274 करोड़ का जसरा बाईपास सवालों के घेरे में
करोड़ों की परियोजना कुछ महीनों में धंसने लगी, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

प्रयागराज। महाकुंभ 2025 के मद्देनजर श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही और क्षेत्र के विकास के उद्देश्य से प्रयागराज के जसरा बाईपास के निर्माण के लिए केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा लगभग 274 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई थी। इस परियोजना के लिए 912 किसानों ने अपनी भूमि भी दी, ताकि क्षेत्र के विकास के साथ-साथ आम जनता और श्रद्धालुओं को बेहतर सड़क सुविधा मिल सके।
लेकिन अब बाईपास की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण पूरा होने के कुछ ही महीनों बाद सड़क के कई हिस्सों में धंसाव और दरारें दिखाई देने लगी हैं। लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी लागत से बनी सड़क का इतनी जल्दी खराब होना निर्माण कार्य की गुणवत्ता और संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि सरकार की मंशा प्रदेश और देश का समग्र विकास करना है, लेकिन कुछ विभागीय अधिकारी, ठेकेदार और निर्माण एजेंसियों की लापरवाही सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। यदि निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यदि निर्माण में भ्रष्टाचार या गुणवत्ता में लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए ऐसी परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है।








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