
पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वे समाज और लोगों की सेवा के लिए पूरी तरह तत्पर हैं। उनके चुनाव प्रचार का मुख्य केंद्र शिक्षा, शिक्षक और नौजवानों के अधिकार होंगे:
वित्तविहीन शिक्षकों को आजीविका के लिए सम्मानजनक मानदेय मिले, पुरानी पेंशन योजना बहाल हो, और नौजवानों को रोजगार मिले जब तक रोजगार नहीं, तब तक बेरोजगारी भत्ता मिले इन सभी मुद्दों पर हमारा विशेष फोकस रहेगा।
उन्होंने आगे कहा कि सिटीजन चार्टर एक्ट लागू हो चुका है, इसलिए हर समस्या का समाधान समयबद्ध ढंग से होना चाहिए। गुरुजी हफ्ता और निःशुल्क शिक्षा के साथ-साथ शिक्षकों के मानदेय में व्याप्त असमानता को दूर करने के लिए भी पुरजोर आवाज उठाई जाएगी।
निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जनता के बीच
सदन में अपनी भूमिका को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी के दबाव में नहीं आएंगे और न ही किसी पार्टी विशेष के झंडे तले हैं। वे अपने सर्विस पीरियड के नियमों, कानूनों और रेगुलेशन के तहत जनता की आवाज उठाएंगे। उन्होंने मतदाताओं से अपील की है कि वे किसी राजनीतिक दल के बहकावे में आने के बजाय एक स्वतंत्र प्रत्याशी का समर्थन करें और अपनी स्वतंत्रता का लाभ लें।








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