बीएचयू में एआई ड्रिवन मीडिया इकोसिस्टम पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ
वाराणसी, 21.08.2026। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंप्रेषण विभाग द्वारा “एआई ड्रिवन मीडिया इकोसिस्टम” पत्रकारिता, जनसंपर्क, विज्ञापन, डिजिटल संचार एवं ट्रांसफॉर्मिंग जर्नलिज्म, पब्लिक रिलेशन, एडवरटाइजिंग, डिजिटल कम्युनिकेशन एंड सस्टेनेबल मीडिया फ्यूचर्स” विषय पर तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का शुक्रवार को शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बदलते परिदृश्य में मीडिया, पत्रकारिता, जनसंपर्क, विज्ञापन एवं डिजिटल संचार के बदलते स्वरूप तथा इससे उत्पन्न संभावनाओं एवं चुनौतियों पर व्यापक विमर्श करना है।

कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारे सामने नई संभावनाएं लेकर आई है। तकनीक लगातार आगे बढ़ेगी, लेकिन यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि हमारी जड़ें और हमारी सांस्कृतिक परंपराएं भी इस विकास से जुड़ी रहें। प्रो. चतुर्वेदी ने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय में ऐसे अवसर और छोटे-छोटे प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम विकसित किए जाने चाहिए, जिनमें विभिन्न विषयों के विद्यार्थी अपने क्षेत्र के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं संचार को जोड़कर सीख सकें। उन्होंने कहा कि आईआईटी के विद्यार्थी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं प्रॉम्प्ट निर्माण सीख सकते हैं, चिकित्सा के विद्यार्थी स्वास्थ्य संचार और चिकित्सा पत्रकारिता को समझ सकते हैं तथा कला एवं साहित्य के विद्यार्थी अपनी रचनात्मकता को डिजिटल माध्यमों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ सकते हैं। विज्ञान और मीडिया के विद्यार्थियों के बीच भी संवाद बढ़ना चाहिए, ताकि वैज्ञानिक विषयों को आम लोगों तक सरल और प्रभावी भाषा में पहुंचाया जा सके।

प्रो. उपेंद्र अयोध्या, जगरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन के निदेशक एवं लखनऊ प्रेस क्लब के अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मीडिया के बदलते स्वरूप को समझना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को शोध रिपोर्टों एवं आंकड़ों का अध्ययन करने तथा प्रत्येक सूचना को सत्यापित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मीडिया अब केवल प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल माध्यम तक सीमित नहीं है, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्मार्टफोन, एल्गोरिदम, डिजिटल मंच, कंटेंट क्रिएटर, दर्शक और आंकड़े भी इसकी महत्वपूर्ण कड़ियां बन चुके हैं।

प्रो. सुषमा घिल्डियाल, कला संकाय की संकाय प्रमुख ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में प्रवेश कर चुकी है। ऐसे समय में विद्यार्थियों को तकनीक के उपयोग के साथ अपनी भाषा, अभिव्यक्ति और संचार क्षमता को भी मजबूत बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता एवं जनसंचार के विद्यार्थियों की जिम्मेदारी विशेष रूप से बढ़ गई है, क्योंकि उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में संचार को सही, जिम्मेदार और रचनात्मक दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है।उन्होंने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का एक मजबूत स्तंभ है और इसका उपयोग समाज को सशक्त बनाने के लिए किया जाना चाहिए।
प्रो. दुर्गेश त्रिपाठी, इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के डीन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग और उससे जुड़े प्रश्नों पर गंभीर एवं व्यापक विमर्श की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि काशी की अपनी विशिष्ट संस्कृति और पहचान है तथा यहां संस्कृति, परंपरा और आधुनिकता का अनूठा मेल दिखाई देता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक के साथ-साथ काशी की सांस्कृतिक एवं मानवीय संवेदना को भी विमर्श का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
प्रो. संजीव भानावत, मुख्य कार्यकारी संपादक, कम्युनिकेशन टुडे ने कहा कि बदलते समय में काशी की विशिष्टता और पहचान को सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की व्यापक शैक्षणिक दृष्टि का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कल्पना केवल किसी एक प्रकार की शिक्षा तक सीमित नहीं थी। वे चाहते थे कि विश्वविद्यालय से ऐसे विद्यार्थी निकलें, जो ज्ञान, चरित्र और सेवा के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र का मार्गदर्शन कर सकें।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित फोटोग्राफी सत्र में प्रतिभाग करने वाले विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। फोटोग्राफी सत्र के माध्यम से विद्यार्थियों को रचनात्मक अभिव्यक्ति, दृश्य संचार और डिजिटल माध्यमों की संभावनाओं को समझने का अवसर मिला। कार्यक्रम में पत्रकारिता एवं जनसंप्रेषण विभाग के शिक्षकगण एवं संकाय सदस्य प्रो. अनुराग दवे, डॉ. नेहा पांडेय, डॉ. बाला लखेंद्र, डॉ. ज्ञान प्रकाश मिश्र, डॉ. धीरेंद्र कुमार राय उपस्थित रहे।
संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में देश-विदेश के विशेषज्ञों की सहभागिता हो रही है। इनमें नेपाल की राष्ट्रीय दैनिक अन्नपूर्णा पोस्ट की उप-संपादक सुश्री अजाबी पौड्याल, त्रिभुवन विश्वविद्यालय, काठमांडू के प्रो. कुन्दन आर्याल, आईआईएमटी भुवनेश्वर के संस्थापक निदेशक प्रो. श्रीकांत पटनायक, हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. बृज किशोर कुठियाला, इंडिया हैबिटेट सेंटर के निदेशक प्रो. के.जी. सुरेश, मैसूर विश्वविद्यालय की प्रो. निरंजना वनल्ली, नेपाल के डॉ. संतोष शाह तथा श्रीलंका की डॉ. रसांगी नानायक्कर सहित अनेक विशेषज्ञ शामिल हैं।
संगोष्ठी के आगामी तकनीकी सत्रों में प्रो. अनुराग दवे, डॉ. ज्ञान प्रकाश मिश्र, डॉ. नेहा पांडेय, प्रो. शोभना नेर्लीकर, डॉ. प्रियंका कटारिया, प्रो. उमा शंकर पांडेय, डॉ. मनोहर लाल, प्रो. नंदा पवार, प्रो. फ्रांसेस्को विग्लियारोलो, प्रो. संगीता टी. सहित विभिन्न विशेषज्ञों एवं संकाय सदस्यों की सहभागिता रहेगी। इन सत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के पत्रकारिता, विज्ञापन, जनसंपर्क, डिजिटल मीडिया और संचार पर प्रभाव तथा बदलते मीडिया परिदृश्य से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाएगी।








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