यूपीपीएससी में इतिहास: सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने किया स्वामी विवेकानन्द की विशाल प्रतिमा का अनावरण, ‘आदित्य पतंजलि योगपीठम्’ का भव्य उद्घाटन

* “ चयन की वेदी पर व्यक्तिगत पहचान नहीं, केवल पात्रता की गूँज को मान्यता मिले” – न्यायमूर्ति विक्रम नाथ
* आयोग के इतिहास में पहली बार परिसर पहुंचे देश की शीर्ष अदालत के कोई सेवारत न्यायमूर्ति
* न्यायपालिका और चयन संस्थाओं की आत्मा एक, दोनों का मूल तत्व ‘लोक विश्वास’: अध्यक्ष संजय श्रीनेत
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) के इतिहास में एक अविस्मरणीय और गौरवशाली अध्याय जुड़ गया है। आयोग परिसर में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति श्री विक्रम नाथ जी का भव्य आगमन हुआ। आयोग के पूरे इतिहास में यह पहला मौका है जब देश की शीर्ष अदालत के किसी सेवारत न्यायमूर्ति ने परिसर का आधिकारिक दौरा किया है।
इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान न्यायमूर्ति श्री विक्रम नाथ जी ने परिसर में नवनिर्मित ‘आदित्य पतंजलि योगपीठम्’ का भव्य उद्घाटन किया और वहाँ स्थापित ‘स्वामी विवेकानन्द जी की विशाल प्रतिमा’ का अनावरण किया। योग और आध्यात्मिक प्रेरणा के एक जीवंत केंद्र के रूप में विकसित इस स्थल पर सूर्य नमस्कार की विभिन्न भंगिमाओं को दर्शाया गया है। साथ ही, भारत के नोबेल पुरस्कार विजेताओं के गौरवपूर्ण योगदान को भी यहाँ प्रदर्शित किया गया है, जो युवाओं में राष्ट्र के बौद्धिक वैभव की अलख जगाएगा।
न्यायालय में साक्ष्य और भर्ती में केवल पात्रता बोलती है: न्यायमूर्ति विक्रम नाथ
माननीय न्यायमूर्ति श्री विक्रम नाथ जी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में आयोग से जुड़ी अपनी अतीत की स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने ‘कल्पवृक्ष संग्रहालय’ की बनावट, उसमें संग्रहीत कृतियों की कलात्मकता, आयोग के हरे-भरे परिसर और यहाँ की पारदर्शी चयन प्रणाली की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आयोग पूरी निष्पक्षता से अपना कार्य संपादित कर सके, इसके लिए भारतीय संविधान के अंतर्गत अनुच्छेद 315 से 323 तक व्यापक व सुदृढ़ प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि- “न्यायालय में प्रभाव या सत्ता नहीं, साक्ष्य और तर्क बोलते हैं। ठीक उसी प्रकार भर्ती में अनुग्रह या पहचान नहीं, केवल पात्रता (Merit) बोलती है। यह अकाट्य सत्य है कि न्याय का सिंहासन हो या चयन की वेदी, वहाँ किसी की व्यक्तिगत पहचान को नहीं, बल्कि केवल पात्रता की गूँज को मान्यता मिलनी चाहिए।”
आगे कहा कि आयोग महज परीक्षाओं का संचालन नहीं करते, बल्कि राष्ट्र के बेहतर भविष्य के लिए उत्कृष्ट लोकसेवकों का चयन करते हैं। आयोग द्वारा चयनित एक-एक प्रशासक का निर्णय दूरगामी होता है। इसीलिए, एक चयन केवल एक व्यक्ति का नियोजन नहीं है, बल्कि आगामी दशकों के सुशासन का बीजारोपण है। यही आयोग के कार्य की संप्रभु गंभीरता है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि निष्पक्ष होना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि निष्पक्षता दिखाई भी देनी चाहिए। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि यूपीपीएससी अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए देश भर में अपना एक उत्कृष्ट प्रतिमान स्थापित कर रहा है।
