गाजीपुर में सीक्यूएमएच अब्दुल हमीद, परमवीर चक्र (मरणोपरांत) की 61वीं शहादत वर्षगांठ पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि
वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले 4 ग्रेनेडियर्स के महान योद्धा कंपनी क्वार्टरमास्टर हवलदार (सीक्यूएमएच) अब्दुल हमीद, परमवीर चक्र (मरणोपरांत) की 61वीं शहादत वर्षगांठ के अवसर पर गाजीपुर के धामूपुर गांव में एक गरिमामय श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया।
माननीय रक्षा राज्यमंत्री श्री संजय सेठ ने राष्ट्रनायक सीक्यूएमएच अब्दुल हमीद को पुष्पचक्र अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। समारोह में पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश सब एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग; 39 गोरखा ट्रेनिंग सेंटर के कमांडेंट; मानद कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव, परमवीर चक्र (सेवानिवृत्त); वरिष्ठ सैन्य अधिकारी; सेवारत सैन्यकर्मी; पूर्व सैनिक; नागरिक गणमान्य व्यक्ति तथा शहीद के परिजन भी उपस्थित रहे।
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के धामूपुर गांव के निवासी सीक्यूएमएच अब्दुल हमीद भारतीय सेना की 4 ग्रेनेडियर्स के वीर सैनिक थे। उनका असाधारण साहस, अटूट संकल्प और सर्वोच्च बलिदान भारतीय सेना की गौरवशाली परंपराओं का अमिट प्रमाण है।
असल उत्तर की लड़ाई में अदम्य वीरता
10 सितंबर 1965 को खेमकरण सेक्टर में असल उत्तर की लड़ाई के दौरान दुश्मन ने पैटन टैंकों के नेतृत्व में एक बड़ा बख्तरबंद हमला किया। दुश्मन की भीषण गोलाबारी के बीच सीक्यूएमएच अब्दुल हमीद ने जीप पर लगी 106 एमएम रिकॉयलेस राइफल के साथ सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण, किंतु बेहद जोखिमपूर्ण स्थान पर मोर्चा संभाला।

असाधारण युद्ध-कौशल और अदम्य साहस का परिचय देते हुए उन्होंने अचूक निशानों से दुश्मन के कई टैंकों को ध्वस्त कर उसके बख्तरबंद हमले की गति रोकने में निर्णायक भूमिका निभाई। अपने मोर्चे पर हो रही भारी गोलाबारी से अविचलित रहते हुए वे अंतिम क्षण तक दुश्मन का मुकाबला करते रहे और मातृभूमि की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया।
उनका अनुपम साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण ‘सेवा परमो धर्मः’ और ‘स्वयं से पहले सेवा’ की सैन्य भावना का सर्वोच्च उदाहरण है। सीक्यूएमएच अब्दुल हमीद, परमवीर चक्र (मरणोपरांत) की वीरता देशवासियों की आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।







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