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योगी सरकार का सबसे बड़ा एक्शन , नकली दवा माफिया का बड़ा नेटवर्क बेनकाब

UP News: योगी सरकार का नकली दवा माफिया पर सबसे बड़ा प्रहार, आगरा में ₹3.63 करोड़ की दवाएं जब्त, 58 लाइसेंस रद्द

लखनऊ/आगरा, 11 जुलाई। उत्तर प्रदेश में नकली और अवैध दवा कारोबार के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चल रहे अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने आगरा में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के नेतृत्व में 15 ड्रग इंस्पेक्टरों की विशेष टीमों ने एक साथ 13 दवा फर्मों पर छापेमारी कर करोड़ों रुपये के कथित दवा सिंडिकेट का खुलासा किया।

कार्रवाई के दौरान सरकारी अस्पतालों की जीवनरक्षक दवाओं की कथित कालाबाजारी, नकली दवाओं की बिक्री, फर्जी बिलिंग, री-लेबलिंग और अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े मामलों का खुलासा हुआ। एफएसडीए ने 14 संचालकों के खिलाफ तीन नई एफआईआर दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है। इसके साथ ही पूरे अभियान में दर्ज मुकदमों की संख्या 9 हो गई है।

13 दवा फर्मों पर एक साथ छापेमारी

एफएसडीए की टीम ने आगरा के कम्बूटोला, मुबारक महल, जूता बाजार, कृष्णा कॉम्प्लेक्स, नवबिया मार्केट और कोतवाली क्षेत्र में स्थित 13 दवा प्रतिष्ठानों पर एक साथ कार्रवाई की। इनमें मोहन ट्रेडर्स, मनी मेडिकल, नीलकंठ, वंश फार्मा, प्रशांत मेडिकल, पोरवाल मेडकेयर, एपी फार्मा, एचएमजी ड्रग हाउस, डॉली ड्रग हाउस, मनु फार्मा, आरडीएम फार्मास्यूटिकल्स, इनाया फार्मा और नूर फार्मा शामिल हैं।

कार्रवाई के दौरान दो प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया, जबकि कई अन्य पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई। जांच के लिए 35 संदिग्ध दवा नमूने भी प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

नकली दवाओं का अंतरराज्यीय नेटवर्क उजागर

एफएसडीए के अनुसार जांच की शुरुआत एक प्रमुख दवा कंपनी की शिकायत से हुई थी। जांच के दौरान कथित तौर पर फर्जी खरीद बिल, नकली दवाओं की सप्लाई और कई राज्यों तक फैले नेटवर्क का खुलासा हुआ। अधिकारियों का दावा है कि कुछ दवाओं की गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी, जबकि कुछ दवाओं को नकली पाया गया।

जांच में कई दवा एजेंसियों और व्यापारियों के नाम सामने आए हैं, जिनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

सरकारी अस्पतालों की दवाओं की री-लेबलिंग का आरोप

एफएसडीए की जांच में यह भी सामने आया कि सरकारी और अस्पतालों के लिए निर्धारित दवाओं पर लगे “Not for Sale” लेबल हटाकर उन्हें नए लेबल और नई एमआरपी के साथ बाजार में बेचे जाने का आरोप है। जांच में फर्जी बिलिंग, बिना बिल दवा खरीदने और री-लेबलिंग के कई मामले भी सामने आए हैं।

₹3.63 करोड़ की दवाएं जब्त, 58 लाइसेंस निरस्त

एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि मई 2026 से चल रहे विशेष अभियान के दौरान अब तक ₹3.63 करोड़ से अधिक मूल्य की कथित नकली, अवैध तथा सरकारी आपूर्ति की दवाएं जब्त की जा चुकी हैं। विभाग ने कार्रवाई करते हुए 58 थोक दवा लाइसेंस निरस्त या निलंबित किए हैं।

उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल छापेमारी करना नहीं, बल्कि पूरे आर्थिक और आपराधिक नेटवर्क को ध्वस्त करना है।

अवैध वसूली की शिकायतों की भी होगी जांच

एफएसडीए ने बताया कि कुछ दवा व्यापारियों से ड्रग एसोसिएशनों द्वारा कथित अवैध वसूली की शिकायतें भी मिली हैं। आयुक्त ने निर्देश दिए हैं कि यदि जांच में आर्थिक शोषण की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ उगाही (Extortion) का मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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Author: Liveupweb

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