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शबरी के प्रेम के वशीभूत हुए प्रभु श्रीराम, भक्त-भगवान का मिलन देख छलकीं आंखें रामलीला में जीवंत हुआ शबरी मिलन का भावपूर्ण प्रसंग, वर्षों की प्रतीक्षा के बाद राम-लक्ष्मण को कुटिया में देख भावविभोर हुईं माता शबरी प्रेम और श्रद्धा से अर्पित किए बेर, सजीव मंचन ने दर्शकों को किया भावुक; जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा रामलीला परिसर वाराणसी।

शबरी के प्रेम के वशीभूत हुए प्रभु श्रीराम, भक्त-भगवान का मिलन देख छलकीं आंखें

रामलीला में जीवंत हुआ शबरी मिलन का भावपूर्ण प्रसंग, वर्षों की प्रतीक्षा के बाद राम-लक्ष्मण को कुटिया में देख भावविभोर हुईं माता शबरी

प्रेम और श्रद्धा से अर्पित किए बेर, सजीव मंचन ने दर्शकों को किया भावुक; जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा रामलीला परिसर

वाराणसी। वर्षों की प्रतीक्षा, आंखों में प्रभु के दर्शन की आस और हृदय में अटूट विश्वास। जब भगवान श्रीराम अनुज लक्ष्मण के साथ माता शबरी की कुटिया पहुंचे तो मानो उनकी वर्षों की साधना सफल हो गई। अपने आराध्य को सामने पाकर शबरी भावविभोर हो उठीं। भक्त और भगवान के इस अनुपम मिलन को मंच पर सजीव होते देख दर्शक भी भावनाओं में बह गए। किसी की आंखें नम हुईं तो कोई हाथ जोड़कर प्रभु श्रीराम का जयकारा लगाने लगा।

जन चेतना समिति गंगापुर की ओर से आयोजित रामलीला में शबरी मिलन के प्रसंग का भावपूर्ण मंचन श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों से रामायण के इस प्रसंग को इस तरह प्रस्तुत किया कि पूरा रामलीला परिसर कुछ देर के लिए भक्तिरस में डूब गया।

वर्षों की साधना हुई सफल

मंचन में दिखाया गया कि माता शबरी वर्षों से भगवान श्रीराम के आगमन की प्रतीक्षा कर रही थीं। उन्हें विश्वास था कि एक दिन प्रभु उनकी कुटिया में अवश्य आएंगे। इसी विश्वास के सहारे वह प्रतिदिन प्रभु की राह निहारती रहीं। आखिर वह शुभ घड़ी आई, जब वन में माता सीता की खोज करते हुए भगवान श्रीराम अपने अनुज लक्ष्मण के साथ उनकी कुटिया पहुंचे।

श्रीराम को सामने देखकर शबरी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वर्षों से जिस क्षण की प्रतीक्षा थी, उसे साकार होता देख वह भावविभोर हो गईं। मंच पर शबरी की भक्ति और प्रभु के प्रति उनके समर्पण को कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

प्रेम से अर्पित किए बेर, भावुक हुए श्रद्धालु

माता शबरी ने प्रभु श्रीराम का प्रेम और श्रद्धा के साथ स्वागत किया तथा उन्हें बेर अर्पित किए। भगवान श्रीराम ने भी भक्त के निश्छल प्रेम और श्रद्धा को स्वीकार किया। भक्त और भगवान के बीच प्रेम से भरे इस दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया।

मंच पर जैसे-जैसे शबरी मिलन का प्रसंग आगे बढ़ता गया, दर्शक उससे जुड़ते चले गए। भगवान श्रीराम और माता शबरी की भूमिका निभा रहे कलाकारों के अभिनय और संवादों ने दृश्य को और प्रभावशाली बना दिया। भावपूर्ण प्रसंग के दौरान कई श्रद्धालु हाथ जोड़कर मंच की ओर निहारते रहे।

जय श्रीराम के जयकारों से गूंजा परिसर

शबरी के प्रेम और प्रभु श्रीराम की भक्तवत्सलता का दृश्य देखकर रामलीला परिसर में मौजूद श्रद्धालु उत्साहित हो उठे। चारों ओर से ‘जय श्रीराम’ के जयकारे गूंजने लगे। भक्तिमय वातावरण के बीच दर्शकों ने कलाकारों के अभिनय की सराहना की। मंचन के दौरान रामायण का यह प्रसंग श्रद्धा और भक्ति के साथ जीवंत होता दिखाई दिया।

सच्ची भक्ति में नहीं होता भेदभाव

शबरी मिलन के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भक्ति और समानता का संदेश भी दिया। मंचन के माध्यम से बताया गया कि ईश्वर के लिए किसी व्यक्ति की जाति, पद या संपन्नता से अधिक महत्वपूर्ण उसका प्रेम, विश्वास और समर्पण है। भक्त यदि निर्मल मन से भगवान को पुकारता है तो उसकी श्रद्धा ही सबसे बड़ी भेंट बन जाती है।

माता शबरी का चरित्र इसी अटूट विश्वास और निष्काम भक्ति का प्रतीक है। वर्षों तक प्रभु की प्रतीक्षा और उनके आगमन पर निश्छल भाव से की गई सेवा ने दर्शकों को प्रेम, धैर्य और समर्पण की सीख दी।

रामलीला में शबरी मिलन का मंचन समाप्त होने के बाद भी श्रद्धालुओं पर इस भावपूर्ण प्रसंग का असर दिखाई दिया। भक्त और भगवान के मिलन की इस लीला ने जहां दर्शकों को भावविभोर किया, वहीं यह संदेश भी दिया कि सच्चे मन से की गई भक्ति और प्रेम के आगे भगवान भी भक्त के वशीभूत हो जाते हैं।

Varsha Kesari
Author: Varsha Kesari

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