जिन्होंने रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं, वही साधु-संतों और श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को कर रहे बदनाम: सीएम योगी
चढ़ावा प्रकरण में किसी साधु-संत की संलिप्तता नहीं मिली, लेकिन विपक्ष भ्रामक तथ्यों से कर रहा सनातन पर प्रहार: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने उठाया सवाल- प्रभु श्रीराम व श्रीकृष्ण के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगाने वाले किस मुंह से करते हैं अयोध्या व आस्था की बात?
संवैधानिक संस्थाओं व सनातन का अपमान करना शौक है सपा व कांग्रेस पार्टी का: सीएम योगी
सीएम ने कहा- सपा विधायकों ने अध्यक्ष पीठ की अवमानना की, वे जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा नहीं करना चाहते
जिस पार्टी का मुख्य उद्देश्य ‘हल्ला बोल’ हो, वह लोकतांत्रिक कैसे कही जा सकती है: सीएम योगी
सदन की कार्यवाही का विरोध करना, प्लेकार्ड लहराना, अध्यक्ष पीठ की अवमानना अत्यंत निंदनीय और शर्मनाक

लखनऊ, 4 अगस्त। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर चढ़ावा प्रकरण और सदन में विपक्ष के हंगामे को लेकर समाजवादी पार्टी व कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। मंगलवार को विधानसभा भवन के पोर्टिको में पत्रकारों से वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं, भगवान श्रीराम व श्रीकृष्ण के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर उन्हें मिथक बताया, वे आज अयोध्या और आस्था की बात कर रहे हैं! श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे से जुड़े मामले की जांच में किसी भी साधु-संत की संलिप्तता नहीं मिली है। इसके बावजूद विपक्ष तथ्यों को तोड़-मरोड़कर सनातन, अयोध्या धाम और मंदिर को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। सीएम ने सदन में अध्यक्ष पीठ की अवमानना, प्लेकार्ड लहराकर कार्यवाही बाधित करने, मार्शलों से धक्का-मुक्की करने और संवैधानिक संस्थाओं का लगातार अपमान करने पर समाजवादी पार्टी को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि विपक्ष जनहित के मुद्दों पर चर्चा से बचता है। विपक्ष केवल भ्रम फैलाने और उत्तर प्रदेश की सकारात्मक छवि को नुकसान पहुंचाने की राजनीति कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहले से तय है कि जो मुद्दा किसी न्यायाधिकरण या आयोग के पास लंबित हो, उस मुद्दे पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती। लेकिन विशेष परिस्थितियों में, अगर विधानसभा अध्यक्ष यह समझते हैं कि इस चर्चा के कारण संबंधित जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आएगा, तो वह अनुमति दे सकते हैं। सपा नेताओं ने कार्य मंत्रणा समिति की बैठक और दलीय नेताओं की बैठक में भी आश्वस्त किया था कि वे जिन मुद्दों पर चर्चा करना चाहते हैं, नियम के अंतर्गत उसका नोटिस देंगे। संसदीय कार्य मंत्री ने स्वयं दोनों बैठकों में कहा था कि जो भी विषय अध्यक्ष पीठ द्वारा चर्चा के लिए स्वीकार किए जाएंगे, उन पर सत्ता पक्ष से तर्कपूर्ण तरीके से जवाब भी दिया जाएगा। इसके बावजूद यह जानते हुए कि श्रीराम जन्मभूमि से संबंधित यह मामला माननीय उच्चतम न्यायालय में लंबित है, समाजवादी पार्टी ने प्रकरण की गंभीरता को समझते हुए भी न केवल सदन की अवमानना की, बल्कि न्यायालय में लंबित पूरी प्रक्रिया को भी अपमानित करने का शर्मनाक प्रयास किया।







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