादक धान की किस्म का उद्योग साझेदार को लाइसेंस

नवाचार को समाज तक पहुँचाने की दिशा में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि — रोग प्रतिरोधी उच्च उत्पादक धान की किस्म का उद्योग साझेदार को लाइसेंस

नवाचार को समाज तक पहुँचाने की दिशा में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि — रोग प्रतिरोधी उच्च उत्पादक धान की किस्म का उद्योग साझेदार को लाइसेंस
* देशभर में बड़े पैमाने पर उत्पादन एवं वितरण हेतु उद्योग साझेदार के साथ समझौता

वाराणसी, 14.03.2026। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने अपने शोध आधारित नवाचारों को समाज तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपनी प्रयोगशाला में विकसित नई धान की किस्म का उद्योग लाइसेंस प्रदान किया है, ताकि इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन कर देश एवं विदेश के किसानों तक पहुँचाया जा सके। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित मालवीय मनीला सिंचित धान-1 (एमएमएसडी-1) किस्म को लगभग 18 वर्षों के सतत अनुसंधान एवं विकास के बाद तैयार किया गया है। यह किस्म अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान, मनीला, फिलीपींस के सहयोग से विकसित की गई है। उच्च उत्पादकता एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली इस धान किस्म का लाइसेंस त्रिमूर्ति प्लांट साइंसेज़ प्रा. लि., हैदराबाद को प्रदान किया गया है।
इस उद्देश्य से काशी हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर में शनिवार को कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी की उपस्थिति में विश्वविद्यालय एवं उद्योग साझेदार के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर एवं आदान-प्रदान किया गया। इस पहल के माध्यम से विश्वविद्यालय का उद्देश्य अपने कृषि-प्रौद्योगिकी नवाचारों को देशभर के किसानों एवं आम जन तक सुलभ बनाना है। यह अकादमिक-उद्योग सहयोग काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के बौद्धिक संपदा अधिकार एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रकोष्ठ के सतत प्रयासों से संभव हुआ है।
विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव प्रो. अरुण कुमार सिंह तथा त्रिमूर्ति प्लांट साइंसेज़ प्रा. लि. की ओर से उप महाप्रबंधक श्री अमित कुमार शुक्ला द्वारा समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया। यह समझौता सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के अंतर्गत किया गया है, जिसके तहत विश्वविद्यालय आवश्यक प्रौद्योगिकी विकसित करेगा तथा त्रिमूर्ति कंपनी वितरण की जिम्मेदारी निभाएगी।
कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने इस उपलब्धि पर सभी वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए अन्य प्रमुख फसलों में भी नवाचार को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास भारत की कृषि उत्पादन प्रणाली में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकते हैं। कुलपति ने सुझाव दिया कि किसान मेलों की तर्ज पर विश्वविद्यालय उद्योगों को आमंत्रित कर विकसित कृषि उत्पादों के प्रस्तुतीकरण एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा दे सकता है।
कृषि विज्ञान संस्थान के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभागाध्यक्ष प्रो. श्रवण कुमार सिंह के नेतृत्व में विकसित इस किस्म की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
रोपाई तथा प्रत्यक्ष बुवाई दोनों परिस्थितियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन।
कम अवधि (115–120 दिन) में उच्च उत्पादन क्षमता (55–64 क्विंटल प्रति हेक्टेयर)।
उत्तर प्रदेश, बिहार एवं ओडिशा जैसी जलवायु परिस्थितियों के लिए अनुकूल।
अपेक्षाकृत कम जल की आवश्यकता।
लंबे एवं पतले आकर्षक दाने, जिससे बाजार मूल्य अधिक।
अन्य लंबी दाना किस्मों की तुलना में कम टूटन तथा 63.50% हेड राइस रिकवरी।
26.30% एमाइलोज़ सामग्री, जिससे स्वाद एवं पकाने की गुणवत्ता बेहतर।
अर्ध-बौनी (105–110 सेमी) एवं मजबूत तना, जिससे गिरने की संभावना कम।
ताजा धान चिपचिपा, जबकि परिपक्व होने पर पुलाव एवं बिरयानी जैसे व्यंजनों के लिए उपयुक्त।
लीफ ब्लास्ट, ब्राउन स्पॉट, फॉल्स स्मट जैसे रोगों तथा प्रमुख कीटों के प्रति मध्यम प्रतिरोधक क्षमता।
शीघ्र परिपक्वता के कारण गहन फसल प्रणाली के लिए उपयुक्त।
अगली फसलों की समय पर बुवाई में सहायक, जिससे कुल कृषि उत्पादन में वृद्धि।
समझौते के अनुसार विश्वविद्यालय कंपनी को इस किस्म के ब्रीडर बीज उपलब्ध कराएगा, जिन्हें कंपनी अपनी उत्पादन इकाइयों में विकसित कर विपणन नेटवर्क के माध्यम से भारत एवं विदेशों के किसानों तक पहुँचाएगी।
मुख्य प्रजनक प्रो. श्रवण कुमार सिंह ने बताया कि भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025 में इस किस्म को उत्तर प्रदेश, बिहार एवं ओडिशा जैसे प्रमुख धान उत्पादक राज्यों के लिए जारी एवं अधिसूचित किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यह किस्म किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम है।

 


बौद्धिक संपदा अधिकार एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रकोष्ठ के समन्वयक प्रो. बिरिंची सर्मा ने बताया कि यह विश्वविद्यालय का दूसरा कृषि उत्पाद है जिसे लाइसेंस किया गया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से किसानों को एमएमएसडी-1 के गुणवत्तापूर्ण बीज आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।
इस अवसर पर कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. यू.पी. सिंह, विधि प्रकोष्ठ के समन्वयक प्रो. रजनीश कुमार सिंह, आईपीआरटीटी-सेल की सदस्य प्रो. गीता राय, किस्म की सह-प्रजनक डॉ. आकांक्षा सिंह तथा त्रिमूर्ति प्लांट साइंसेज़ के श्री अमन श्रीवास्तव उपस्थित रहे।
त्रिमूर्ति प्लांट साइंसेज़ प्रा. लि. एक प्रतिष्ठित क्रॉप जेनेटिक्स एवं हाइब्रिड बीज कंपनी है, जो देश के 18 राज्यों में कार्यरत है। कंपनी मक्का, कपास, बाजरा, तरबूज एवं लौकी वर्ग सहित विभिन्न फील्ड एवं सब्जी फसलों के क्षेत्र में कार्यरत है। पारंपरिक प्रजनन एवं जैव-प्रौद्योगिकी आधारित समाधान विकसित करने में विशेषज्ञ यह कंपनी श्रीलंका, नेपाल, बांग्लादेश, एवं वियतनाम जैसे देशों में भी सक्रिय है।

Liveupweb
Author: Liveupweb

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *