कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वंदे मातरम को दिए सर्वोच्च सम्मान का विरोध करने के लिए नीचा स्तर छुआ!
दिल्ली के सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव में ‘वंदे मातरम’ गीत के प्रदर्शन और सम्मान के लिए सरकारी निधि!

सनातन संस्था ने अपनी रौप्य जयंती वर्ष के अवसर पर 13 से 15 दिसंबर के कालावधि में दिल्ली में ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ का आयोजन किया था। इस अवसर पर देशभर की विभिन्न संस्थाओं, संगठनों के प्रतिनिधि इस कार्यक्रम में उपस्थित थे। इस कार्यक्रम के निमित्त देशभर से हजारों हिंदुत्वनिष्ठ आने वाले थे, इसलिए उनके समक्ष माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई संकल्पना के अनुसार ‘वंदे मातरम’ का गौरव हो, इस दृष्टि से सनातन संस्था ने वंदे मातरम गीत का भव्य प्रदर्शन तीन दिनों तक भारत मंडपम के निकट हॉल नं. 12 में आयोजित किया था। साथ ही मुख्य कार्यक्रम में वंदे मातरम का समूह गान भी आयोजित किया गया था। इसके साथ ही इस प्रदर्शनी में छत्रपती शिवाजी महाराज के काल के ऐतिहासिक शस्त्र थे। इस प्रदर्शन का उद्घाटन माननीय मंत्रियों के हाथों करने का निर्धारित था और इसके लिए नियमित सरकारी प्रक्रिया से हमने शासन के पास प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। उसके अनुसार सभी प्रशासनिक मान्यताएं प्राप्त कर शासन ने इसे मान्यता दी। इसके अतिरिक्त शेष कार्यक्रम सनातन संस्था के रौप्य महोत्सव का था और इसका नाम ही ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ था, इसलिए इसे हिंदू राष्ट्र का महोत्सव बताकर कांग्रेस द्वारा झूठा प्रचार किया जा रहा है, यह जवाब सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. अभय वर्तक ने दिया है। सनातन संस्था के प्रवक्ता श्री. वर्तक ने आगे कहा कि, इस कार्यक्रम में कोई भी भारतीय संविधान विरोधी भाषण नहीं हुआ। सभी वक्ताओं ने हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का पक्ष रखा और उसके उपाय बताए। वास्तव में कांग्रेस के तेलंगाना राज्य के मुख्यमंत्री संवैधानिक पद पर रहते हुए “कांग्रेस मतलब मुस्लिम और मुस्लिम मतलब कांग्रेस” जैसी संविधान विरोधी घोषणा करते हैं, कांग्रेस के तत्कालीन प्रधानमंत्री “इस देश की साधन-संपत्ति पर पहिला हक मुसलमानों का है” ऐसा बयान देते हैं। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कई बार नकारे जाने के बावजूद धर्म के आधार पर मुस्लिम समाज को आरक्षण घोषित करते हैं, केरल में कांग्रेस के नेता बीफ बैन का विरोध करने के लिए सड़क पर गौहत्या करते हैं, क्या ये सब संविधान विरोधी नहीं हैं? इसलिए कांग्रेस को पहले अपनी पापों को देखना चाहिए। कांग्रेस द्वारा किए गए सिखों के नरसंहार को लोग आज भी नहीं भूले हैं, साथ ही बटला हाउस के आतंकवादियों के लिए आंसू बहाना, मुंबई के 26/11 के आतंकी हमले में कसाब आदि पाकिस्तानी आतंकवादियों की संलिप्तता के प्रमाण होने पर भी कांग्रेस के नेता “26/11 का हमला RSS की साजिश” बताने वाली पुस्तक के विमोचन में उपस्थित होते हैं। कांग्रेस के तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने तो अब खुले तौर पर कबूल किया है कि मुझे हिंदू आतंकवाद शब्द का प्रयोग नहीं करना चाहिए था, लेकिन पार्टी ने कहा इसलिए किया। उन्हें यह हिंदुओं को आतंकवादी बताने वाली थ्योरी किसने सुझाई थी, इसका स्पष्टीकरण कांग्रेस पार्टी क्यों नहीं देती? इसी थ्योरी के आधार पर सनातन संस्था को झूठे मामलों में फंसाया गया था। हमारी न्याय व्यवस्था पर विश्वास है; लेकिन किसी भी मामले में न्यायालय ने सनातन संस्था को दोषी नहीं ठहराया फिर भी हमें आतंकवादी संबोधन करने वाले कांग्रेस नेताओं पर तथा संबंधित पोर्टल पर हम बदनामी के मुकदमे दायर करेंगे, यह भी श्री. वर्तक ने कहा।








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