सिखों के आनंद विवाह रजिस्ट्रेशन के लिए नई नियमावली को कैबिनेट ने दी मंजूरी
तहसील से लेकर राज्य स्तर तक तय होंगे रजिस्ट्रार, तीन महीने के भीतर कराना होगा विवाह पंजीकरण

लखनऊ, 10 मार्च। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सिख समुदाय के विवाह पंजीकरण को आसान बनाने के लिए “उत्तर प्रदेश आनंद विवाह रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026” को प्रख्यापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सिख धर्म में प्रचलित ‘आनंद कारज’ विवाह के पंजीकरण को सुगम बनाने के लिए यह नियमावली लागू की जा रही है। यह व्यवस्था आनंद मैरिज एक्ट, 1909 (संशोधित 2012) की धारा-6 के तहत राज्य सरकार को प्राप्त अधिकारों के आधार पर बनाई गई है। साथ ही यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट में दायर रिट याचिका अमनजोत सिंह चड्ढा बनाम भारत संघ व अन्य में 4 सितम्बर 2025 को दिए गए निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है।
नई नियमावली के तहत आनंद विवाह के पंजीकरण के लिए तहसील स्तर पर उप जिलाधिकारी (एसडीएम) को रजिस्ट्रार, जनपद स्तर पर जिलाधिकारी को जिला रजिस्ट्रार, मंडल स्तर पर मंडलायुक्त को मंडलीय रजिस्ट्रार तथा राज्य मुख्यालय पर निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ को मुख्य रजिस्ट्रार नामित किया जाएगा। नियमावली के अनुसार विवाह के पक्षकार या उनके रिश्तेदार विवाह संपन्न होने की तिथि से तीन महीने के भीतर निर्धारित प्रारूप में 1500 रुपये के न्यायालय शुल्क स्टाम्प के साथ विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकेंगे। निर्धारित समय के बाद भी आवेदन देने की व्यवस्था होगी, लेकिन इसके लिए नियमानुसार विलंब शुल्क देना होगा।
इसके साथ ही यदि कोई पक्ष रजिस्ट्रार के आदेश से असंतुष्ट होता है तो वह जिला रजिस्ट्रार के समक्ष अपील कर सकेगा। जिला रजिस्ट्रार के आदेश के खिलाफ मंडलीय रजिस्ट्रार के पास अपील की व्यवस्था भी की गई है। नियमावली में विवाह रजिस्टर के रख-रखाव और उसकी प्रमाणित प्रति प्राप्त करने से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। नियमावली के लागू होने से प्रदेश में सिख समुदाय के आनंद विवाह का विधिवत पंजीकरण आसान होगा और विवाह से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ेगी।





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