पीडीए गठबंधन में फूट, महापौर की सियासी सूझबूझ से भाजपा ने कार्यकारिणी चुनाव में झटकीं पांच सीटें
- गहमागहमी के बीच नगर निगम कार्यकारिणी के छह पदों के लिए हुआ चुनाव, कांग्रेस की जिद से मतदान की आई नौबत और सपा को हुआ एक सीट का नुकसान
-प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस के रवैये से पीडीए गठबंधन का सपना हुआ चकनाचूर, चुनाव में रिकार्ड 95.53 प्रतिशत मतदाताओं ने किया मतदान
-राज्यमंत्री व विधायकों समेत कई दिग्गजों ने किया मताधिकार का प्रयोग, वहीं शहर से बाहर होने के कारण पीएम मोदी समेत पांच मतदाता रहे गैरहाजिर
वाराणसी : गहमागहमी के बीच शुक्रवार को नगर निगम कार्यकारिणी समिति के रिक्त छह पदों के लिए हुए चुनाव में भारी उत्साह दिखा । इस प्रतिष्ठित चुनाव में विपक्षी खेमे के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) गठबंधन का सपना टूटता नजर आया। वहीं, महापौर अशोक कुमार तिवारी के कुशल नेतृत्व और सटीक रणनीतिक सूझबूझ के चलते भाजपा ने न केवल अपना दबदबा कायम रखा, बल्कि कार्यकारिणी में एक अतिरिक्त सीट की बढ़त भी हासिल कर ली। चुनाव में भाजपा के पांच और समाजवादी पार्टी (सपा) के एक सदस्य को निर्वाचित घोषित किया गया, जबकि कांग्रेस को कार्यकारिणी की दौड़ से पूरी तरह बाहर होना पड़ा। खास बात यह रही कि सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए महापौर ने कन्नौजिया समाज को कार्यकारिणी से जोड़ा।
नगर निगम कार्यकारिणी के 12 सदस्यों में से छह सदस्यों (जिनमें भाजपा के चार व सपा के दो सदस्य शामिल थे) का कार्यकाल 27 जून को समाप्त हो चुका था। इन्हीं रिक्त छह पदों के लिए महापौर की अध्यक्षता में मैदागिन स्थित टाउनहाल सभागार में सदन की बैठक बुलाई गई थी । अध्यक्ष की अनुमति से दोपहर 2:26 बजे चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई।
छह रिक्त पदों के सापेक्ष कुल आठ प्रत्याशियों ने अपना नामांकन दाखिल किया था। हालांकि विपक्षी एकजुट न होने के कारण समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अमरदेव ने अपना नामांकन वापस ले लिया। जब कि पहले सपा के दो सदस्यों का कार्यकारिणी में पहुंचना लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन, पेंच तब फंस गया जब कांग्रेस के पास एक भी सदस्य के लिए पर्याप्त बहुमत न होने के बावजूद उनके प्रत्याशी गुलशन अली (कमालपुरा वार्ड नं. 100) चुनाव मैदान में डटे रहे। कांग्रेस की इस जिद के कारण अंततः मतदान कराने की नौबत आ गई। इसका परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस को तो करारी पराजय का सामना करना ही पड़ा, साथ ही सपा को भी अपनी एक सुनिश्चित सीट गंवानी पड़ी। इस सियासी उलटफेर से भाजपा को सीधा फायदा मिला और उसने अपनी चार सीटों के बजाय पांच सीटों पर जीत दर्ज कर ली।

रिकार्ड 95.53 प्रतिशत हुआ मतदान
चुनाव अधिकारी व सहायक लेखा अधिकारी अयोध्या प्रसाद तिवारी के मुताबिक मतदान की प्रक्रिया दोपहर तीन बजे तक शुरू हुई। शाम 6.30 बजे तक कुल 112 मतदाताओं में से 107 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस प्रकार।चुनाव में रिकार्ड 95.53 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद मतगणना अधिकारी शशिकांत सिंह के नेतृत्व में मतगणना हुई । इस दौरान एक मत अवैध घोषित किए गए । मतगणना के तत्काल बाद चुनाव अधिकारी ने विजयी प्रत्याशियों के नामों की आधिकारिक घोषणा की गई। वहीं महापौर ने सेवानिवृत्त होने वाले छ्ह सदस्यों व निर्वाचित होने वाले छ्ह सदस्यों को सम्मानित किया । सदन की कार्रवाई बंदेमातरम व समापन राष्ट्रगान से हुआ ।
ये प्रत्याशी चुने गए कार्यकारिणी सदस्य:
भाजपा (5 सीटें):
बलराम कन्नौजिया (शिवपुर- वार्ड नं. 09)
इंद्रा रानी (शिवपुरवा- वार्ड नं. 10)
संदीप रघुवंशी (नरायनपुर- वार्ड नं. 31)
संजय केशरी (गोलादीनानाथ- वार्ड नं. 84)
नरसिंह दास (दशाश्वमेध- वार्ड नं. 96)
समाजवादी पार्टी (1 सीट):
गोविंद प्रसाद सिंह (पिसौर- वार्ड नं. 49)
दिग्गजों ने किया मतदान, पांच रहे गैरहाजिर
इस महत्वपूर्ण चुनाव में शहर के कई बड़े सियासी चेहरों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मतदान करने वालों में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल, राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा, रोहनिया विधायक डा. सुनील पटेल, शहर दक्षिणी विधायक डा. नीलकंठ तिवारी, कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव के साथ-साथ विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) धर्मेंद्र राय, अन्नपूर्णा सिंह और सपा एमएलसी आशुतोष सिन्हा प्रमुख रूप से शामिल रहे। दूसरी ओर, शहर से बाहर होने के कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मतदान में हिस्सा नहीं ले सके। उनके अलावा कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर, राज्यमंत्री डा. दयाशंकर मिश्र ‘दयालू’, सपा सांसद वीरेंद्र सिंह और निर्दल पार्षद अर्चना यादव भी चुनाव में गैरहाजिर रहे और इन्होनें मतदान प्रक्रिया में प्रतिभाग नहीं किया।
एकल संक्रमणीय पद्धति से हुआ चुनाव
कार्यकारिणी के चुनाव में मतदाताओं को वरियताक्रम में वोट देने का अधिकार होता है। वहीं मतदाता जिसे प्रथम वरीयता देते हैं I एकल संक्रमणीय पद्धति के तहत प्रथम वरीयता के वोट का मूल्य अधिक होता है । ऐसे में संदीप रघुवंशी को 17 तथा बलराम कन्नौजिया, इंद्रा रानी, संजय केशरी, नरसिंह दास व गोविंद प्रसाद सिंह के मत का मूल्य 16-16 रहा जब कि कांग्रेस के गुलशन अली के मत का मूत्य नौ रहा ।







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