पासिंग आउट परेड, ३९ गोरखा प्रशिक्षण केंद्र, वाराणसी २० जून २०२६
३९ गोरखा प्रशिक्षण केंद्र, वाराणसी में २० जून २०२६ को आयोजित एक भव्य और गरिमामयी पासिंग आउट परेड के दौरान १३५ अग्निवीरों ने राष्ट्र सेवा की शपथ ली। परेड की समीक्षा ले० जनरल जुबिन ए मिनवाला, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल, डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेन्स स्टाफ (ऑप्स), मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ तथा कर्नल ऑफ द रेजिमेंट, ९ गोरखा राइफ़ल द्वारा की गई।
यह समारोह २४ सप्ताह के कठिन बुनियादी एवं उन्नत युद्ध प्रशिक्षण का समापन था। इसमें आधुनिक युद्ध शैली के बदलते तरीको को ध्यान में रखते हुए, सैन्य प्रशिक्षण में नई तकनीक को शामिल करने पर खास जोर दिया गया । इस कोर्स की एक खास बात यह रही कि सभी अग्निवीरों को ड्रोन प्रशिक्षण का पूरा अनुभव मिला, जिससे वे आज के युद्ध में अनमैंड एरिअल सिस्टम को समझने और असरदार तरीके से इस्तेमाल करने के साथ -साथ दुश्मन के अनमैंड एरिअल सिस्टम का मुकाबला करने में भी प्रशिक्षित हुए । इस प्रशिक्षण केंद्र ने रेकी, निगरानी और स्टैंड ऑफ़ अटैक मिशन के लिये सभी लेक्चर, डेमोंस्ट्रेशन और फील्ड एक्सरसाइज में ड्रोन के इस्तेमाल को शामिल किया, जिसके परिणामस्वरुप ये सभी युवा अनुशासित, मानसिक रूप से सशक्त तथा जांबाज सैनिकों में परिवर्तित हुए। ये अग्निवीर अब विभिन्न सक्रिय परिचालन इकाइयों में तैनात होकर देश की सीमाओं की रक्षा करेंगे।

इस परेड में अग्निवीरों के गर्वित परिजनों, वरिष्ठ सैनिकों एवं वाराणसी के गणमान्य व्यक्तियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। अग्निवीरों की एकसमान चाल, सटीक ड्रिल और अनुशासित प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जब परेड ने सलामी मंच के समक्ष आर्म्स प्रजेंट किया, तो वहां जोरदार तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। आत्मविश्वास से लबरेज, अनुशासित इन जवानों को देख परिजनों की आंखों में गर्व और खुशी के आंसू छलक पड़े।
प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले निम्नलिखित अग्निवीरों को पदकों से सम्मानित किया गया:
सर्वश्रेष्ठ सर्वांगीण प्रदर्शन अग्निवीर स्वास्तिक छेत्री
द्वितीय सर्वश्रेष्ठ सर्वांगीण प्रदर्शन अग्निवीर एरिक लिम्बु
फिजिकल में श्रेष्ठ अग्निवीर सुज्जल छेत्री
ड्रिल में श्रेष्ठ अग्निवीर रोनाल्ड राय
फायरिंग में श्रेष्ठ अग्निवीर कमल दुलाल
रणनीति में श्रेष्ठ अग्निवीर परिवेश छेत्री
यह आयोजन भारतीय सेना के इन नवोदित योद्धाओं की अदम्य साहस, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बनकर उभरा।








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