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आपदा और दुर्घटनाओं से निपटने के लिए बनेगा स्पेशियलाइज़्ड रेस्क्यू ग्रुप

आपदा और दुर्घटनाओं से निपटने के लिए बनेगा स्पेशियलाइज़्ड रेस्क्यू ग्रुप

एनडीआरएफ की तर्ज पर तैयार होगी एसआरजी, 240 कर्मियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

हर तहसील तक पहुंचेगी फायर सर्विस, हाईराइज इमारतों वाले शहरों के लिए बनेगी विशेष अग्निसुरक्षा व्यवस्था: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

फायर सर्विस केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं, लोगों के जीवन, उद्योगों और निवेश की सुरक्षा से भी जुड़ी: मुख्यमंत्री

350 तहसीलों में से 296 तहसीलों में 326 स्थायी अग्निशमन केंद्र संचालित

नौ वर्षों में दोगुनी से अधिक हुई अग्निशमन क्षमता, 750 से बढ़कर 1660 हुए फायर वाहन

 

लखनऊ, 08 जून:- विशेष आपात परिस्थितियों में राहत और बचाव कार्यों के लिए उत्तर प्रदेश को जल्द ही एक नई विशेषज्ञ टीम मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग में विशेषीकृत रेस्क्यू ग्रुप (एसआरजी) का गठन किया जा रहा है। बदलते आपदा परिदृश्य और नई चुनौतियों को देखते हुए पहले चरण में 10 जनपदों में एसआरजी की स्थापना की तैयारी पूरी कर ली गई है। इसके लिए 240 कर्मियों को एनडीआरएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ तथा अन्य विशेषज्ञ संस्थानों में उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा। भवन ध्वस्त होने, बाढ़, रासायनिक दुर्घटनाओं, ऊंचाई पर फंसे लोगों के रेस्क्यू और संकरे स्थानों में बचाव जैसे जटिल अभियानों में यह टीम आधुनिक उपकरणों और विशेष प्रशिक्षण के साथ त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम होगी।

सोमवार को अग्निशमन एवं आपात सेवा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से शहरी, औद्योगिक और आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अग्निशमन एवं आपात सेवा व्यवस्था को भी समय की आवश्यकताओं के अनुरूप मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभाग अब केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों के जीवन, संपत्ति, उद्योगों और निवेश की सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। इसलिए इसे आधुनिक तकनीक, अत्याधुनिक संसाधनों और प्रशिक्षित मानवबल से और सशक्त बनाया जाए।

 

बैठक में डीजी फायर सर्विस ने मुख्यमंत्री को बताया कि प्रदेश की 350 तहसीलों में से 296 तहसीलों में 326 स्थायी अग्निशमन केंद्र संचालित हैं। 26 नए केंद्र लोकार्पण के लिए तैयार हैं, जबकि 25 केंद्रों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। 47 अन्य प्रस्तावित केंद्रों की डीपीआर तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शेष तहसीलों में भी अग्निशमन सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्यवाही तेज की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहरों में तेजी से बढ़ रही बहुमंजिला इमारतों ने अग्निसुरक्षा की नई चुनौतियां खड़ी की हैं। इन चुनौतियों का सामना आधुनिक संसाधनों और विशेष व्यवस्था के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने हाईराइज भवनों के लिए आवश्यक उपकरणों और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2026-27 में 102 मीटर क्षमता के 10, 90 मीटर क्षमता के 3 तथा 72 मीटर क्षमता के 7 हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म खरीदने की योजना है। इसके अलावा 100 मंजिल तक प्रभावी अग्निशमन क्षमता वाले आधुनिक तकनीक से लैस 14 विशेष फायर फाइटिंग वाहनों की खरीद भी प्रस्तावित है, जिससे ऊंची इमारतों और बड़े परिसरों में राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

 

अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2017 के बाद से विभाग की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में अग्निशमन केंद्रों की संख्या 140 से बढ़कर 260 हो गई है तथा 114 नए केंद्र स्थापित किए गए हैं। फायर वाहनों की संख्या 750 से बढ़कर 1660 हो चुकी है और 400 अतिरिक्त वाहन खरीद की प्रक्रिया में हैं। डायल-112 के साथ एकीकरण, ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार और नई भर्तियों से विभाग की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

मुख्यमंत्री ने फसलों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए जनजागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेशभर में 1.20 लाख से अधिक फायर ऑडिट किए गए। 31 हजार से अधिक मॉक ड्रिल, 75 हजार से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा 16.55 लाख लोगों तक पहुंचने वाले जनजागरूकता अभियान संचालित किए गए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अस्पतालों, होटलों, स्कूलों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और बहुमंजिला भवनों में नियमित फायर ऑडिट कराया जाए तथा सुरक्षा मानकों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने निवेश और उद्योगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए फायर एनओसी व्यवस्था को और अधिक सरल, पारदर्शी तथा समयबद्ध बनाने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि फायर सर्विस पोर्टल को निवेश मित्र 3.0 से एकीकृत किया जा चुका है। एनओसी की वैधता अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है। 1 जनवरी से 31 मई 2026 के बीच प्राप्त 14,717 ऑनलाइन आवेदनों में से 10,670 मामलों में एनओसी जारी की गई है।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश के सभी ब्लॉकों में अग्निमित्र और अग्निसचेतक तैयार करने का लक्ष्य पूरा किया जा चुका है। वर्ष 2026 में लगभग 44 हजार स्वयंसेवकों को रिफ्रेशर प्रशिक्षण दिया गया है। आगामी चरण में इनके लिए समर्पित वेब पोर्टल और मोबाइल एप विकसित किया जाएगा तथा सिविल डिफेंस, होमगार्ड और पीआरडी जैसी  इकाइयों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा।

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Author: Liveupweb

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