एफएलएन प्रशिक्षण के दूसरे दिन व्यावहारिक गतिविधियों पर रहा जोर
शिक्षक संदर्शिका के उन्मुखीकरण के साथ खुले छोर के प्रश्नों और रिमीडियल शिक्षण पर हुई चर्चा
नौगढ़ (चंदौली)। विकासखंड नौगढ़ स्थित बीआरसी सभागार में शैक्षिक सत्र 2026-27 के तहत चल रहे पांच दिवसीय एफएलएन शिक्षक प्रशिक्षण के दूसरे दिन मंगलवार को शिक्षकों को बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान को प्रभावी बनाने की व्यावहारिक रणनीतियों से रूबरू कराया गया। प्रशिक्षण में गतिविधियों, केस स्टडी, शिक्षक संदर्शिका के उन्मुखीकरण और समूह प्रस्तुतीकरण के माध्यम से कक्षा-कक्ष में सीखने को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
प्रशिक्षण की शुरुआत पहले दिन की प्रमुख सीखों के पुनरावलोकन से हुई। इसके बाद नई शिक्षक संदर्शिका में किए गए महत्वपूर्ण बदलावों की जानकारी दी गई। शिक्षकों ने तीन कालांश, मिनी लेसन की संरचना, चरणबद्ध प्रक्रिया और कलर कोडिंग के माध्यम से संदर्शिका के प्रभावी उपयोग का अभ्यास किया।
प्रशिक्षण के दौरान खुले छोर वाले प्रश्नों के महत्व पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि ऐसे प्रश्न बच्चों में तार्किक सोच, कल्पनाशीलता, अभिव्यक्ति और मौलिक चिंतन को विकसित करने में सहायक होते हैं। केस स्टडी के माध्यम से शिक्षकों ने ऐसे प्रश्नों की पहचान और कक्षा में उनका प्रयोग करना सीखा।
इसके अलावा समझ के साथ पढ़ने, आदर्श पठन, मार्गदर्शित पठन और स्वतंत्र पठन की प्रक्रियाओं पर गतिविधियों के माध्यम से अभ्यास कराया गया। बच्चों को केवल ब्लैकबोर्ड से नकल कराने के बजाय उनके अनुभवों, विचारों और कल्पनाओं को स्वतंत्र रूप से लिखने के अवसर देने पर विशेष बल दिया गया।
अंतिम सत्र में साप्ताहिक आकलन ट्रैकर, सीखने में अपेक्षित प्रगति न करने वाले बच्चों के लिए रिमीडियल शिक्षण तथा विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी गई। प्रश्नोत्तरी के माध्यम से दिनभर की प्रमुख अवधारणाओं का समेकन किया गया। प्रशिक्षण में शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए सीखी गई रणनीतियों को विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू करने का संकल्प लिया। इस अवसर पर एआरपी संजीव सिंह, अशोक कुमार, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर सुशील सिंह व संदर्भदाता संजय राम उपस्थित थे।








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