आईआईवीआर की तीन उन्नत संकर किस्मों के व्यावसायीकरण हेतु लाइसेंसिंग समझौता

राजातालाब।आराजी लाइन विकासखंड क्षेत्र के शाहंशाहपुर स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) द्वारा विकसित तीन उन्नत संकर किस्मों—मिर्च संकर काशी गरिमा, मिर्च संकर काशी रत्ना तथा टमाटर संकर काशी अभिमान के व्यावसायीकरण हेतु लाइसेंसिंग समझौता एग्री-इनोवेट, नई दिल्ली के माध्यम से संपन्न हुआ।काशी गरिमा मिर्च की एक सीएमएस-आधारित संकर किस्म है जो ताजा उपभोग एवं निर्यात के लिए उपयुक्त है। इसके फल आकर्षक हरे रंग के, सीधे, लटकने वाले तथा नुकीले होते हैं। यह संकर 20–25 टन प्रति हेक्टेयर तक हरे फलों की उपज देने में सक्षम है तथा मिर्च लीफ कर्ल विषाणु रोग के प्रति सहनशीलता रखती है। काशी रत्ना मिर्च की एक उच्च उत्पादक सीएमएस-आधारित संकर किस्म है, जिसकी उपज लगभग 230 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह शीघ्र तैयार होने वाली संकर किस्म है तथा एन्थ्रेक्नोज रोग एवं थ्रिप्स कीट के प्रति सहनशीलता प्रदर्शित करती है। इसके फल हरे रंग के तीखे स्वाद वाले एवं आकर्षक होते हैं। काशी अभिमान टमाटर की एक उन्नत संकर किस्म है, जिसमें टमाटर लीफ कर्ल विषाणु रोग के प्रति सहनशीलता पाई जाती है। इसके फल गहरे लाल रंग के, चौकोर-गोल आकार के होते हैं तथा यह लगभग 70 टन प्रति हेक्टेयर उपज देने की क्षमता रखती है।समझौते पर आईसीएआर- आईआईवीआर, वाराणसी की ओर से ड़ा. राजेश कुमार, निदेशक ने हस्ताक्षर किए। लाइसेंस प्राप्तकर्ता कंपनी की ओर से घनश्याम पाण्डेय तथा एग्रीनोवेट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली की ओर से डॉ. प्रवीण मलिक, मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।इस लाइसेंसिंग प्रक्रिया का समन्वय प्रौद्योगिकी प्रबंधन इकाई (आईटीएमयू), आईसीएआर- आईआईवीआर वाराणसी द्वारा किया गया।निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि संस्थान द्वारा विकसित उन्नत संकर किस्मों का व्यावसायीकरण कृषि अनुसंधान को किसानों तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र में विकसित उच्च गुणवत्ता वाली सब्जी संकर किस्मों की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को बेहतर उत्पादन, रोग-कीट प्रबंधन में सहायता तथा अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होगा। साथ ही, निजी बीज उद्योग के साथ साझेदारी से इन प्रौद्योगिकियों का व्यापक प्रसार सुनिश्चित किया जा सकेगा।आईटीएमयू के सदस्य सचिव एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ इन्दीवर प्रसाद ने बताया कि यह समझौता संस्थान द्वारा विकसित उन्नत सब्जी प्रौद्योगिकियों को किसानों एवं बीज उद्योग तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे गुणवत्तायुक्त बीजों की उपलब्धता बढ़ेगी तथा सब्जी उत्पादन एवं किसानों की आय में वृद्धि को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही, यह पहल कृषि अनुसंधान, नवाचार एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के क्षेत्र में आईसीएआर-आईआईवीआर की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है। संस्थान द्वारा विकसित इन संकर किस्मों के व्यापक स्तर पर अपनाए जाने से देश में सब्जी उत्पादन की उत्पादकता, गुणवत्ता तथा निर्यात क्षमता को और अधिक मजबूती मिलने की अपेक्षा है।








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