वाराणसी पॉक्सो मेन (एक्सक्लूसिव) कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: बाल यौन शोषण और अश्लील सामग्री के मामले में सी.बी.आई. द्वारा गिरफ्तार अभियुक्त को शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक के लिए आजीवन कारावास।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) / अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, वाराणसी (श्री नितिन पाण्डेय) की अदालत ने बाल यौन शोषण सामग्री और दुष्कर्म के एक अत्यंत गंभीर मामले में अहम फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी को उसके शेष प्राकृतिक जीवनकाल तक के लिए आजीवन कारावास और भारी अर्थदंड की कठोरतम सजा सुनाई है। अदालत ने सी.बी.आई. (CBI) द्वारा विवेचित इस बहुचर्चित मामले (मु० अ० सं०- आर०सी०-15(एस)/2022/सी.बी.आई, एस.सी.-III/नई दिल्ली, विशेष सत्र परीक्षण संख्या – 1037/2022) में विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह द्वारा प्रस्तुत अकाट्य तर्कों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त रवि कुमार पटेल निवासी मढ़वाँ, लमही, थाना कैण्ट, वाराणसी को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376, 506, पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) की धारा 4, 6, 8, 10, 12, 14 एवं आई.टी. एक्ट (IT Act) की धारा 67-बी के तहत कसूरवार पाया।

विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह के अनुसार, यह मामला बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप में एकत्र करने और प्रसारित करने से संबंधित था। सी.बी.आई., नई दिल्ली को मिली एक भरोसेमंद खुफिया जानकारी के आधार पर 27 जून 2022 को अभियुक्त रवि कुमार पटेल के खिलाफ आई.टी. एक्ट की धारा 67-B के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। सी.बी.आई. के द्वारा की गई गहन विवेचना के दौरान परत-दर-परत तथ्य खुलते गए और यह बात सामने आई कि अभियुक्त न केवल बच्चों को स्पष्ट यौन गतिविधि में दिखाने वाली अश्लील सामग्री प्रसारित करने में शामिल था, बल्कि उसने जघन्य दुष्कर्म और डराने-धमकाने जैसे गंभीर अपराधों को भी अंजाम दिया था।
इस जघन्य और तकनीकी रूप से जटिल वारदात को न्यायालय के समक्ष साबित करने के लिए विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह की ओर से कुल 11 महत्वपूर्ण साक्षियों की गवाही कराई गई। इनमें स्वयं पीड़िता, पीड़िता की माँ, बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष, बैंक अधिकारी, सी.बी.आई. के विवेचक निरीक्षक रॉबिन सिंह, रिलायन्स जिओ के नोडल अधिकारी और फॉरेन्सिक साइन्स (गाँधीनगर) के विशेषज्ञ शामिल थे। गवाहों के सुदृढ़ बयानों, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल साक्ष्यों तथा अभियोजन प्रपत्रों ने इस अपराध को पूरी तरह से संदेह से परे साबित कर दिया।
न्यायालय ने अपने निर्णय में विशेष तौर पर यह टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में कठोर दण्ड दिया जाना न्यायोचित है, जिससे कि समाज में एक स्पष्ट संदेश जाए और साथ ही उन व्यक्तियों को भी कड़ा संदेश मिले जो इस तरह के जघन्य अपराधों में लिप्त हैं और जिनका अभी खुलासा नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने जिलाधिकारी को भी निर्देशित किया कि बच्चों को लैंगिक अपराध से बचने के बाबत विद्यालय और सामाजिक स्तर पर जागरूक करने के लिए एक कार्य योजना सुनिश्चित की जाए।
विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह की इसी प्रभावी पैरवी और न्यायालय के सख्त रुख के फलस्वरूप अभियुक्त रवि कुमार पटेल को पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत शेष प्राकृतिक जीवनकाल के लिए आजीवन कारावास एवं 1,00,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। इसके साथ ही, धारा 4 के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास (50,000 रुपये अर्थदंड), पॉक्सो की अन्य धाराओं व आई.टी. एक्ट के तहत कठोर कारावास तथा IPC की धारा 506 के तहत 6 माह की सजा सुनाई गई। सभी सजायें साथ-साथ चलेंगी। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि जमा किए गए कुल अर्थदंड 2,80,000 रुपये का 70 प्रतिशत हिस्सा बतौर प्रतिकर पीड़िता को दिया जाएगा, ताकि इस धनराशि से उसकी उच्च शिक्षा में सहायता की जा सके और वह इस घटना के मानसिक आघात से उबर सके।








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