वाराणसी से एक बड़ी खबर सामने आई है। 29 साल पुराने हिरासत मौत मामले में अदालत ने दो पूर्व पुलिसकर्मियों और एक डॉक्टर को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। यह मामला 1997 का है, जब हिरासत में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। लगभग तीन दशक तक चली कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार अदालत का फैसला आ गया है। इस फैसले को न्याय व्यवस्था और पुलिस जवाबदेही के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हिरासत में मौत के मामले में 2 पूर्व पुलिसकर्मी और एक डॉक्टर दोषी
वाराणसी की एक अदालत ने 1997 के एक चर्चित हिरासत मौत (Custodial Death) मामले में फैसला सुनाते हुए दो पूर्व सब-इंस्पेक्टर और एक डॉक्टर को सजा सुनाई है। लगभग 29 साल पुराने इस मामले में अदालत ने माना कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति की मौत के मामले में जिम्मेदारी तय होती है और कानून से कोई ऊपर नहीं है.
मामला क्या था?
1997 में एक व्यक्ति की पुलिस हिरासत के दौरान मौत हो गई थी। परिवार ने आरोप लगाया था कि हिरासत में मारपीट और लापरवाही के कारण उसकी जान गई।
मामला वर्षों तक अदालत में चला। गवाह, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य सबूतों की जांच के बाद अब अदालत ने अपना अंतिम फैसला सुनाया।
29 साल बाद क्यों आया फैसला?
- मामला काफी पुराना था
- कई गवाहों और दस्तावेजों की जांच हुई
- न्यायिक प्रक्रिया में लंबा समय लगा
- कई अधिकारियों के स्थानांतरण और सेवानिवृत्ति भी हुई
इसी कारण फैसला आने में लगभग तीन दशक लग गए ।








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