एफएलएन प्रशिक्षण में शिक्षकों को मिला गतिविधि आधारित शिक्षण का प्रशिक्षण
बच्चों की बुनियादी साक्षरता व संख्यात्मक ज्ञान मजबूत करने के लिए कक्षा-कक्ष में नवाचार पर जोर
नौगढ़। बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत बनाने और उनमें बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान विकसित करने के उद्देश्य से चल रहे पांच दिवसीय एफएलएन (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी) प्रशिक्षण का शुक्रवार को समापन हुआ। प्रशिक्षण के अंतिम दिन शिक्षकों को प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई शिक्षण विधियों, गतिविधियों और तकनीकों को विद्यालयों में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रेरित किया गया। समापन सत्र में शिक्षकों से कहा गया कि प्रशिक्षण में मिली जानकारी केवल प्रशिक्षण कक्ष तक सीमित न रहे, बल्कि उसका सीधा लाभ विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को मिलना चाहिए।
खंड शिक्षा अधिकारी लालमणि राम ने कहा कि प्रारंभिक कक्षाएं बच्चों के शैक्षिक जीवन की मजबूत नींव तैयार करने का महत्वपूर्ण चरण होती हैं। इस स्तर पर बच्चों को पढ़ने, लिखने और गणित की बुनियादी समझ यदि प्रभावी ढंग से विकसित हो जाए तो आगे की कक्षाओं में उनके लिए विषयों को समझना आसान हो जाता है। इसलिए शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों के सीखने के स्तर को समझते हुए शिक्षण प्रक्रिया को सरल, सहज, रुचिकर और प्रभावी बनाएं।
उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल किताबों और पाठ्यक्रम तक सीमित रखकर शिक्षा देने के बजाय उन्हें गतिविधियों के माध्यम से सीखने के अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। कहानी, खेल, संवाद, चित्र, अभ्यास, समूह गतिविधि और अन्य बाल केंद्रित विधियों का प्रयोग कर बच्चों को पढ़ाई से जोड़ा जा सकता है। इससे बच्चों में सीखने के प्रति रुचि बढ़ने के साथ उनकी समझ और अभिव्यक्ति की क्षमता का भी विकास होगा।
खंड शिक्षा अधिकारी ने शिक्षकों को निर्देशित किया कि एफएलएन प्रशिक्षण के दौरान बताई गई गतिविधियों को विद्यालयों में नियमित रूप से प्रयोग में लाया जाए। प्रत्येक बच्चे की सीखने की क्षमता अलग होती है, इसलिए शिक्षक बच्चों की रुचि, क्षमता और सीखने के स्तर के अनुसार शिक्षण की रणनीति तैयार करें। कमजोर बच्चों पर विशेष ध्यान देते हुए उन्हें अतिरिक्त अभ्यास और सीखने के अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
उन्होंने कहा कि बुनियादी साक्षरता के अंतर्गत बच्चों में पढ़ने और लिखने की क्षमता के साथ शब्दों और वाक्यों को समझने की दक्षता विकसित करना जरूरी है। इसी प्रकार संख्यात्मक ज्ञान के माध्यम से बच्चों में संख्या पहचान, गिनती, जोड़-घटाव और दैनिक जीवन से जुड़ी गणितीय अवधारणाओं की समझ विकसित की जानी चाहिए। इसके लिए कक्षा में बच्चों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक है।
समापन सत्र में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे शिक्षकों ने भी अपने अनुभव साझा किए। शिक्षकों ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बच्चों को सरल और रोचक तरीके से पढ़ाने की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी मिली। इन गतिविधियों को विद्यालय में लागू करने से बच्चों को विषयों को समझने में आसानी होगी और कक्षा में उनकी सहभागिता भी बढ़ेगी।
शिक्षकों ने कहा कि गतिविधि आधारित शिक्षण बच्चों को केवल सुनने के बजाय स्वयं करके सीखने का अवसर देता है। इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे बिना झिझक अपनी बात रखने के लिए प्रेरित होते हैं। शिक्षकों ने प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को विद्यालय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने का भरोसा दिलाया।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को बच्चों के सीखने के स्तर का आकलन करने, उनकी आवश्यकताओं को समझने तथा उसी के अनुरूप शिक्षण गतिविधियों को संचालित करने की जानकारी भी दी गई। साथ ही कक्षा में ऐसा वातावरण तैयार करने पर जोर दिया गया, जहां बच्चे बिना किसी दबाव के प्रश्न पूछ सकें और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान कर सकें।
- समापन अवसर पर एआरपी संजीव सिंह, पूर्व एआरपी संजय राम, रिंकू यादव समेत अन्य शिक्षक एवं प्रशिक्षण से जुड़े लोग उपस्थित रहे। अधिकारियों ने शिक्षकों से आह्वान किया कि एफएलएन के उद्देश्यों को विद्यालय स्तर पर पूरी गंभीरता के साथ लागू करते हुए बच्चों की बुनियादी दक्षताओं को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाएं। प्रशिक्षण के समापन के साथ शिक्षकों को यह संदेश दिया गया कि प्रारंभिक स्तर पर बच्चों की मजबूत शैक्षिक नींव तैयार करना ही उनकी आगे की सफलता का आधार बनेगा।








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