संविधान की एक आत्मा और लोक विश्वास
मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए यूपीपीएससी के अध्यक्ष श्री संजय श्रीनेत ने न्यायपालिका और चयन संस्थाओं के अंतर्संबंधों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा, “भले ही न्यायपालिका और चयन संस्थाओं के कार्यक्षेत्र (Jurisdiction) अलग हों, लेकिन हमारी वैधानिक आत्मा एक ही है-और दोनों का मूल तत्व लोक विश्वास (Public Trust) है। जहाँ न्यायालय नागरिकों को न्याय का कानूनी आश्वासन देता है, वहीं चयन संस्थाएँ उन्हें समान अवसर का संवैधानिक विश्वास देती हैं।”
आत्मबोध और सांस्कृतिक विरासत का संगम
* बोधि संगम का निरीक्षण: कार्यक्रम के दौरान माननीय न्यायमूर्ति ने ‘बोधि संगम’ का निरीक्षण किया। इसे अभ्यर्थियों के लिए एक प्रेरणादायी स्थल के रूप में तैयार किया गया है, जहाँ बैठकर वे अपनी सामाजिक यात्रा की शुरुआत से पहले आत्म-संवाद (Self-Dialogue) कर सकें।
* कल्पवृक्ष संग्रहालय का अवलोकन: उन्होंने ‘कल्पवृक्ष संग्रहालय’ का भी अवलोकन किया। वर्ष 1868 में ब्रिटिश कालीन क्लब से लेकर आयोग के स्टोर हाउस और अब ‘सांस्कृतिक विरासत व सकारात्मक ऊर्जा के केंद्र’ बने इस भवन का पूर्व में लोकसभा अध्यक्ष माननीय श्री ओम बिरला जी द्वारा उद्घाटन किया गया था।
* ‘हल्दीघाटी शौर्य स्थल’ पर संवाद: माननीय न्यायमूर्ति ने परिसर स्थित ‘हल्दीघाटी शौर्य स्थल’ का भी निरीक्षण किया और अधिकारियों व कर्मचारियों संग संवाद किया। दांडी मार्च की प्रतिकृति, स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियों तथा राष्ट्रीय प्रतीक ‘अशोक स्तंभ’ से सुसज्जित यह स्थल राष्ट्र गौरव का एक अद्भुत प्रतिमान है।
आधुनिक बुनियादी ढांचा और प्रतिभाओं का सम्मान
प्रशासनिक सुविधाओं को बढ़ाते हुए न्यायमूर्ति जी ने ‘वृंदावन ऑफिसर्स आवास’ के 12 नवनिर्मित आवासों का लोकार्पण किया और ‘आयोग के आधिकारिक कैलेंडर ‘ का विमोचन किया। इसके साथ ही, उत्कृष्ट सेवा देने वाले निम्नलिखित अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया:
* श्री ओंकारनाथ सिंह (अनुसचिव)
* श्री प्रेम चंद्र मौर्य (वरिष्ठ अनुसेवक)
* श्रीयुत श्रीनाथ (निजी सचिव)
* श्री प्रकाश चंद्र सिंह, श्री दिनेश प्रताप पाण्डेय, एवं श्री रमेश कुमार भारती (अनुभाग अधिकारी)
* श्री वीरेंद्र सिंह (समीक्षा अधिकारी)
* श्री फूल चंद्र (वरिष्ठ अनुसेवक)
कार्यक्रम के दौरान आयोग के माननीय सदस्य मेजर जनरल (डॉ०) मनोज कुमार ने आयोग की आधुनिक कार्यप्रणाली और पारदर्शी प्रक्रियाओं पर एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण (Presentation) दिया। अंत में, माननीय सदस्य डॉ० ए०के० वर्मा ने सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति श्री अशोक भूषण, माननीय उच्च न्यायालय के न्यायमूर्तिगण श्री राहुल चतुर्वेदी, श्री अजीत सिंह, श्री राजीव लोचन मेहरोत्रा व अन्य न्यायमूर्तिगण गरिमामयी रूप से उपस्थित रहे। इनके अतिरिक्त उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्तागण, अपर शासकीय महाधिवक्ता, आयोग के माननीय सदस्यगण, पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी एवं जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण तथा आयोग के अधिकारी व कर्मचारीगण भारी संख्या में उपस्थित रहे।







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