हॉकी चौराहा का नाम हो ओलंपियन ललित उपाध्याय के नाम
—बनारस के खिलाड़ियों का हुंकार, हीरो को मिले शहर में पहचान
वाराणसी।
खेल नगरी बनारस से एक जोरदार आवाज उठी है अपने हीरो को उसका हक दिलाने की। शुक्रवार को शहर के सैकड़ों युवा खिलाड़ियों ने चांदमारी से लालपुर स्टेडियम तक मार्च निकालकर सेंट्रल जेल के पास स्थित हॉकी चौराहा चौराहे का नाम ओलंपियन ललित उपाध्याय के नाम पर रखने की मांग की।

हाथों में तख्तियां, दिल में जोश और जुबां पर एक ही नारा—“ललित उपाध्याय को सम्मान दो”—के साथ खिलाड़ियों ने प्रशासन और सरकार तक अपनी बात पहुंचाई। उनका कहना है कि जिस खिलाड़ी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश और बनारस का नाम रोशन किया, उसे अपने शहर में पहचान मिलनी ही चाहिए।
हॉकी वाराणसी के अध्यक्ष डॉ. ए.के. सिंह ने बताया कि इस संबंध में पहले ही वाराणसी के सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की जा चुकी है। उन्होंने कहा, “ललित उपाध्याय आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनके नाम पर चौराहा होना पूरे शहर के लिए गर्व की बात होगी।”
दरअसल, ललित उपाध्याय भारतीय हॉकी के ऐसे सितारे हैं, जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक 2020 और पेरिस ओलंपिक 2024 में कांस्य पदक जीतने वाली टीम में अहम भूमिका निभाई। उनके शानदार प्रदर्शन के लिए भारत सरकार उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित कर चुकी है।
शिवपुर के रहने वाले ललित उपाध्याय सिर्फ खिलाड़ी ही नहीं, बल्कि जमीनी हीरो भी हैं। जब भी वे वाराणसी आते हैं, तो परमानंदपुर मिनी स्टेडियम में बच्चों के साथ पसीना बहाते हैं, उन्हें हॉकी की बारीकियां सिखाते हैं और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते हैं।
युवा खिलाड़ियों का कहना है कि यह सिर्फ एक नामकरण नहीं, बल्कि बनारस की खेल संस्कृति को सम्मान देने का मौका है। “अगर हमारे बीच से निकले खिलाड़ी को शहर सम्मान देगा, तो हर बच्चा मैदान में उतरने का सपना देखेगा,” एक खिलाड़ी ने कहा।
अब निगाहें प्रशासन और सरकार के फैसले पर टिकी हैं कि क्या बनारस अपने इस चमकते सितारे को वह सम्मान देगा, जिसका वह हकदार है।







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