शिक्षा से रोजगार तक का रास्ताशिक्षा और आजीविका के निर्माण में निवेश- सुधांश पंत

आर्थिक सशक्तिकरण की शुरुआत तब होती है, जब कोई युवा अपनी शिक्षा पूरी करके करियर बनाने की तैयारी शुरू करता है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने इसी यात्रा को ध्यान में रखते हुए अपनी योजनाओं की रूपरेखा तैयार की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक चरण में मिलने वाली सहायता अगले चरण में नए अवसरों का रास्ता खोले।
विद्यार्थियों को अपनी शिक्षा जारी रखने में मदद करने वाली छात्रवृत्तियों से लेकर फेलोशिप, कोचिंग, कौशल विकास और उद्यमिता के लिए वित्तीय सहायता तक, इन पहलों का उद्देश्य सहायता की एक ऐसी निरंतर व्यवस्था विकसित करना है, जो लोगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने में सक्षम बनाए।
छात्रवृत्तियों के माध्यम से मजबूत नींव का निर्माण
वंचित वर्ग के ऐसे विद्यार्थी के लिए, जिसके परिवार के पास सीमित आर्थिक संसाधन हैं, स्कूली शिक्षा पूरी करना भी एक चुनौती हो सकती है। आठवीं कक्षा पूरी करने के बाद परिवार के सामने अक्सर यह सवाल खड़ा हो जाता है कि क्या बच्चे की पढ़ाई आगे जारी रख पाना संभव होगा।
पूर्व-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना इस चिंता को दूर करने में मदद करती है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को नौवीं और दसवीं कक्षा तक अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए सहायता दी जाती है।
स्कूली शिक्षा के बाद, उत्तर-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना विद्यार्थियों को शिक्षा से जुड़े खर्चों में सहायता प्रदान करती है। इसमें शिक्षण शुल्क और रखरखाव संबंधी खर्च शामिल हैं। इस सहायता से विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
विद्यार्थियों को शिक्षा व्यवस्था से जोड़े रखना विभाग की छात्रवृत्ति योजनाओं की बुनियादी सोच है। पिछले 12 वर्षों में अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अन्य पात्र विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही पूर्व-मैट्रिक और उत्तर-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत 19.8 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को 65,756 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि विद्यार्थियों को आर्थिक बाधाओं से उबरने और अपनी शिक्षा जारी रखने में मदद देने के लिए बड़े स्तर पर सहायता प्रदान की गई है।
छात्रवृत्ति योजनाओं का दायरा बढ़ाने के साथ-साथ, सहायता पहुंचाने की व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। वर्ष 2021-22 से छात्रवृत्ति योजनाओं को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) से जोड़ दिया गया है। इसके साथ ही, दोहराई गई प्रविष्टियों को हटाने के लिए रिकॉर्ड का मिलान, विद्यार्थियों और अधिकारियों के लिए बायोमेट्रिक ई-केवाईसी तथा अलग-अलग शैक्षणिक वर्षों में विद्यार्थियों का रिकॉर्ड रखने के लिए एक बार पंजीकरण जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।
डिजिलॉकर, उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (एआईएसएचई) और शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (यूडाइस) के डेटाबेस के साथ एकीकरण ने भी इस व्यवस्था को मजबूत किया है। इन उपायों से यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि आर्थिक सहायता सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में पहुंचे। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ती है।
उच्च शिक्षा और शोध के लिए नए रास्ते खोलना
स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने की आकांक्षा रखने वाले विद्यार्थियों के सामने भी आर्थिक बाधाएं बनी रह सकती हैं। विभाग की उच्च शिक्षा संबंधी योजनाओं का उद्देश्य शैक्षणिक यात्रा के विभिन्न चरणों में इन बाधाओं को दूर करना है।
शीर्ष श्रेणी शिक्षा योजना के तहत निर्धारित प्रमुख शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को शिक्षण शुल्क और अन्य पात्र शैक्षणिक खर्चों के लिए सहायता दी जाती है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि योग्यता के आधार पर प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर न होना पड़े।








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