April 8, 2026 9:07 am

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डिजिटल फिल्म मेकिंग में एआई और ड्रोन का बढ़ रहा है दखल – फिल्म मेकिंग के क्षेत्र में रोजगार के अनेक अवसर पर युवाओं को होना पड़ेगा पर प्रशिक्षित – प्रोफेसर सजल मुखर्जी

डिजिटल फिल्म मेकिंग में एआई और ड्रोन का बढ़  रहा है दखल – फिल्म मेकिंग के क्षेत्र में रोजगार के अनेक अवसर पर युवाओं को होना पड़ेगा पर प्रशिक्षित – प्रोफेसर सजल मुखर्जी

कार्यशाला के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने दी तकनीकी ट्रेनिंग

प्रैक्टिकल सत्रों में छात्रों ने सीखी फिल्म निर्माण की बारीकियां

एआई, कैमरा सेटिंग्स और ड्रोन नियमों पर हुआ गहन प्रशिक्षण

प्रशिक्षणार्थियों ने दो समूहों में बनाए दो लघु फिल्म

वाराणसी | 07 अप्रैल, 2026।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कला संकाय स्थित प्रेमचंद सभागार में आयोजित दो-दिवसीय कार्यशाला “ड्रोन और एआई का उपयोग- डिजिटल फिल्म निर्माण” के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने फिल्म निर्माण की तकनीकी बारीकियों पर विस्तृत सत्र लिए। कार्यशाला का यह दिन पूरी तरह से आधुनिक उपकरणों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यावहारिक प्रयोग पर केंद्रित रहा।

 

विशेषज्ञ डॉ मुदिता राज ने अपने सत्र में एआई के विभिन्न प्रकारों जैसे जेनरेटिव एआई और एजेंटिक एआई पर विस्तार से चर्चा किया। उन्होंने जेमिनी और डीपसीक जैसे मॉडलों का उदाहरण देते हुए बताया कि एआई का परिणाम उपयोगकर्ता के ‘प्रॉम्प्ट’ की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि आज डेटा-ड्रिवन स्टोरीटेलिंग का दौर है, जहां भविष्य में दर्शक खुद फिल्म के अगले सीन को नियंत्रित कर सकेंगे। साथ ही एआई के रचनात्मक उपयोग के साथ उसके संभावित दुष्प्रभावों के प्रति भी छात्रों को जागरूक किया।

तकनीकी सत्र में ड्रोन स्पेशलिस्ट अंकित कुमार मलयन ने डीएसएलआर कैमरे की बुनियादी सेटिंग्स एपर्चर, आईएसओ और व्हाइट बैलेंस को विस्तार से समझाया। उन्होंने महत्वपूर्ण तकनीकी सुझाव देते हुए कहा कि वीडियो जिस फ्रेम रेट पर शूट किया गया हो, एडिटिंग भी उसी फ्रेम रेट पर की जानी चाहिए, अन्यथा वीडियो में झटके महसूस होते हैं। ड्रोन तकनीक पर चर्चा करते हुए डिजीसीए के नियमों की जानकारी भी साझा की।

वहीं, विशेषज्ञ डॉ नवीन गौतम ने प्रभावी फिल्म निर्माण के व्यावहारिक पहलुओं पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों को बताया कि केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि निरंतर अभ्यास ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने छात्रों को दो समूहों में विभाजित कर उन्हें मूवी मेकिंग की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।

कार्यशाला के दौरान छात्रों के सहयोग से दो शॉर्ट फिल्में  डस्टबिन और बटुआ भी तैयार की गईं। जिसका स्क्रीनिंग/ प्रदर्शन समापन समारोह में अतिथियों के समक्ष किया गया।

प्रतिभागियों को प्री-प्रोडक्शन से लेकर पोस्ट-प्रोडक्शन और एडिटिंग तक की सभी प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यक्रम कार्यशाला के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में एपीजे इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन नई दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर सजल मुखर्जी ने कहा की डिजिटल फिल्म मेकिंग के क्षेत्र में अनेक अवसर बड़े हैं जिसके लिए छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षित करने की आवश्यकता है डिजिटल फिल्म मेकिंग में परिदृश्य बदल रहा है जिसमें ड्रोन और आई की भूमिका महत्वपूर्ण हो रही है छात्रों को इस दिशा में समुचित प्रशिक्षण प्रदान किए जाने की आवश्यकता है। कार्यशाला में भाग लेने वाले सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रधान किए गए। कार्यशाला संयोजक डॉ. बाला लखेन्द्र ने दो वीरेंद्र चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यशाला पर संक्षिप्त रिपोर्ट प्रस्तुत की।
सह-संयोजक डॉ. धीरेंद्र कुमार राय ने अतिथियों का स्वागत किया और आयोजन सचिव डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया :

प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह कार्यशाला उनके लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक रही। उन्होंने बताया कि उन्हें पहली बार ड्रोन तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के व्यावहारिक उपयोग को इतने करीब से समझने का अवसर मिला। छात्रों के अनुसार, इस प्रशिक्षण ने न केवल उनकी तकनीकी समझ को मजबूत किया, बल्कि फिल्म निर्माण के प्रति उनके दृष्टिकोण को भी व्यापक बनाया।

कुछ प्रतिभागियों ने कहा कि एआई टूल्स और कैमरा तकनीकों की बारीकियों को सीखकर उन्हें भविष्य में बेहतर कंटेंट क्रिएशन करने का आत्मविश्वास मिला है। वहीं, कई छात्रों ने इस प्रकार की कार्यशालाओं को नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि वे बदलती तकनीकों के साथ खुद को अपडेट रख सकें।

कला संकाय के पत्रकारिता और जन संप्रेषण विभाग के अलावा अंग्रेजी विभाग इतिहास विभाग, मंच  कला संकाय और  दृश्य कला संकाय से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने इस दो-दिवसीय कार्यशाला में हिस्सा लिया।

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Author: Liveupweb

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