पत्रकारिता समाज को दिशा देने वाली चेतना: डा॰ इंदीवर
हिंदी पत्रकारिता दिवस पर काशी पत्रकार संघ में आयोजित संगोष्ठी में बोले वक्ता

वाराणसी। पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली चेतना है। वर्तमान समय डिजिटल क्रांति का युग है। इंटरनेट, सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म ने संचार और पत्रकारिता के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। हिन्दी पत्रकारिता भी इस परिवर्तन से अछूती नहीं रही। यह विचार शनिवार को काशी पत्रकार संघ की ओर से पराड़कर भवन में आयोजित डिजिटल युग में हिन्दी पत्रकारिता की चुनौतियाँ, संभावनाएँ (सोशल मीडिया, फेक न्यूज डिजिटल प्लेटफॉर्म और बदलती पाठक संस्कृति) विषयक संगोष्ठी में वक्ताओं ने व्यक्त किए।

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ इंदीवर ने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता का विस्तार अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है और वह वैश्विक स्तर पर करोड़ों पाठकों तक पहुँच रही है। किन्तु इस तकनीकी विकास के साथ अनेक चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। सबसे बड़ी चुनौती फेक न्यूज़ और भ्रामक सूचनाओं की है। सोशल मीडिया पर बिना सत्यापन के खबरें तेजी से प्रसारित हो जाती हैं, जिससे समाज में भ्रम, तनाव और अविश्वास की स्थिति उत्पन्न होती है। इससे मीडिया को बचने की जरूरत है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो, सुरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा पत्रकारिता की मूल आत्मा सत्य, निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर आधारित होती है, लेकिन डिजिटल प्रतिस्पर्धा और त्वरित प्रसारण की होड़ में कई बार इन मूल्यों की उपेक्षा दिखाई देती है।








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