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क्या यूपी में मुस्लिम होने पर ही एनकाउंटर होता है, यह दावा सरासर गलत है।
क्या यूपी में मुस्लिम होने पर ही एनकाउंटर होता है, यह दावा सरासर गलत है।
क्या यूपी में मुस्लिम होने पर ही एनकाउंटर होता है, यह दावा सरासर गलत है।
2017 से 2025, 26 तक यूपी में कुल 289 एनकाउंटर में मौतें हुई है। जिसमे 83 अपराधी मुस्लिम नाम के थे, जबकि 206 अपराधी हिंदू समुदाय से थे, तो फिर यह कहना गलत है कि एनकाउंटर मुस्लिम के ही होते हैं।
2025 में पुलिस द्वारा एनकाउंटर में 48 अपराधी मारे गए,जिसमें 14 मुस्लिम नाम के अपराधी हैं और 34 हिंदू समुदाय नाम के अपराधी है।
एनकाउंटर अक्सर लिस्टेड माफिया का होता है, और उस लिस्ट में दोनों धर्म के अपराधियों के नाम होते हैं। विकास दुबे,अनिल दुजाना, मनीष गुप्ता, संजीव महेश्वरी जीवा यह सब हिंदू थे।और हाई प्रोफाइल एनकाउंटर में मारे गए। यूपी पुलिस कहती है कि जीरो टॉलरेंस अपराध के खिलाफ है, धर्म के खिलाफ नहीं। एनकाउंटर तब होता है जब पुलिस पर फायरिंग होती है। 68% एनकाउंटर हिंदुओं के हुए तो मुस्लिम टारगेट कैसे हो गए?
अपराधी को धर्म देखकर पुलिस गोली नहीं मारती, पुलिस मुस्लिम होने पर भी गोली नहीं मारती, बल्कि लिस्टेड बदमाश होने पर पुलिस गोली मारती है। पर कुछ विपक्ष के लोग, कुछ विपक्ष की पार्टियां, मीडिया नॉरेटिव उसमें धर्म का एंगल डाल देते है।
अभी हाल ही में सूर्य हत्याकांड: गाजियाबाद सूर्य हत्याकांड ईद पर हुआ,आरोपी असद 2 दिन में एनकाउंटर में मारा गया। जघन्य अपराधी होने पर एनकाउंटर करना गलत नहीं है। हाई प्रोफाइल कैस: अतीक, अशरफ, मुख्तार,अंसारी गैंग के कई शूटर एनकाउंटर में मारे गए। मीडिया में मुस्लिम डॉन नॉरेटिव ज्यादा चलता है।
कन्हैया लाल हत्याकांड की बात करें तो यह 28 जून 2022 को उदयपुर में हुआ था। दर्जी कन्हैयालाल की दुकान में दिनदहाड़े गला रेत कर हत्या कर दी गई थी। एन आई ए ने 11 लोगों को दोषी माना, गिरफ्तार हुए 9 लोग। गोस मोहम्मद,रियाज अटारी, मोहसिन, आसिफ, मोहम्मद मोहसिन,वसीमअली, फरहाद मोहम्मद उर्फ बबला,जावेद, मुस्लिम मोहम्मद। दो पाकिस्तानी सलमान और अब्बू इब्राहिम फरार है।
दो को जमानत मिली: 1 सितंबर 2023 को फरहाद मोहम्मद उर्फ बबला को जमानत मिल गई।
5 सितंबर 2024 को मोहम्मद जावेद को जमानत मिल गई।
3 साल बीत गए अभी तक किसी को सजा नहीं हुई।
कन्हैया हत्याकांड जैसे केस है: सांप्रदायिक टेरर,एंगल वाले जघन्य हत्याकांड। दिनदहाड़े केमरे पर कत्ल। अगर यह हत्याकांड यूपी में हुआ होता तो 3 साल नहीं, बल्कि तीन दिन में एनकाउंटर हो जाता।
कुछ बड़े कैस जहां सालों बाद भी सजा नहीं:
कन्हैया लाल उदयपुर 2022, उमेश कोहले अमरावती 2022, कमलेश तिवारी 2019 लखनऊ में गला रेट कर हत्या। 5 साल बीत गए अभी कोई सजा नहीं। किशन भरवाड़ गुजरात 2022 सोशल मीडिया पोस्ट पर हत्या, कैस चल रहा है। निखिल चौहान दिल्ली 2023 स्कूल में चाकू से हत्या, जुवेनाइल जस्टिस में कैस चल रहा है।
कड़वी सच्चाई: कैमरे पर कत्ल, 3 साल बाद भी हिसाब नहीं, यह हैडलाइन सिर्फ कन्हैया लाल की नहीं। कैसा कानून है, कैसा सिस्टम है,तारीख पर तारीख का खेल चलता है। हम मीडिया वालों की जिम्मेदारी बनती है कि ऐसे केशों पर हम आवाज़ उठाएं। आरटीआई से डाटा निकाले कि 2020 से 2025 तक में सांप्रदायिक हत्या के कितने केस में सजा हुई है। पत्रकार के तौर पर मैं बसंत सैनी डाटा मांगता हूं कि NIA टेरर केस में औसत सजा का समय कितना है? 2022 से 2025 के कितने केस में सजा हुई?
बसंत सैनी राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग सदस्य एवं मीडिया प्रभारी पूर्व उत्तर प्रदेश।