सनबीम भगवानपुर में TEDx यूथ: विचारों के “रिपल इफ़ेक्ट” की गूंज
वाराणसी, 28 अक्टूबर 2026: क्या एक विचार किसी राष्ट्र का भविष्य गढ़ सकता है? क्या एक निर्णय किसी का जीवन बदल सकता है? और क्या एक छोटा-सा कदम बदलाव की पूरी श्रृंखला को जन्म दे सकता है? इन्हीं संभावनाओं की पड़ताल करते हुए सनबीम भगवानपुर में “रिपल इफ़ेक्ट” विषय पर TEDx यूथ का भव्य आयोजन हुआ। विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों ने इसमें भाग लिया और युवाओं को वर्तमान से आगे सोचने तथा भविष्य गढ़ने की अपनी शक्ति पहचानने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सनबीम भगवानपुर के विद्यार्थियों की मनमोहक ऑर्केस्ट्रा प्रस्तुति से हुआ, जिसने विचारों, नवाचार और प्रभाव पर केंद्रित पूरे दिन के लिए प्रेरणादायी माहौल तैयार कर दिया।
श्री पद्म राज केशरी ने अपने वक्तव्य “इंडिया बाय डिज़ाइन 2030: अगली पीढ़ी के डिज़ाइनर क्या रचेंगे?” में युवाओं को रचनात्मकता और नवाचार के माध्यम से भारत के भविष्य की कल्पना करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवा स्वयं को आने वाले कल की संभावनाओं के सृजनकर्ता के रूप में देखें।
25 वर्षों से अधिक के बहु-क्षेत्रीय अनुभव वाली लीडरशिप तथा लर्निंग एंड डेवलपमेंट विशेषज्ञ सुश्री श्वेता खन्ना ने “चुनाव की शक्ति: समस्याओं से संभावनाओं तक” विषय पर अपने विचार रखे। संवाद कौशल, नेतृत्व विकास और शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तनकारी कार्य के अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने बताया कि हमारे निर्णय और दृष्टिकोण चुनौतियों को विकास के अवसरों में बदल सकते हैं।
जलने के उपचार (बर्न केयर) और कटे होंठ-तालू (क्लेफ्ट) की सर्जरी में व्यापक अनुभव रखने वाले जाने-माने प्लास्टिक सर्जन डॉ. सुबोध कुमार सिंह ने “एक्स्ट्रा माइल हेल्थ: दृढ़ता और जुनून की यात्रा” विषय पर प्रस्तुति दी। उनका कार्य करुणामय चिकित्सा और अटूट समर्पण की परिवर्तनकारी शक्ति को दर्शाता है। क्लेफ्ट सर्जरी में उनका योगदान चर्चित वृत्तचित्र “स्माइल पिंकी” से भी जुड़ा रहा है, जिसने ऐसे उपचारों के जीवन बदल देने वाले प्रभाव की ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया।
बीएएमएस के छात्र, कंटेंट क्रिएटर और व्यक्तित्व विकास के पैरोकार श्री कुशाग्र आर्य ने “रिपल इफ़ेक्ट: एक बदलाव से दूसरे बदलाव तक” विषय पर अपनी बात रखी। फिटनेस, पठन, ध्यान और आत्म-चिंतन में अपनी रुचि के माध्यम से उन्होंने समझाया कि रोज़मर्रा की आदतों में किए गए छोटे और निरंतर बदलाव बड़े परिवर्तनों की नींव रख सकते हैं।
रिसा आईवीएफ और निओस एंजेल्स के संस्थापक एवं सीईओ डॉ. सारथक बख्शी ने स्वास्थ्य क्षेत्र के उद्यमी और स्टार्टअप मेंटर के रूप में “हमारे पहले कदम से परे की लहरें” विषय पर संबोधन दिया। स्वास्थ्य नवाचार और उद्यमिता के संगम पर अपने कार्य के आधार पर उन्होंने बताया कि शुरुआत करने का एक निर्णय प्रारंभिक कदम से कहीं आगे तक संभावनाओं और प्रभाव के द्वार खोल सकता है।
डीपसाइट्स साइबर लैब्स के सह-संस्थापक एवं सीओओ श्री शुभम परीक ने “आप कभी नहीं जान पाएंगे कि आपने क्या शुरू किया” विषय पर अपने विचार साझा किए। साइबर सुरक्षा और डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में अपने अनुभव के आधार पर उन्होंने बताया कि हमारे कार्य और विचार लोगों तथा परिणामों को ऐसे ढंग से प्रभावित कर सकते हैं, जिसे उनके प्रवर्तक शायद कभी स्वयं न देख पाएं।
कार्यक्रम में संगीत का रंग भरते हुए विद्यालय के विद्यार्थियों ने जोशीले रॉक बैंड की प्रस्तुति दी, जिसमें उनकी प्रतिभा, टीम भावना और कलात्मक अभिव्यक्ति झलकी।

आयोजन का समापन अमन परदेशी और रुद्र हरवानी की मनोहारी संगीत प्रस्तुतियों के साथ हुआ। मुंबई के गायक, गिटारवादक और लाइव कलाकार अमन परदेशी 2,999 से अधिक प्रस्तुतियां दे चुके हैं। वे सुरीली आवाज़ और अकूस्टिक गिटार के साथ बॉलीवुड हिट्स, पुराने सदाबहार गीतों और इंडी संगीत का संगम प्रस्तुत करते हैं। वहीं बहु-वाद्य तालवादक और रिदम कलाकार रुद्र हरवानी 3,000 से अधिक लाइव शो कर चुके हैं। वे हैंडपैन, कहोन, जेम्बे और दरबुका सहित 20 से अधिक ताल वाद्यों के माध्यम से पारंपरिक लय को आधुनिक ध्वनियों से जोड़कर अनूठा संगीतमय अनुभव रचते हैं।
आयोजन को साकार करने वाली विद्यार्थी आयोजन समिति को विशेष रूप से सराहा गया, जिनकी दूरदृष्टि, समर्पण और सहयोग की भावना ने इस कार्यक्रम को सफल बनाया। उनका प्रयास कार्यक्रम के विषय को सार्थक करता है: जब व्यक्ति पहल करते हैं और मिलकर काम करते हैं, तो उनका सम्मिलित प्रभाव उनके अलग-अलग योगदान के योग से कहीं बड़ा होता है।
TEDx यूथ के माध्यम से सनबीम भगवानपुर ने युवाओं में जिज्ञासा, स्वतंत्र चिंतन, रचनात्मकता और नेतृत्व क्षमता को निखारने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया। यह आयोजन केवल विचारों के आदान-प्रदान का नहीं, बल्कि जगाई गई संभावनाओं का उत्सव था, जिसने हर व्यक्ति को यह एहसास कराया कि वह अपने आसपास की दुनिया पर कितना प्रभाव डाल सकता है।
मंच भले ही शांत हो गया हो, पर इसकी लहरें अब भी जारी हैं, हर उस विचार में जो जड़ें जमाता है, हर उस निर्णय में जो नई संभावना का द्वार खोलता है और हर उस कार्य में जो किसी और को प्रेरित करता है।








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