स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं राकेश न्यायिक, फर्जी वसीयत मामले को लेकर करेंगे मुकदमावाराणसी में एक धार्मिक विवाद को लेकर नया मोड़ सामने आया है। वाराणसी के समाजसेवी एवं लेखक साहित्यकार चिंतक राकेश न्यायिक ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि वर्ष 2017 में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की एक कथित फर्जी वसीयत तैयार कर उन्हें शंकराचार्य पद पर स्थापित किया गया।

राकेश न्यायिक का आरोप है कि उक्त वसीयत में कथित रूप से अपने करीबी लोगों को गवाह और टाइपकर्ता बनाकर दस्तावेज तैयार किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरा मामला एक गंभीर साजिश का हिस्सा है।
उन्होंने वसीयत की एक प्रति मीडिया को जारी करने का दावा करते हुए कहा है कि वह इस दस्तावेज को न्यायालय में चुनौती देंगे। साथ ही वाराणसी पुलिस को तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराने का प्रयास करेंगे।
सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में वे अपने अधिवक्ता के माध्यम से पुलिस आयुक्त से मिलकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी देने की तैयारी कर रहे हैं। क्योकि
मामले की सच्चाई का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। इसलिए फर्जी वसीयत मामले में मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना किया जाना समाज हित में है | ताकि समाज में सच सामने आये

जाने राकेश न्यायिक कौन है
लंबे अरसे से पूर्वांचल और देश-प्रदेशमें समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार अनाचार के के अलावा माफ़गांव के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ा उसे अअंजाम तक पहुंचने वाले राकेश नई इन दोनदिनोदिन स्वामी अभी मुक्तेश्वर आनंद के कुकर्मों को सार्वजनिक करने और उसे कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाने में भी अपनी भूमिका निभाने में जुटे हुए हैं स्वामी अभी मुक्तेश्वर आनंद को छात्र जीवन से ही जानने वाले प्रसिद्ध समाज सेवी लेखक साहित्यकार चिंतक समाजसेवी राकेश न्यायिक ने ने अपने पहले इंटरव्यू में ही बताया था कि स्वामी अभी मुक्तेश्वर आनंद युवा कल से अय्याश स्वभाव के युवक थे बाद में उन्होंने विद्या मठ में पहुंचकर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वामी रूपानंद महाराज को धोखे में रखकर उनका फर्जी वसीयत तैयार कर ज्योति पीठ का पीथारेश्वर बन बैठा है और अब इस मामले को समाज के सामने लाना आवश्यक है








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