सावन की मल्हार पर झूमा आमोद आश्रम, “झूलैं राम जी हिंडोरा” कार्यशाला का समापन
अवधी लोकगीतों की सुरमयी यात्रा संपन्न, महिलाओं ने बांधा समां
लोकसंस्कृति के संरक्षण की मिसाल बनी सावनी सुर कार्यशाला

लखनऊ, 9 अगस्त। राजधानी के गोमती नगर स्थित संस्था आमोद आश्रम द्वारा आयोजित सावनी सुर की कार्यशाला “झूलैं राम जी हिंडोरा” का शनिवार को भव्य समापन हुआ। आश्रम परिसर में विगत 2 अगस्त से चल रही इस साप्ताहिक कार्यशाला में सावन मास की परंपरागत झूला गीतों, कजरी और लोकधुनों का प्रशिक्षण दिया गया, जिसने प्रतिभागियों को अवध की समृद्ध लोकसंस्कृति से रूबरू कराया।
कार्यशाला के प्रशिक्षक प्रसिद्ध अवधी लोकगायक श्री शिवपूजन शुक्ल रहे, जिन्होंने पूरे सप्ताह प्रतिभागियों को स्वर, ताल और भाव की बारीकियां सिखाईं। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्रीमती श्रद्धा मिश्रा उपस्थित रहीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं हमारी लोक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं और महिलाओं की इतनी उत्साहपूर्ण भागीदारी देखकर उन्हें विशेष प्रसन्नता हुई।
गुरु शिवपूजन शुक्ल ने भी इस अवसर पर प्रतिभागियों की लगन की सराहना करते हुए कहा कि मात्र एक सप्ताह में महिलाओं ने जिस तन्मयता से सावनी गीतों को आत्मसात किया, वह अवधी लोकसंगीत के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाता है।
कार्यक्रम में नगर की लगभग 50 महिलाओं ने सक्रिय प्रतिभाग किया और समापन अवसर पर सामूहिक रूप से सावनी गीतों व झूला गीतों की मनमोहक प्रस्तुति देकर सभी को भावविभोर कर दिया। एक प्रतिभागी ने कहा कि इस कार्यशाला ने उन्हें बचपन की सावन की यादें फिर से जीने का अवसर दिया। इस अवसर पर अनेक गणमान्य अतिथियों ने भी अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और आयोजकों को बधाई दी।
आमोद आश्रम की सचिव श्रीमती अनिता श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षक और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था भविष्य में भी लोक कला और संस्कृति के संरक्षण हेतु इस तरह के आयोजन निरंतर करती रहेगी।








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