चेतन उपाध्याय मुख्यमंत्री से मिलकर : पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986 के अंतर्गत साइलेंस जोन में बैंड, लाउडस्पीकर, डीजे और हार्न पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने की किया माँग।

मुख्यमंत्री से मिलकर चेतन उपाध्याय ने बताया गया कि हमारी संस्था ‘सत्या फाउंडेशन’ द्वारा ध्वनि प्रदूषण के विविध आयामी और कानूनी रोकथाम के प्रति जनता को जागरूक करने के लिए 10 फरवरी, 2008 से अभियान चलाया जा रहा है. उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा के कई विद्यालयों के अलावा तमाम जिलों की पुलिस लाइंस में ध्वनि प्रदूषण जागरूकता कार्यक्रम कराया जा चुका है. जनता की सुविधा के लिए सत्या फाउंडेशन द्वारा गुप्त शिकायत हेल्पलाइन का भी संचालन किया जाता है जिसकी सराहना तमाम बड़े अधिकारी और नेता भी कर चुके हैं. सत्या फाउंडेशन द्वारा केवल हिंदू ही नहीं मुसलमानों के ध्वनि प्रदूषण पर भी कई बार शिकायत और कानूनी कार्रवाई हुई है. आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के साथ भी इस संदर्भ में मुलाकात करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है. हमारे कार्यों की गूंज हारवर्ड विश्वविद्यालय में भी हो चुकी है. सभी धर्म के गुरुओं और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन तथा सभी प्रकार के मीडिया के सहयोग से सभी प्रकार के शोर के खिलाफ, समाज को जगाने में लगातार लगे हुए हैं.
परम आदरणीय मुख्यमंत्री महोदय, भारत सरकार के पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1986 के मुताबिक, सभी प्रकार के स्कूल-कॉलेज, पूजा-इबादत स्थल, कोर्ट और अस्पताल को साइलेंस जोन में रखा गया है. शांत क्षेत्र में किसी भी प्रकार का शोर पूर्णत प्रतिबंधित है. दिन हो या रात- साइलेंस जोन में किसी भी प्रकार का बैंड बाजा, पटाखा, डीजे, लाउडस्पीकर और यहां तक कि स्कूटर का हॉर्न बजाना भी कानून की निगाह में अपराध है और दोषी को ₹100000 तक का जुर्माना या 5 साल तक की जेल या एक साथ दोनों सजा हो सकती है.
आपसे करबद्ध आग्रह है कि उक्त विषय में संबंधित अधिकारियों से विचार विमर्श करके पूरे उत्तर प्रदेश में साइलेंस जोन में स्थायी कानूनी चेतावनी बोर्ड और ऑडियो रिकॉर्डिंग से लैस सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं तथा अगले चरण में ध्वनि अपराधियों के खिलाफ त्वरित चालान/ अन्य कानूनी कार्रवाई की व्यवस्था को शीघ्र से शीघ्र शुरू किया जाए.







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